…और उस कोतवाल ने ‘किसी बड़े पेड़’ के गिरने पर नहीं कांपने दी ज़मीन

31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी की हत्या कर दी गई। सिक्खों को सबक सिखाने के ‘ऊपर से आये निर्देशों’ के बाद देश भर में काँग्रेसी नेताओं के दिशानिर्देश में सामान्य काँग्रेसी कार्यकर्ता सिक्खों के कत्लेआम में व्यस्त हो गये।

हज़ारों सिक्खों को – कई बार उनके परिवार की महिलाओं के सामने भी – पैट्रोल डीज़ल डालकर, या जलते टायर उनके गले में डालकर या उनको पीटते हुये उनकी ही दुकान या मकान में जलाकर मार दिया गया।

मेरा कस्बा किच्छा (वर्तमान में ज़िला उधमसिंह नगर, उत्तराखंड) उस समय उत्तरप्रदेश में और ज़िला नैनीताल में था। यहां के कुछ काँग्रेसियों ने प्लानिंग की कि किसी तरह किसी सिख को जलाकर मार दिया जाये तो वो काँग्रेस के बड़े नेताओं की नज़र में आ जायेंगे और इससे उन्हें राजनैतिक लाभ हो सकता है।

लेकिन एक समस्या थी।

कस्बे का कोतवाल सतर्क था और किसी भी कीमत पर अपने थाने में ऐसा कुछ न होने देने के लिए दृढ़संकल्पित था।

कुछ काँग्रेसी लोगों ने पूरी प्लानिंग की। एक झूठे हिन्दू-सिक्ख झगड़े की बात कहकर पुलिस कोतवाल को एक जगह विशेष पर बुला लिया गया। लेकिन वहां पहुंचकर दो मिनट में ही कोतवाल को यह स्पष्ट हो गया कि वहां कोई झगड़ा नहीं हुआ था बल्कि वहां कोई सिक्ख था ही नहीं।

दूसरे उन्होंने तुरन्त यह महसूस किया कि उपस्थित लोग उनको (कोतवाल साहब को) जबरन लम्बी बातों में फंसाकर वहां रोके रखना चाहते हैं और यह कुछ रहस्यमय मामला है।

उन्होंने कोतवाली फोन करना चाहा – और कोतवाली में अपने साथियों से बात करते हुये यह झूठ बोला कि कोतवाली में कुछ गुण्डा तत्व पकड़ कर लाए गए हैं इसलिये वह तुरन्त कोतवाली के लिए निकल रहे हैं।

लेकिन बाहर निकलकर कोतवाल साहब ने तुरन्त अपनी जीप के ड्राइवर से शहर का चक्कर लगाने को कहा। और मुश्किल से 2-4 मिनट जीप के चलने के बाद ही एक जगह एक सिक्ख व्यक्ति को घेरे कुछ लोग दिख गये जो उन सिक्ख सज्जन के गले में एक जलता हुआ टायर डाल रहे थे।

कोतवाल साहब के साथ सिर्फ एक सिपाही व एक ड्राइवर मात्र थे। पर उन्होंने तुरन्त अपनी सरकारी पुलिस रिवाल्वर निकालकर एक हवाई फायर करते हुये वहां खड़ी भीड़ को धमकाकर वहां से हटाया और अपने साथियों की मदद से सरदारजी को उस जलते हुए टायर से बचाया।

वह सरदार जी आज भी जीवित हैं और उनका परिवार आज भी एक सम्माननीय जीवन जी रहा है और सभी किच्छा में ही रह रहे हैं।

मुझे गर्व है कि मैं उस समय के किच्छा के उन कोतवाल का बेटा हूँ।

मुझे गर्व है कि देश व प्रदेश में काँग्रेस की सरकार होने के बावजूद मेरे पिताजी ने ‘किसी बड़े पेड़’ के गिरने पर अपने अधिकार क्षेत्र में ज़मीन को कांपने नहीं दिया था।

काँग्रेसियों, तुम्हारे कारनामे तो बहुत हैं। कब तक बहाने बना बनाकर अपनी इज़्ज़त बचाओगे?

वैसे भी, प्रधानमंत्री तो फिर से मोदी जी ही बनेंगे।

और हां

जय हिंद

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