VISCERAL HATRED : क्या आप समझते हैं इसका अर्थ?

Visceral का संबंध भावनाओं की तीव्रता से है, जिसका कोई तार्किक या स्वानुभव आधारित कारण नहीं होता – कोई आप की भैंस खोली नहीं होती।

Hatred का अर्थ घृणा दिया जाता है लेकिन बैरभाव यहाँ अधिक सही लगता है। वैसे जिस भाव से ‘नफरत’ कहा जाता है, वह भाव भी सही है ।

आप सोच रहे होंगे यह सब क्यों समझा रहा हूँ।

बहुसंख्य मज़हबियों की (अपवादों का दिल से सम्मान भी है) नरेंद्र मोदी को लेकर जो प्रतिक्रिया होती है उसकी बात कर रहा हूँ। शब्द कभी शालीन होते हैं तो कभी ठेठ। लेकिन भावनाएँ स्पष्ट होती हैं, क्या स्त्री क्या पुरुष। लेकिन कोई कारण नहीं दिखता कि वे मोदी जी से इस तरह नफरत करें।

जिनका गुजरात से कोई संबंध नहीं, और कई जो तब पैदा भी नहीं हुए थे वे भी गुजरात को लेकर मोदी जी को कोस रहे होते हैं। भायलोग, एक तो कड़ी पूछताछ के बावजूद तिनके को भी सबूत बनाने पर आमादा काँग्रेस सरकार उनपर कोई आरोप साबित नहीं कर सकी और इतने सालों बाद भी केवल छींटाकाशी से ही काम चला रहे हैं आप लोग और काँग्रेस के बगल बच्चे। और गोधरा की बात को आप गुजरात गुजरात चिल्ला चिल्लाकर दबाना चाहते हैं यह हमें भी समझ में आता है।

और हाँ, गोधरा से शुरुआत आप लोगों ने की इसके बावजूद अगर आप गुजरात पर अड़े रहना चाहते हैं तो आप की ढाये जुल्मों को याद रखने के लिए तो हमारे पास हज़ार सालों की हज़ारों निशानियाँ हैं जो झूठा इतिहास लिखवाने के बावजूद भी अपने घाव बयान करते उन ज़ख़्मों को हरा करते खड़ी हैं। न्याय वे भी मांग रही हैं। हमारे ये बात करने पर आप का सुझाव होता है दिल बड़ा करने का – उससे हार्ट अटैक आ सकता है, शायद इसलिए ही कहते हो!

खैर, मोदी जी के लिए आप को visceral hatred क्यों है यह समझ में नहीं आ रहा। उन्होंने जो भी योजनाएँ दी हैं, ऐसा नहीं कि आप ने उनका लाभ नहीं लिया है – सरकारी योजनाओं का मुफ्त में लाभ उठाने में आप से सजग समाज भारत में दूसरा नहीं होगा कोई! फिर भी आप को शिकायत है कि उन्होंने आप की कौम के लिए कुछ नहीं किया। मतलब खास आप को ही कुछ नहीं दिया।

ज़रा ये बताएँगे कि खानेवाले मुंह और समस्याओं के अलावा आप के मज़हब और कौम का इस धरती पर योगदान रहा क्या है? ऐसा है ही क्या जो आप इस कौम के ज़बर्दस्ती के मेम्बर न बनाये गए होते तो भारत में न होता? वैसे तो यह बात वर्ल्ड लेवल पर लागू है।

तो ज़रा बताइये तो सही, मोदी जी के लिए आपकी नफरत का राज़? क्या गुजरात में आप की कौम की ‘धमाल’ का डर खत्म हुआ, यह गुस्सा है आप को? क्या 2014 के बाद भारत में भी बड़े दंगे न कर पाये, आप यह गुस्सा है आप को? ऐसा क्या किया है मोदी जी ने आप के खिलाफ जिसका आप को गुस्सा है?

और हाँ, काले धंधों की बात है तो हमारे पास काले धंधे करने वाले हिंदुओं के लिए भी कोई सॉफ्ट कॉर्नर नहीं। और कोई कारण हो तो बताइये कि आप मोदी जी से visceral hatred क्यों पालते हो।

वैसे ऐसी ही मोदी जी के लिए visceral hatred वामियों और इसाइयों में भी दिखती है। इसाइयों में भी सम्माननीय अपवाद हैं जो तार्किक बात करते हैं, लेकिन वामियों की नफरत भी visceral ही है।

यहाँ एक बात स्पष्ट करना चाहूँगा। आप को मोदी का प्रशंसक होने की कोई आवश्यकता नहीं। आप मोदी जी के विरोधी रहिए, घनघोर विरोध कीजिये भी, आप का यह लोकतान्त्रिक हक़ है और उस हक़ का लोकतन्त्र में सम्मान भी है। वैसे आप हमारे आप के प्रति तार्किक और पूर्ण तथ्यधारित विरोध का भी सम्मान करते हैं या नहीं यह नहीं पूछ रहा, जिन प्रश्नों के उत्तर पता हैं वे पूछकर समय ज़ाया क्यों करें?

बात विरोध की नहीं, बात visceral hatred की है, बिना किसी वैध कारण के बैर भावना की है। क्या आप की visceral hatred केवल मोदी जी के लिए है या मोदी जी एक ऐसे प्रतीक हैं आप के visceral hatred का क्योंकि उनके कारण भारत का हिन्दू मुखर हुआ है।

मूर्तियाँ तोड़ी इसलिए जाती थीं कि उन्हें पूजने वाले लोग खुद को असहाय महसूस करें कि ये हमारी रक्षा नहीं कर सकीं। फिर वे मूर्तिभंजक के खिलाफ़ उठने की हिम्मत नहीं करते, जिसने उनके भगवान की मूर्ति तोड़ दी। पूरे समाज का मानसिक बधियाकरण के लिए यह काम किया जाता था, बाकी आप अपना false gods के false narrative अपने पास रखिये, एक खूंख्वार आक्रांता समाज की मानसिकता हमें भी समझ में आती है। इसे धर्म का मुलम्मा चढ़ाने की कोशिश न करें।

क्या मोदी आज आप के लिए ऐसी मूर्ति है जिसके लिए आप ऐसी तर्कहीन लेकिन हिंसक नफरत पाल रहे हैं? बताएँगे?

बाकी हमारे क्रोध के आधार हैं। भारत में जहां जाओ, खंडित अवशेषों के रूप में। कोई झूठ नहीं। हम visceral hatred नहीं रखते, आप अपनी बताएं।

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