अपने पालतू सांप के डंसने से हुई मौत, शहादत कैसे?

कुख्यात आतंकवादी सेल्वेरासा पद्मनाथन उर्फ KP श्रीलंका के अंतर्राष्ट्रीय आतंकी गिरोह लिट्टे के सरगना प्रभाकरण के बाद गिरोह में सरगना नम्बर 2 की हैसियत रखता था।

प्रभाकरण की मौत के बाद उसे मलेशिया से गिरफ्तार कर के श्रीलंका लाया गया था। कुछ शर्तों और समझौतों के बाद सेल्वेरासा अब अनाथ बच्चों को पढ़ाने का काम करते हुए श्रीलंका में शांत और गुमनाम ज़िन्दगी गुजार रहा है।

ज्ञात रहे कि प्रभाकरण ने मात्र 50 सदस्यों के साथ जब लिट्टे का गठन किया था तब सेल्वेरासा पद्मनाथन ही उसका सर्वाधिक विश्वसनीय और करीबी साथी था। लिट्टे के लिए धन और हथियारों की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी वही संभालता था।

अतः ऐसे व्यक्ति की गिरफ्तारी के बाद उसका साक्षात्कार लेने की होड़ दुनिया भर के मीडिया समूहों में शुरू हो गयी थी। सेल्वेरासा पद्मनाथन ने भी हर मीडिया समूह से खुलकर बात की थी।

ऐसी ही एक बातचीत में उसने बहुत स्पष्ट शब्दों में बताया था कि शुरूआती दिनों में भारत सरकार ने प्रभाकरण की बहुत मदद की थी। भारत सरकार ने ही लिट्टे को श्रीलंका की सेना के खिलाफ लड़ना सिखाया था।

उसने कहा था कि इंदिरा गांधी ने श्रीलंका की सरकार के खिलाफ आतंकी संगठन लिट्टे को पाल पोसकर बड़ा करवाया। इंदिरा गांधी ने ही लिट्टे की हर संभव मदद की नीति बनाई थी। लेकिन शायद उन्होंने ये कभी नहीं सोचा होगा कि जिस आतंकी संगठन की वो मदद कर रही हैं, वही संगठन एक दिन उनके अपने बेटे की जान ले लेगा।

सेल्वेरासा पद्मनाथन ने एक इंटरव्यू में यह भी बताया था कि 1986 में बाकायदा भारत सरकार के हवाई जहाज के साथ एक वरिष्ठ राजनयिक हरदीप सिंह पुरी को श्रीलंका भेजकर राजीव गांधी ने प्रभाकरण को दिल्ली बुलवाया था। उसके साथ लम्बी बातचीत की थी, साथ में भोजन किया था और विदा करते समय उसे अपनी निजी बुलेटप्रूफ जैकेट यह कहते हुए भेंट की थी कि अपना ध्यान रखना।

लेकिन इसके साल भर बाद ही श्रीलंका में भारतीय सेना भेजकर राजीव गांधी ने हज़ारों श्रीलंकाई तमिलों (लिट्टे के सदस्यों) को मौत के घाट उतरवा दिया था। प्रभाकरण ने इसे राजीव गांधी द्वारा उसके साथ किया गया विश्वासघात माना था और राजीव गांधी के खिलाफ आगबबूला होकर उनसे बदला लेने लिये बेचैन हो गया था। परिणामस्वरूप 21 मई 1991 को राजीव गांधी की हत्या कराने में वह सफल हुआ था।

अतः उपरोक्त परिस्थितियों में की गई किसी हत्या को क्या शहादत की श्रेणी में रखा जा सकता है? या यूं कहूं कि क्या अपने पाले हुए सांप द्वारा डंसे जाने पर हुई मौत को क्या शहादत कहा जा सकता है?

कल से राजीव गांधी की तथाकथित शहादत का राग अलाप रहे राहुल गांधी समेत कांग्रेसी चाटुकारों की फौज को उपरोक्त सवाल का जवाब अवश्य देना चाहिए।

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