माँ की रसोई से : सोलर कुकर के लाभ और मिट्टी के बर्तन के उपयोग में सावधानियां

मेरे मिट्टी के बर्तनों के प्रयोग के अनुरोध पर कई लोगों ने अपनी समस्या बताई कि इस भागदौड़ वाली दिनचर्या के साथ मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाना मुमकिन नहीं हो पा रहा.

उनको एक सुझाव है कि वे मेरी तरह खाना पहले सोलर कुकर में पकाएं फिर उसे मिट्टी के बर्तनों में रख दें. इससे दोगुना लाभ होगा, पहला सूर्य किरणों से पका भोजन मिलेगा दूसरा मिट्टी के पोषक तत्वों का भी लाभ मिलेगा.

हाँ उसके लिए आपको थोड़ा सा जल्दी उठने का कष्ट उठाना होगा, और मैं सोचती हूँ शारीरिक रोग से उठाये जा रहे कष्ट और एलोपैथिक दवाइयों में फूंके जा रहे धन से हो रहे कष्ट के सामने यह कष्ट नहीं, आनंद ही लगेगा.

और सुबह जल्दी उठने के बहुत सारे लाभ भी हैं –

जल्दी उठने से आपको सूर्य साधना के लिए समय मिलेगा. जिससे आप दिन भर के लिए ऊर्जा एकत्रित कर सकती हैं.
जल्दी उठने से आप दिन भर ताज़गी अनुभव करेंगी.
जल्दी उठने से सारे काम जल्दी हो जाएँगे और आपको अन्य कामों के लिए समय मिलेगा.

तो जल्दी उठकर सूर्य साधना के बाद आप सीधे दाल चावल भिगो दीजिये. यह मैं इसलिए लिख रही हूँ क्योंकि हमारे देश में सामान्यत: दाल चावल रोज़ खाया जाता है.
यदि आपके पास सोलर कुकर है तो आप आधे घंटे बाद ही इसे धोकर सोलर कुकर में पकाने रख दीजिये. गर्मी के दिनों में तो सुबह ही की धूप में  तीन घंटों में और दोपहर की धूप में दो घंटों में पककर तैयार हो जाएगा. यदि आपने सात बजे भी सोलर कुकर में रख दिया तो दस बजे तक आपका खाना तैयार हो जाएगा. इस बीच आप घर के सारे काम निपटा सकते हैं.

जिनके पास समय अधिक है, वे अधिक समय के लिए भिगोयें, मैं एक से दो घंटे के लिए भिगोकर रखती हूँ. सुबह छः बजे भीगा हुआ दाल चावल ग्यारह बजे तक पक, उबलकर, छौंक लगकर तैयार हो जाता है.

और यदि सोलर कुकर नहीं है तो दो घंटे भीगा हुआ चावल काली हांडी में 15 मिनट में पक जाता है. हाँ दाल पकने में इससे दोगुना समय लगेगा लेकिन नमक डालकर ढांककर पकाने से जल्दी पक जाएगा, फिर छौंक अलग से लगाइए. बीच बीच में हिलाते रहिये ताकि वह चिपके नहीं.

मिट्टी के बर्तन में सीधे छौंक लगा रहे हैं तो तेल पहले डालिए फिर उसे गैस पर चढ़ाइए, खाली बर्तन गैस पर चढ़ाने से बर्तन चटक सकता है. और इसे पहले कम आंच पर ही पकाइए, आंच को कभी बहुत तेज़ एकदम से मत कीजिये, धीरे धीरे बढ़ाते हुए ही तेज़ करें. वैसे कम आंच पर ही खाना इतने अच्छे से पक जाता है कि आंच तेज़ करने की आवश्यकता नहीं पड़ती.

और दो तीन दिन में छौंक लगी कड़ाही में चावल अवश्य पका लें, उससे मिट्टी ने जो तेल सोख लिया होता है वो चावल उबालने से निकल जाता है. वरना यह तेल वाला बर्तन बाद में खाने का स्वाद बिगाड़ने लगता है.

बहुत मामूली सी सावधानियां आदत में आ जाती है तो फिर यह बहुत मुश्किल नहीं लगता.

मिट्टी के बर्तन को कभी भी साबुन या डिटर्जेंट से ना मांजे. नारियल या तुरई के मूंज से ऐसे ही मांज लीजिये या स्कॉच ब्राईट से भी सीधे मांज सकते हैं. आपके पास मिट्टी है, कोई सी भी तो उससे मांजना सबसे अच्छा है.

अब आप पूछेंगे तुरई का मूंज क्या होता है. तो आप इसे घर पर भी बना सकते हैं. मोटी जाली वाली पकी हुई तुरई खरीदकर ले आइये और उसे धूप में सुखा दीजिये. सूखने के बाद जब उसकी जाली रह जाए तो वह इतनी मजबूत हो जाती है कि आपके स्कॉच ब्राईट को भी मात करेगा.

आप एक बार इस जीवन शैली में उतर जाते हैं तो वस्तुओं की आवश्यकता और अविष्कार साथ साथ चलता रहता है, आपको किसी भी वस्तु के लिए बाज़ारवाद पर निर्भर नहीं होना पड़ता, यही इसका सबसे बड़ा गुण है.

और यदि आप शुरुआत में कुछ नहीं कर पा रहे हैं तो सबसे पहले मिट्टी की थालियाँ खरीद लीजिये और खाना चाहे किसी में भी पके, खाना मिट्टी के बर्तन में ही खाइए.

आप पूछेंगे ऐसा क्यों करें? तो वह इसलिए क्योंकि मिट्टी में इतने पोषक तत्व होते हैं कि आपके खाने की ऊर्जा बढ़ जाती है, और अधिक खाने पर भी शरीर मोटा नहीं होता, स्वाद तो अलग होता ही है, स्वास्थ्य में भी परिवर्तन आप स्वयं अनुभव करेंगे.

आपके बेहतर स्वास्थ्य की शुभकामनाओं के साथ
माँ जीवन शैफाली

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