नि:संदेह गोडसे देशभक्त थे, यह कहने में शर्म कैसी? थे तो थे!

साध्वी प्रज्ञा ठाकुर मुझे ईमानदार नज़र आती हैं। सियासी फायदे नुकसान से बेपरवाह उन्होंने वो बोला जो उनके दिल में है। जिस तरह से जिहादी, रोहिग्यां और पाकिस्तानपरस्त खुल कर याकूब मेमन के लिये एड़ी-चोटी का ज़ोर लगाते हैं, रात के दो बजे कोर्ट खुलवाते हैं, उस तरह से हिंदुओं में साहस क्यों नहीं उत्पन्न … Continue reading नि:संदेह गोडसे देशभक्त थे, यह कहने में शर्म कैसी? थे तो थे!