काँग्रेस की करतूतें उजागर करती पुस्तक ‘कसौटी तथ्य की, सत्य की’

रसोई गैस सिलेंडर की कीमत और आजकल उस कीमत को लेकर हुड़दंग कर रही शातिर काँग्रेस के शोर का सच बताता है मेरी पुस्तक ‘कसौटी तथ्य की, सत्य की‘ का यह अंश…

सितम्बर 2012 में तत्कालीन यूपीए सरकार ने सब्सिडी वाले घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर की सीमा 6 सिलेंडर प्रतिवर्ष पर सीमित कर दी थी।

इसका सीधा अर्थ यह था कि मध्यम एवं निम्न मध्यम वर्ग के उपभोक्ता को भी बिना सब्सिडी वाले कम से कम 6 सिलेंडर प्रतिवर्ष खरीदने पड़ रहे थे।

यहां यह उल्लेख आवश्यक है कि सितम्बर 2012 में सब्सिडी वाले एलपीजी गैस सिलेंडर का मूल्य 417 रूपये था तथा बिना सब्सिडी वाले गैस सिलेंडर का मूल्य 931.50 रूपये था। अर्थात वर्ष में 6 सिलेंडरों पर उपभोक्ता 3087 रूपये अतरिक्त मूल्य दे रहे थे।

इस अंतर को यदि 12 महीनों में विभाजित कर दिया जाए तो प्रतिमाह 257.25 रूपये अतिरिक्त मूल्य का व्यय उपभोक्ता पर पड़ रहा था। अर्थात सब्सिडी वाला सिलेंडर उपयोग करने वाले उपभोक्ता को भी प्रतिवर्ष प्रतिमाह प्रति एलपीजी सिलेंडर का मूल्य औसतन 417+257.25 = 674.25 रूपये प्रति सिलेंडर चुकाना पड़ रहा था। जबकि मोदी सरकार के लगभग 4.5 वर्ष से अधिक शासनकाल के पश्चात मार्च 2019 में सब्सिडी वाले गैस सिलेंडर का मूल्य 493 रूपये है।

सब्सिडी वाले केवल 6 सिलेंडर प्रतिवर्ष दिए जाने के यूपीए के उपरोक्त सरकारी नियम के विरुद्ध जबरदस्त जनाक्रोश व्याप्त होने पर तत्कालीन यूपीए सरकार ने मार्च 2013 से सब्सिडी वाले सिलेंडरों की सीमा 6 से बढ़ाकर 9 सिलेंडर प्रतिवर्ष कर दी थी। अर्थात उपभोक्ता को तब बिना सब्सिडी वाले 3 एलपीजी सिलेंडर प्रतिवर्ष खरीदने पड़ रहे थे।

उल्लेख आवश्यक है कि उंस समय मार्च 2013 में सब्सिडी वाले एलपीजी गैस सिलेंडर का मूल्य 414 रूपये था तथा बिना सब्सिडी वाले गैस सिलेंडर का मूल्य 929.00 रूपये था और 8 महीने बाद दिसम्बर 2013 में 954 रूपये तथा 9 महीने बाद जनवरी 2014 में 1258 रूपये था। जबकि सब्सिडी वाले एलपीजी गैस सिलेंडर का मूल्य लगभग 414 रूपये ही रहा था।

सब्सिडी और गैर सब्सिडी वाले एलपीजी गैस सिलेंडरों के उपरोक्त मूल्यों में 1258 और 929 को अनदेखा कर दोनों के मध्य के 954 को ही मानक मान लें तो उसके अनुसार प्रतिमाह न्यूनतम एक एलपीजी गैस सिलेंडर का उपयोग करने वाले मध्यम एवं निम्न मध्यम वर्ग के उपभोक्ता को 9 एलपीजी गैस सिलेंडरों की सीमा के बाद शेष 3 सिलेंडर खरीदने पर लगभग 1620 रूपये प्रतिवर्ष अतिरिक्त खर्च करने पड़ रहे थे।

इस अंतर को यदि 12 महीनों में विभाजित कर दिया जाए तो उपभोक्ता को प्रतिमाह 135.00 रूपये अतिरिक्त चुकाने पड़ रहे थे। अर्थात सब्सिडी वाला सिलेंडर उपयोग करने वाले उपभोक्ता को भी प्रतिवर्ष प्रतिमाह प्रति एलपीजी सिलेंडर का औसत मूल्य 414+135 = 549 रूपये प्रति सिलेंडर की दर से चुकाना पड़ रहा था। जबकि मोदी सरकार के 5 वर्ष के पूरे कार्यकाल के दौरान गैस सिलेंडर की कीमत 505 रूपये से ऊपर कभी नहीं गयी।

अप्रैल 2014 में लोकसभा चुनाव के लिए होने जा रहे मतदान को ध्यान में रखते हुए तत्कालीन यूपीए सरकार ने फरवरी 2014 में 9 एलपीजी सिलेंडर की सीमा बढ़ाकर 12 एलपीजी सिलेंडर प्रतिवर्ष कर दी थी।

ऐसी थी काँग्रेसी सरकार की शातिर रीति नीति जिसमें जनता लुटती भी थी और उसे पता भी नहीं चलता था।

काँग्रेस के ऐसे अनेक कुकर्मों को उजागर करती है अमेज़न पर उपलब्ध पुस्तक ‘कसौटी तथ्य की, सत्य की

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY