जनसंघ/ भाजपा 55 साल विपक्ष में रही, पर कभी नहीं दिया आतंक का साथ

कांग्रेस के नेताओं की दुर्दशा देख कर आजकल बहुत मजा आ रहा है।

मुस्लिम वोट के लिए मुसलमानों के पीछे ऐसे पड़े हैं जैसे कोई गधे को बाप बना लेता है।

कुछ कांग्रेसी नेताओं की हालत पर बात करते हैं –

शकील अहमद – नरेंद्र मोदी, भाजपा और संघ को जी भर के गाली देते थे मगर फिर भी कांग्रेस ने टिकट नहीं दिया और अब निर्दलीय खड़ा होना पड़ा।

दिग्विजय सिंह – इनके खिलाफ साध्वी प्रज्ञा को खड़ा होने से रोकने के लिए ‘जीजा जी के जीजा जी’ तहसीन पूनावाला ने चुनाव आयोग में अर्जी दे कर उन्हें चुनाव से बाहर रखने के लिए कहा है क्यूंकि उन पर आतंकी हमला करने का आरोप है (जो अभी साबित नहीं हुआ)।

फिर तो भाई राहुल गाँधी तो वैश्विक आतंकी मसूद अज़हर को आदर दे कर बात करते हैं और कई मुकदमों में ज़मानत पर बाहर हैं, वो कैसे चुनाव लड़ सकते हैं?

शत्रुघ्न सिन्हा – 5 साल भाजपा का सांसद रह कर संसद में एक भी सवाल ना पूछ कर अब गए कांग्रेस में और बीवी को भेज दिया सपा में… ये जानते हुए कि आज़म खान क्या बक रहा है महिलाओ के लिए! अब लखनऊ में वोट मांग रहे हैं कांग्रेस के खिलाफ!

याद है, कभी शत्रुघ्न ने कहा था तेजस्वी यादव बिहार का भविष्य है… तो खुद कांग्रेस में, बीवी सपा में और बेटी को भेज दें लालू की राजद में… बहुत से काम सध जाएंगे!

प्रियंका चतुर्वेदी – ये मैडम तो तबियत से चिंचियाती थीं मोदी जी के खिलाफ और हर मुमकिन अपशब्द बोल देती थीं, लेकिन आज पता चला कि कांग्रेस में तो गुंडों की चलती है…

लगता है मामला केवल मथुरा का नहीं है… कुछ गंभीर मसला है जो पहले टिकट नहीं मिला और अब खुलेआम इज़्ज़त ख़राब की गई है।

ज्योतिरादित्य ही हैं इन्हें बेइज़्ज़त कराने के ज़िम्मेदार क्यूंकि उन्हीं ने बेअदबी करने वालों का बचाव किया है।

हिन्दुओं को जम कर बेइज़्ज़त करने वाले कांग्रेसी नेता ज़बरदस्ती हिन्दू बनने का नाटक कर रहे हैं और मंदिर मंदिर भटक रहे हैं।

अब भला सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी जैसों को मंदिर में पूजा करने का क्या मतलब है? बेटी प्रियंका भी मंदिरों की शरण में है और दामाद जी कन्याभोज करा रहे थे रामनवमी के दिन!

एक भी कांग्रेसी कुम्भ स्नान के लिए नहीं गया तो फिर मंदिरों से क्या मतलब?

बस मुसलमानों को ही कांग्रेस का माई-बाप बनाया हुआ है जो सिद्धू जैसे गला फाड़ फाड़ कर कह रहे हैं – मोदी को ख़त्म करने में हमारी मदद करो।

सबसे बड़ी दुर्गति तो राहुल गाँधी की हो रही है जिनकी हैसियत आज इतनी भी नहीं रही कि कांग्रेस को 272 सीटों पर खड़ा कर सकें।

अमेठी से भागना पड़ा और वायनाड का पता नहीं क्या होगा! विपक्ष की किसी पार्टी के किसी नेता ने उन्हें महा-गटर-बंधन का नेता मानने के लिए हाँ नहीं कहा…

काल का पहिया ऐसे घूमता है… कभी जनसंघ सरकार बनाने लायक सीट लड़ने में सक्षम नहीं होती थी, ऐन वही हालत आज कांग्रेस की हो गई है… और अब दुबारा विपक्षी दल का दर्ज़ा मिले या ना मिले, उन्हें खुद मालूम नहीं।

जनसंघ/ भाजपा कुल मिला कर 55 साल विपक्ष में रही लेकिन कभी आतंक का साथ नहीं दिया मगर कांग्रेस विपक्ष में बैठ पिछले 5 साल में ही आतंकवादियों और देशद्रोहियों के साथ खड़ी हो गई!

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