क्योंकि बलिदानों की वेदी पर भी हमने लोकतंत्र बचाया है

यूँ तो भारत देश में अनेकों समस्याएं हैं, जिनके समाधान कभी मुश्किल तो कभी असंभव लगते हैं; मगर फिर भी हम इस आस में रहते हैं कि उनके समाधान निकाले जाएंगे। वे समाधान सरकारें निकालेगी। इसलिए सरकारों का होना अत्यंत आवश्यक है। और सरकारों के चुनाव के लिए चुनाव होना और उन चुनावों में मतदान करना आवश्यक है। आर्टिकल हो सकता है कि थोड़ा उबाऊ हो मगर यह ज्ञानवर्धक तो है ही, साथ ही साथ आपका मत कैसे सफ़ल हो सकता है, इसे भी बताएगा। इसलिए शांत मन से इसे पढ़ें।

कैसे होता है भारत में सरकार का चुनाव?

भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में सरकारें तय होती हैं सर्वाधिक मत प्राप्त व्यक्ति की विजय (यानी फर्स्ट पास्ट द पोस्ट) प्रणाली से।
इस प्रणाली की ख़ास बात यह है कि इसे सबसे कम पढ़े लिखे या अनपढ़ भी आसानी से समझ सकते हैं। एक संसदीय क्षेत्र में चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों में जिस प्रत्याशी को सबसे ज़्यादा मत मिलेंगे वह विजयी होगा।

ऐसे में यह समझना बेहद ज़रूरी है कि जिस क्षेत्र में मतदान हो रहे हैं, वहां मतदाता सूची के सभी मतदाता मतदान करें यह आवश्यक नहीं है। यदि सौ की सूची में से केवल 10 ने मतदान किया तो मतगणना केवल 10 लोगों की होगी, और उन 10 में से सबसे ज़्यादा मत जिस प्रत्याशी को मिलेंगे वह विजयी हो जाएगा। इस में यह भी समझना आवश्यक है कि यदि किसी बुरे प्रत्याशी को ही केवल वोट मिले व अन्य को कोई वोट नहीं मिले तो ऐसे में अन्य प्रत्याशी कितने भी अच्छे क्यों न हों, बुरा प्रत्याशी चुनाव जीत जाता है। और इसी प्रकार से यह भी संभव है कि ग़लत पार्टी की सरकार बन जाए।

ऐसे में यह आवश्यक हो जाता है कि हमें केवल अपने पसंदीदा प्रत्याशी को केवल मत ही नहीं बल्कि अधिक से अधिक मत दिलाना होता है, जिससे वह जीत सके और आगे सरकार का हिस्सा बनने के योग्य रहे।

कैसे है मतदान सबसे शक्तिशाली हथियार?

अब तक हम इस बात को समझ चुके हैं कि मतदान करके कैसे अच्छे या बुरे प्रत्याशी को चुनाव जितवाया जा सकता है। सरकार बनाने का मसला प्रधानमंत्री पर होता है। विजयी सांसद अपने पसंदीदा नेता के नाम को प्रधानमंत्री के तौर पर चुनते हैं। संसद भवन में इस प्रक्रिया में ज़्यादा असमंजस की स्थिति न हो, इसलिए प्रधानमंत्री चुनने का काम राजनीतिक दल करते हैं और उस दल के सभी विजित सांसदों को पार्टी के फ़ैसले को मानना होता है, जिससे प्रधानमंत्री तय करने की प्रक्रिया शांति से पूर्ण हो जाए।

ऐसे में हमें यह समझना होगा कि चुनाव प्रत्यक्ष रूप से तो प्रत्याशी ने लड़ा है लेकिन प्रधानमंत्री व सरकार बनाने के फैसले पार्टी लेती है; इसलिए मत देते वक़्त यह ध्यान देना बड़ा आवश्यक होता है कि जिस प्रत्याशी को हम वोट देने जा रहे हैं, क्या वह किसी पार्टी से है? यदि हाँ तो उस पार्टी की नीतियां कैसी हैं? यदि ना तो क्या वह इतना सक्षम है कि उसकी योजनाएं व नीतियां सारे देश में लागू हो सके? ऐसे में उस प्रत्याशी का अपना एजेंडा भी जानना आवश्यक है।

हम जब मत देने जाते हैं तो हम केवल प्रत्याशी या पार्टी को नहीं, हम मत देते हैं उनकी योजनाओं को, उनके विचारों को, उनकी नीतियों को और हम मुहर लगाते हैं उनके एजेंडे पर। उन्हें वोट देकर हम आने वाले समय में देश का भविष्य तय करते हैं। उस भविष्य की रचना व कल्पना विजयी पार्टी द्वारा की जाती है, व उनके काम पर मुहर हमारी लगती है। इसलिए मत देना आवश्यक है। हमारे सपनों का भारत, जिसे हम निबंध के रूप में बचपन से लिखते आये हैं, उसकी रचना हम अपने प्रत्याशियों से करा रहे हैं।

