कर्नल पुरोहित, स्वामी असीमानंद, साध्वी प्रज्ञा : सबका हिसाब लेगा मोदी!

मैंने तीन वर्ष पूर्व एक लेख लिखा था और आज उसी को आधार बना रहा हूँ।

इसका मूलतः कारण यह कि आज से तीन वर्ष पूर्व इशरत जहाँ और मालेगांव, समझौता एक्सप्रेस बम ब्लास्ट पर नए नए तथ्य सामने आ रहे थे तब नरेंद्र मोदी, हिंदुत्व व हिंदुओं की रक्षा को लेकर कट्टर हिंदूवादियों की आलोचना का शिकार हो रहे थे।

उस वक्त मैं कहता था कि यह नये नये तथ्य जो सामने आ रहे है वे मोदी जी की हिंदुत्व के प्रति प्रतिबद्धता का ही परिणाम है। वे न्याय प्रक्रिया को बिना छेड़े हुये, इस सबका हिसाब, अपने समयानुसार लेंगे।

मेरा मोदी जी को को लेकर तब जो आंकलन था, वह कसौटी पर आज खरा उतर रहा है। भोपाल से साध्वी प्रज्ञा को बीजेपी का प्रत्याशी बनाना व इस को लेकर कल टाइम्स नाउ पर हुये साक्षात्कार में मोदी जी द्वारा दृढ़ता से इस निर्णय का समर्थन करना, बहुत कुछ कह जाता है।


इशरत जहाँ और समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट केस में जो खुलासे हुए हैं उससे यह तो साफ़ हो ही गया है कि यूपीए की पूरी सरकार और 10 जनपथ, अपने कार्यकाल में नरेंद्र मोदी जी और हिन्दू धर्म की अवधारणा रखने वाले व्यक्तियों, दलों और संगठनों को खत्म करने के षडयंत्र में लिप्त थी।

लेकिन इस षडयंत्र को रचने में जो नुकसान भारत के सुरक्षा तन्त्र और समाज का हुआ है उसका सही आंकलन और उसकी क्षतिपूर्ति निकट भविष्य में होती नहीं दिखती है।

सिर्फ एक व्यक्ति यानी नरेंद्र मोदी के पराक्रम से डर कर और उससे उपजी घृणा से वशीभूत हो कर सोनिया गांधी, मनमोहन सिंह और चिदंबरम के नेतृत्व ने, भारत की अस्मिता और उसके सामाजिक ताने बाने को चूर चूर कर दिया है।

यूपीए के 10 साल के कार्यकाल में इन लोगों ने हिन्दू और उससे जुड़ी हर चीज़ को गाली बना दिया था। सोनिया गांधी ने अपनी गांधी परिवार के वंशवाद को बनाये रखने के लिए जहाँ मीडिया में अपने वफादारों से हिंदुओं को हीनता का बोध कराये जाने का षडयंत्र किया, वहीं अपने सेकुलर ब्रांड में सने वामपंथी, समाजवादी मित्रों के साथ बुद्धिजीवियों, ईसाईयों और मुस्लिम कट्टरपंथियों के हर कुकर्म को बढ़ावा दिया था।

नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय पटल पर उदय को रोकने के लिए उन्होंने धर्म के नाम पर गुनहगार और बेगुनाह होने का निर्णय सुनाया, भारत के आर्थिक विकास को रोकने में लगी अंतर्राष्ट्रीय शक्तियों से हाथ मिलाया और भारत के सुरक्षा तन्त्र को छिन्न भिन्न करके जहाँ ईमानदार और कर्मठ लोगों की बलि ली, वहीं संदिग्ध आचरण और चाटुकारों को महत्वपूर्ण पदों पर बैठाया था।

सोनिया गांधी की ‘हिन्दू घृणा’ से उपजे एक नए सेकुलर सिद्धान्त को, यूपीए और उसके सहयोगी दलों, पत्रकारों, बुद्धिजीवियों और मानवाधिकारी संगठनों ने अपना मूल मन्त्र बनाया है… जहाँ एक मुसलमान, भले ही वह एक आतंकवादी हो, वह तब तक बेगुनाह है जब तक उस पर सर्वोच्च न्यायलय से आरोप सिद्ध नहीं हो जाते है, और वहीं एक हिन्दू पर कोई छोटा भी आरोप है तो वह गुनहगार है, जब तक कि वह सर्वोच्च न्यायलय से बाइज्जत बरी नहीं हो जाता है।

