मोदी है, तो ही मुमकिन है

नरेंद्र मोदी के पांच साल बीत चुके हैं। अब इस पांच साल के काम पर वे जनादेश मांगने हमारे बीच में हैं।

चुनाव के पांच चरण बीत चुके हैं और जो हमारे विरोधी हैं, यानी जिनके बारे में हम मानते हैं कि उनके वोट हमें नहीं मिलने वाले, वे पूछ रहे हैं कि मोदी ने किया ही क्या है।

खैर, विकास तो प्रत्यक्ष है लेकिन सेक्यूलर चमगादड़ उसे देख नहीं सकते। फिर भी एक बार ये बता देना ठीक हैं कि मोदी जी ने क्या किया है।

उन्होंने ये किया है कि पांच साल में बिना कुछ किए आपको नंगा कर दिया है या अपने ही बुने जाल में फंस कर आप स्वयमेव नंगे हो गए।

कई-कई बार सत्ता स्वयं कुछ करती नहीं बल्कि आप को कुछ करने के लिए स्पेस उपलब्ध करा देती है। मोदी ने बस इतना ही किया।

2014 से पहले का विमर्श देख लें आप। तब धर्मनिरपेक्षता एकमात्र पुण्य था और सांप्रदायिकता एकमात्र पाप। सारे नेता सुबह उठकर सांप्रदायिक ताकतों के संहार की शपथ लेने के बाद ही नाश्ता करते थे। अब वही नेता जनेऊ पहन रहे हैं, शिवभक्त हो गए हैं और अपना गोत्र बता रहे हैं।

मोदी जब प्रधानमंत्री बने तो लूटियन दरबारी आश्वस्त थे कि ये दिल्ली है, अहमदाबाद नहीं। मोदी छोटे-मोटे खिलाड़ी हैं, हम उन्हें टिकने नहीं देंगे।

कहना न होगा कि लूटियन दरबार ने मोदी की छवि खराब करने या उन्हें discredit करने के लिए एक से एक नायाब तरीके खोजे। बिहार विधानसभा चुनाव के ठीक पहले दस जनपथ के इशारे पर सहिष्णुता गिरोह ने अवार्ड वापसी की नौटंकी की। जीतते-जीतते हम बिहार हार गए।

फिर दिल्ली विधानसभा चुनावों से ठीक पहले चर्चों पर हमले शुरू हो गए। हम दिल्ली चुनाव हारे। लेकिन बाद में पता चल गया कि कोई हमला भाजपा ने नहीं किया था। दरअसल कहीं कोई हमला हुआ ही नहीं था। कहीं शराब पीकर दो लोगों ने शर्त लगाई और चर्च में घुस गए तो कहीं चर्च के ही किसी बर्खास्च कर्मचारी ने खिड़की दरवाजे तोड़ दिए। एक बार तो क्रिकेट खेल रहे बच्चों की गेंद चर्च की खिड़की से जा टकराई और वह भी हमला हो गया।

और बंगाल में चर्च में लूट और बलात्कार की घटना हुई। पता चला कि कोई भाजपाई नहीं बल्कि सेक्यूलर गिरोह के परम प्रिय बांग्लादेशी अपराधियों का कारनामा था ये।

लेकिन हमने और आपने मिलकर ये सारे सर्कस फेल किए। आखिर में उन्होंने उन संस्थाओं के जरिए दबाव बनाने की कोशिश की जिन्हें वे जेबी समझते थे और जहां उनके आदमी बैठे थे।

यह दांव भी चला क्या?

आज देख लें आप, वे किस तरह नग्न हो चुके हैं। एक आम आदमी जो थाने से डरता था, आज उसे पता है कि सुप्रीम कोर्ट को भी ब्लैकमेल किया जाता है।

अपनी मनमर्जी न चले तो कभी प्रेस कान्फ्रेंस करा दो, फिर राम मंदिर पर फैसला रुकवाने के लिए महाभियोग की धमकी दो और रफाल पर मनमाफिक फैसले की आस नहीं रह गई तो बलात्कार के आरोप लगवा दो।

अब पता चल रहा है कि चोरों की सरकार कैसे काम करती थी, जहां उपर से नीचे तक सब कुछ फिक्स था। पांच साल में ये हुआ कि सेक्यूलर पार्टियां और कथित सेक्यूलर संस्थान दोनों नंगे हो गए। बेदाग सिर्फ वही बचा जिसे बदनाम करने की सबसे ज्यादा कोशिश हुई।

अब दो बार घुमा फिरा कर कान पकड़ने के बाद तीसरी बार में उनके नेता ने सुप्रीम कोर्ट में सीधे माफी मांगी है। ऐसे दिन कभी नहीं देखे थे इस देश ने। इसलिए वोट मोदी को।

अभी चुनाव के दो चरण और बचे हैं। घर से निकलें, भारत के उज्ज्वल भविष्य के लिए वोट जरूर दें। सिर्फ मोदी को। मोदी कुछ करें या नहीं करें, बस उनका होना ही काफी है। मोदी है, तो ही मुमकिन है।

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