एक कमज़ोर और सत्तालोलुप नेतृत्व का परिणाम आज भी भुगत रहा है भारत

यह लेख मैं अपने 80 वर्षीय पिताजी के आग्रह पर लिख रहा हूँ। विचार और शब्द दोनों उनके हैं। पहली जनवरी 1947 को ब्रिटैन के प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली ने लार्ड माउंटबैटन को एक मीटिंग के लिए बुलाया। माउंटबैटन को यह भान था कि प्रधानमंत्री उनसे क्यों मिलना चाहते थे। भारत पर अंग्रेजी शासन दुश्वार होता … Continue reading एक कमज़ोर और सत्तालोलुप नेतृत्व का परिणाम आज भी भुगत रहा है भारत