आतंक से समझौता : साहस और भक्ति का प्रतीक है भगवा, आतंक का नहीं

‘भगवा आतंक’… यह जुमला काँग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के कार्यकाल में जानबूझ कर उछाला गया था.

इसे प्रचारित करने के पीछे वोट बैंक की एक बड़ी साज़िश थी. इस साज़िश से जुड़े कुछ सबूत और अनसुनी बातें आपको हैरान कर देंगी.

साध्वी प्रज्ञा, कर्नल श्रीकांत पुरोहित, स्वामी असीमानंद जैसे कुछ चर्चित, पर गिने-चुने नाम ही आपने मालेगांव व समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट मामलों में सुने होंगे.

क्या सिर्फ ये गिने-चुने लोग ही इस कथित ‘भगवा आतंकवाद’ की थ्योरी में फंसाए गए या इनके अलावा कई अन्य लोग भी इसकी चपेट में आए?

यदि हाँ.. तो कौन थे वे लोग? हिन्दू दमन के उस दौर का शिकार इन अनगिनत लोगों का आजतक कुछ पता नहीं चला. ये लोग जीवित भी है या नहीं, कहा नहीं जा सकता.

इन सभी तथ्यों का खुलासा और ‘भगवा आतंकवाद’ जैसे जुमले की पोल खोलती वरिष्ठ पत्रकार डॉ प्रवीण तिवारी की पुस्तक ‘आतंक से समझौता‘ न केवल काँग्रेस के कुछ शीर्ष नेताओं को बेनक़ाब करती है वरन वोट बैंक की राजनीति में लिप्त भारतीय राजनीति का बेहद कुरूप चेहरा भी सामने लाती है.

कई पुस्तकों के लेखक डॉ तिवारी की यह नवीनतम और शोधपरक पुस्तक उनकी पिछले तीन वर्षों की कड़ी मेहनत और शोध का परिणाम है, जिसके अध्ययन के बाद निश्चित ही भारतीय राजनीति के प्रति पाठक का दृष्टिकोण ही बदल जाता है.

‘मेकिंग इंडिया’ को दिए इस विशेष साक्षात्कार में डॉ तिवारी ने न सिर्फ इस पुस्तक की रचना प्रक्रिया के बारे में बताया, बल्कि कई बिन्दुओं पर बेहद निर्भीक और बेबाक टिप्पणियां भी कीं, जो पुस्तक के उद्देश्य का वर्णन करने के साथ वर्तमान राजनीति में हलचल मचाने के लिए पर्याप्त हैं.

पुस्तक का अमेज़न लिंक यह है – https://amzn.to/2ZGZQSq

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