हाल ही में दो तस्वीरें प्रचलित हो रही हैं। ये दो तस्वीरें देश के दो अलग अलग हिस्सों से आयी हैं। एक छत्तीसगढ़ से है, तो दूसरी जम्मू से है। दोनों ही जगह संघ और भाजपा के कार्यकर्ताओं को आतंकियों द्वारा मौत के घाट उतार दिया गया। इसके बाद भी उनके परिवार के लोग मत देने के लिए घरों से बाहर आये। अपने एक वोट का महत्व उन परिवारजनों ने समझा। चाहे वह गौरक्षा के नाम पर हत्या कर रहे हों, चाहे ग़रीबी व मजबूरी के नाम पर या वे अलगावाद के लिए आतंक फ़ैला रहे हों, उन सभी को जवाब देने के आवश्यकता है।

ईवीएम का बटन इन सबके आतंक पर हमला है। उस बटन को दबाने की आवश्यकता है। पार्टी कोई भी हो, विकल्प कोई भी हो; मगर लोकतंत्र की व्यवस्था को बनाये और बचाये रखने के लिए हम सभी का मत देना आवश्यक है। हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि अपना मत केवल यूँही वाहवाही पाने के लिए किसी को भी नहीं देना है। सभी पहलुओं पर विचार करके हमें उसे ही मत देना चाहिए जो मज़बूत हो। अपने वोट के महत्व को समझें, प्रत्याशी, पार्टी के फ़ैसले, विचार, आचरण पर ग़ौर करें; उसके पुराने इतिहास को खंगाले और फिर फ़ैसला करें कि किसे चुनना है। ध्यान रहे आपका मत केवल आपका नहीं, सारे देश के भविष्य का फैसला करेगा।

भारत में लोकतंत्र का उत्सव चल रहा है। पाँच सालों में एक बार आने वाले आम चुनावों में दो तस्वीरें सामने आयीं। ये दो तस्वीरें इस साल की बेहद मज़बूत तस्वीरें हैं। सदा के लिए प्रेरणादायी इन तस्वीरों ने हमें बताया है कि लोकतंत्र में चुनाव क्यों आवश्यक है और उन चुनावों में विकट से विकट परिस्थिति होने के बावजूद हमारा मत देना क्यों आवश्यक है।

क्या हैं दो तस्वीरें?

भाजपा से विधायक श्री भीमा मांडवी का परिवार जिसे नक्सलियों ने मार डाला

यह तस्वीर इस आम चुनाव में पहले चरण की है। 10 अप्रैल 2019 को छत्तीसगढ़ में भाजपा से विधायक श्री भीमा मांडवी को नक्सलियों ने मार डाला। आईईडी से विस्फ़ोट कर भीमा मांडवी की गाड़ी और सुरक्षाबलों को नक्सलियों ने मार डाला। अगले ही दिन राज्य में चुनाव थे और भीमा माण्डवी की पत्नी श्रीमती ओजस्वी माण्डवी और उनके परिवार ने वोट डाला। दुःख की इस घड़ी में वे चाहते तो घर भी रुक सकते थे, शोक में डूबे रह सकते थे, मगर भारत के उज्ज्वल भविष्य के लिए उन्होंने वोट डालना उचित समझा, और परिवार के साथ वोट डालकर आयीं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जम्मू प्रान्त के सह प्रान्त सेवा प्रमुख श्री चंद्रकांत शर्मा की आतंकवादियों ने 9 अप्रैल को गोली मारकर हत्या कर दी।

यह तस्वीर जम्मू की है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जम्मू प्रान्त के सह प्रान्त सेवा प्रमुख श्री चंद्रकांत शर्मा की आतंकवादियों ने 9 अप्रैल को गोली मारकर हत्या कर दी। चंद्रकांत जी के परिवार ने भी इस आम चुनाव के दूसरे चरण में जम्मू में अपना वोट डाला। वे चाहते तो राज्य से अपनी नाराज़गी ज़ाहिर कर सकते थे, मगर उन्होंने भी मत देकर चंद्रकांत जी के विचारों को आगे रखना उचित समझा।

भीमा माण्डवी और चंद्रकांत जी के परिवारों का यह कार्य प्रशंसनीय और प्रेरणादायी है। वे लोग जो वामपंथी आतंक, अलगाववादी आतंक के ख़िलाफ़ लड़ रहे हैं उन्हें इन तस्वीरों से बड़ी हिम्मत मिलेगी। अपने मत का प्रयोग करके उन्होंने न सिर्फ एक मिसाल खड़ी की है, बल्कि लोकतंत्र को एक संदेश दिया है कि लोकतंत्र में आतंकवादियों को मिटाने की राह में अगर मौत भी आएगी, तो भी पीछे नहीं हटेंगे।

बुद्धिजीवी चाहें तो अपने विषयों पर ही चर्चा करते रहेंगे लेकिन ऐसे में हमें इस जश्न को मनाना ही चाहिए। बलिदानों के बाद भी हमारे देश के परिवार अपना मत देने को ही सर्वोपरि समझते हैं और जिस लोकतंत्र में मतदान को जनता सर्वोपरि समझने लगे, समझिए कि हमने सफल लोकतंत्र के निर्माण के लिए एक बहुत आवश्यक आदत अपने स्वभाव में डाल ली। इसलिए मतदान के महत्व को कभी भूलिए मत। मतदान करना यदि रुक गया तो लोकतंत्र का आधार ढह जाएगा। आने वाले समय में हम यह गर्व कर सकें कि बलिदानों की वेदी पर भी हमने लोकतंत्र बचाया है, इसलिए मतदान अवश्य करें।

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