मौलाना मसूद अज़हर : ये धमक है भारत के बढ़ते रुतबे की

साल 2009 में सबसे पहली बार भारत मौलाना मसूद अजहर को अन्तर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करवाने के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) में प्रस्ताव ले कर आया था, लेकिन उस प्रस्ताव को UN ने ठुकरा दिया गया था।

चीन सहित कई देशों ने इसका विरोध किया था। भारत की हैसियत का अंदाज़ा आप इसी बात से लगा सकते हैं।

इसके बाद सोनिया गांधी की मनमोहन सरकार की दोबारा कभी हिम्मत ही नहीं पड़ी इस प्रस्ताव को UN में ले जाने की। पता था कि मुँह की खाएंगे, लेकिन इसके बावजूद किसी भी भाजपा नेता ने भारत या मनमोहन सरकार का मज़ाक नहीं उड़ाया था, उसे ताने नहीं दिए थे और ना ही विदेशी ताकतों का साथ दिया था, किसी ने नहीं कहा कि ‘देहाती औरत’ डर गई।

2016 में मोदी सरकार दोबारा प्रस्ताव लाती है कि UN मौलाना को अन्तर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करे। इस से पहले मोदी पूरे विश्व में घूम घूम कर भारत के लिए समर्थन हासिल कर रहे थे। तब विपक्ष ने मोदी का मज़ाक उड़ाया था कि वे तो विदेश घूमते रहते हैं। विपक्ष का दोष नहीं है, जो लोग बार और डांस के आगे सोच नहीं सकते उन से विदेश नीति की उम्मीद करना बेमानी है।

खैर इस बार चीन ने इस प्रस्ताव पर टेक्निकल होल्ड लगा दिया। प्रस्ताव खारिज तो नहीं हुआ लेकिन लटक गया। इसे बिके हुए भारतीय मीडिया द्वारा मोदी की विदेश नीति को बड़ा झटका बता कर प्रचारित किया गया।

पिछली बार 2009 में प्रस्ताव खारिज हुआ था तो क्या 2009 में सोनिया गांधी की विदेश नीति फेल हो गयी थी? जबकि इस बार सिर्फ टेक्निकल होल्ड पर रखा गया था, लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बाकायदा ट्वीट कर के न सिर्फ मोदी का, बल्कि भारत का भी मज़ाक उड़ाया, ताने दिए, गाल बजा बजा कर चिल्लाए ‘भारत हार गया, भारत की विदेश नीति फेल हो गयी, भारत चीन से डर गया’, लेकिन बड़ा सवाल ये है कि चीन से आधी रात को मिलने वाले क्या ये सब चीन के इशारे पर कर रहे थे? क्या इन सब में सांठगांठ थी?

मोदी अब तक समझ चुके थे कि चीन ऐसे मानने वाला नहीं है। वे 2017 में UN में दोबारा प्रस्ताव ले कर आये, इस बार भारत अकेला नहीं था बल्कि इस प्रस्ताव में US, UK और फ्रांस भी शामिल थे।

पर चीन कहाँ बाज़ आने वाला था, उसने फिर से टेक्निकल होल्ड लगा दिया। अब मोदी के लिए परीक्षा की घड़ी थी। मोदी ने एक बार फिर से मौलाना के मामले पर विश्व समर्थन हासिल करना शुरू किया, चीन के ऊपर इंटरनेशनल प्रेशर क्रिएट किया।

पूरे विश्व में चीन का सामान किसी न किसी बहाने बैन किया जाने लगा, यानी इस बार चीन के पेट पर लात मारी गयी। खिलौनों से ले कर खाद्य पदार्थों तक पर बैन लगाने लगे। US, यूरोप से ले कर UAE तक ने चीन के सामान को बैन करना शुरू कर दिया। चीन अब अपने ही व्यापारियों के प्रेशर में था।

मोदी ने ताबूत में आखिरी कील लगाना शुरू किया और UN ने टेक्निकल होल्ड पर चीन को नोटिस जारी कर दिया। इसका मतलब था या तो चीन पुख्ता कारण बताए अन्यथा टेक्निकल होल्ड को हटा दिया जाएगा। इंटरनेशनल बेइज़्ज़ती से बचने के लिए आखिरकार चीन ने कल टेक्निकल होल्ड हटा लिया और भारत की जीत हुई।

ये कोई छोटी मोटी जीत नहीं है, ये धमक है भारत के बढ़ते रुतबे की, ये कम्पन है भारत की हैसियत की भारत की प्रतिष्ठा की। मौलाना तो बहाना है असल में विश्व को अपनी शक्ति दिखाना है, और आज भारत ने मोदी के नेतृत्व में ये बखूबी कर दिखाया है। आज भारत ने विश्व को अपना 56 इंच का सीना दिखा दिया है।

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