अब तो स्थिति इतनी विस्फोटक है कि न्यायालय द्वारा दंडित एक मुस्लिम समुदाय के व्यक्ति को न्यायालय द्वारा दंडित करने पर खुद न्यायालय पर प्रश्न खड़े कर दिए जाते हैं और वहीं जब किसी हिन्दू को न्यायालय दोष मुक्त करता है तब भी न्यायलय पर प्रश्न खड़ा कर, उसे अपराधी ही माना जाता है।

आज इस मूलमन्त्र को इन लोगों ने अपने अंदर इतना आत्मसात कर लिया है कि किसी भी अल्पसंख्यक को सज़ा देना ही अपराध माना जाने लगा है और यह करने पर, सर्वोच्च न्यायालय की गरिमा को तार तार किया जाता है तो उस पर मौन रहना भी सेकुलर की परिभाषा का अंग बना दिया गया है।

सबूतों से घिरी आतंकवादी इशरतजहाँ की लाश बेगुनाह है, शहीद है और कितनों की बेटी है? बिना सबूत के 8 साल से यंत्रणा झेल रहे कर्नल पुरोहित, साध्वी प्रज्ञा, स्वामी असीमानंद आतंकवादी हैं? सर्वोच्च न्यायलय से सज़ा पाये याकूब मेमन, अफज़ल गुरु को फांसी गलत है और वो बेगुनाह हैं? सर्वोच्च न्यायालय के साथ सभी न्यायिक प्रक्रियाओं से बरी नरेंद्र मोदी अभी तक अपराधी हैं?

यह भारत के मानसिक बंटवारे का ब्लू प्रिंट है जिससे निकलने की अभी कोई सूरत नहीं दिखाई पड़ रही है। यह मैं इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि कल 2 दिन से टीवी पर इन मामलों की डिबेट देख रहा हूँ और यह स्पष्ट हो गया है कि मुस्लिम समुदाय का नेतृत्व और ईसाई धर्म के अग्रज पूरी तरह से भारत की सार्वभौमिकता और हिंदुओं की संवेदनाओ से कट चुके हैं।

वे आज भी इशरतजहां की लाश के साथ खड़े हैं और आज भी ‘हिन्दू आतंकवाद भगवा आतंकवाद‘ की शेख चिल्ली की कहानी पर विश्वास बनाये रखना चाहते हैं। आज न्यायालय व न्यायिक प्रक्रिया की भूलभुलैया में भले ही हमें यह लग रहा है कि कर्नल पुरोहित, साध्वी प्रज्ञा, स्वामी असीमानंद के लिए मोदी सरकार कुछ नहीं कर रही है, लेकिन यह मत भूलिए कि नरेंद्र मोदी बिना न्याय प्रक्रिया को छेड़े हुये, वह सब करेंगे, जिससे हिंदुत्व अस्मिता के प्रतीक चिह्नों को पुनर्स्थापित किया जा सके।

आज लोग विचलित हैं क्योंकि भारत के समाज का यह दुराव एक टकराव को जन्म दे चुका है। नरेंद्र मोदी की सरकार ने हिन्दुओं को इतना मानसिक रूप से मज़बूत तो कर ही दिया है कि आज हिन्दू, अपने साथ हुए इस वीभत्स षडयंत्र के लिए किसी को क्षमा करने को तैयार नहीं है। आज हमसे मत पूछिये कि क्यों हमको आप लोगों से नफरत हो गयी है, आज यह पूछना आपको है, अपने आप से पूछना है।

नरेंद्र मोदी की अदृश्य छाया में, सौहार्द्र और संभावनाओं के द्वार हिंदुओं के एक वर्ग ने जो बन्द कर दिए हैं, उसके परिणाम किस रूप में मोदी का भारत 2019 में लाएगा, यह अभी भविष्य के गर्त में है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यवहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति मेकिंग इंडिया (makingindiaonline.in) उत्तरदायी नहीं है। इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार मेकिंग इंडिया के नहीं हैं, तथा मेकिंग इंडिया उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY