हज़ारों साल से हिंदुस्तान के लोगों की तपस्या का केंद्र रहा है जम्मू-कश्मीर

प्रधानमंत्री मोदी का ‘आज तक’ को दिया गया इंटरव्यू अभी देखने का अवसर मिला। इस इंटरव्यू में प्रधानमंत्री मोदी के हर उदगार महत्वपूर्ण हैं, अर्थ से भरे हुए हैं और अगले पांच वर्ष की कार्रवाई की ओर इशारा कर रहे हैं।

फिर भी, जम्मू-कश्मीर के बारे में उनके विचारो ने जैसे मेरे दिल की बात कह दी हो।

जब उनसे पूछा गया कि भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में धारा 370 और 35 A को हटाने की बात की है, जबकि उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती ने कश्मीर का रिश्ता भारत से तोड़ने की धमकी दी है, तब प्रधानमंत्री मोदी ने दो टूक कहा कि “जम्मू-कश्मीर हज़ारों साल से हिंदुस्तान का हिस्सा है। हज़ारों साल से हिंदुस्तान के लोगों की तपस्या का केंद्र रहा है। ये कोई एग्रीमेंट है क्या? हमने कोई सौदा किया है क्या?”

उन्होंने सख्त चेतावनी दी कि “ऐसी भाषा बोलने वालों का जवाब माँगना चाहिए… ऐसी भाषा बोलने वालों को इस देश का नागरिक होने का हक नहीं है। चुनाव लड़ने का हक ही नहीं है उनको।”

फिर उन्होंने कहा कि “कुछ मुट्ठी भर परिवारों ने जम्मू-कश्मीर में ब्लैकमेलिंग का रास्ता चुना हुआ है। जो कश्मीर में एक भाषा बोलते हैं, दिल्ली में आकर के दूसरी बोलते हैं। यह दोगलापन उजाकर करना पड़ेगा। और मैं अभी वह कर रहा हूँ। कि ये दोगलापन है। आप में हिम्मत होनी चाहिए कि जो कश्मीर में बोलते हैं वही दिल्ली में आकर बोलिये। जो दिल्ली में बोलते हैं, वही कश्मीर में बोलिये। नहीं बोल रहे हैं। दो भाषा बोल रहे हैं। एक्सपोज़ हो रहे हैं।”

प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि “हम मानते हैं कश्मीर का सबसे बड़ा नुकसान इन धाराओं ने किया है। आज वहां हमने AIIMS बनाया, आईआईएम बनाया। बड़े प्रोफेसर वहां जाने को तैयार नहीं है… क्यों? तो बोले भाई, रहने को मकान नहीं मिलता है, हम मकान खरीद नहीं सकते हैं। किराया मंहगा पड़ता है। बच्चों को वहां एडमिशन नहीं मिलता है, क्योंकि हमारे बच्चे वहां की प्रिऑरिटी नहीं है। इन्वेस्टमेंट नहीं आ रहा है क्योंकि इन्वेस्टमेंट करने वाला सोचता है कि ज़मीन नहीं मिलती है। ज़मीन ले नहीं सकते। हम कारखाना लगा नहीं सकते। वहां के बच्चों को रोज़गार नहीं मिल रहा है। आर्थिक रूप से कंगाली की संभावना पैदा हुई है। टूरिज़्म को आतंकवादियों ने ख़त्म कर दिया। पूँजी निवेश ख़त्म हो गया धाराओं के कारण। अब वहां के लोगों को भी समझ में आया है कि वहां पर एक बहुत बड़े बदलाव की आवश्यकता है।”

एक तरह से प्रधानमंत्री मोदी ने धारा 370 और 35 A की ‘वैधता’ को यह कहकर चुनौती दे दी है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग इसलिए नहीं कि इसका भारत के साथ कोई ‘एग्रीमेंट’ या ‘सौदा’ है। बल्कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग इसलिए है, क्योंकि जम्मू-कश्मीर हज़ारों साल से हिंदुस्तान के लोगों की ‘तपस्या का केंद्र’ है।

आने वाले समय में एक ‘बहुत बड़े बदलाव’ की झलक दिखलाई दे रही है।

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