आइये जानें धिम्मी हिन्दू को वैदिक हिन्दू बनाने का शर्तिया तरीका

उस दिन से हिन्दू 24 कैरेट वाला खरा वैदिक हिन्दू बन जाएगा जिस दिन से वह बाइबिल, क़ुरआन और कम्युनिस्ट मैनिफेस्टो के ‘जेनेटिक’ रिश्ते को समझ जाएगा और यह भी जान जाएगा कि पिछले 2000 सालों में इस सेमेटिक विचार-वंश के तीन परिवारों ने लगभग 70 करोड़ लोगों की हत्या कैसे और क्यों की।

इसका पहला चरण है हर हिन्दू घर में उपरोक्त तीनों किताबों का सामूहिक पठन-पाठन और फिर रामायण-महाभारत-मनुस्मृति से इनकी तुलना।

दूसरा चरण है किसी भी स्तर की कोई भी धर्मशास्त्रीय शिक्षा की डिग्री बिना उपरोक्त 6 पुस्तकों के तुलनात्मक अध्यन की पढाई और परीक्षा के न पूरी हों।

तीसरा चरण है जिसे उपरोक्त डिग्री न हो उसे किसी भी मंदिर का पुजारी नियुक्त न किया जाए। जो पहले से ही पुजारी हैं, उन्हें एक साल के अंदर उपरोक्त तुलनात्मक कोर्स को पूरा करने को कहा जाए।

चौथा चरण है कुंभ मेलों या ऐसे समागमों में उपरोक्त विषय पर खुलकर चर्चा हो।

पाँचवा चरण है सभी प्रसिद्ध बाबाओं -संतों से उपरोक्त विषय पर सार्वजनिक सवाल पूछे जाएँ और जो इन सवालों से बचते हों उनका बहिष्कार किया जाए।

छठा चरण है घर-परिवार-गाँव-मुहल्लों के पढ़े-लिखे लोगों के सामने उपरोक्त किताबों और उनपर चलनेवालों के सम्बन्ध में आसपास के हालिया अनुभवों के मद्देनज़र सवाल रखें जाएँ। जो जवाब न दे या ऐसे सवाल-जवाब में रूचि न ले, उसे बुद्धिविलासी, बुद्धिविरोधी, हतबुद्धि, बुद्धिवंचित, मंदबुद्धि, बुद्धू, बुद्धिपिशाच आदि विशेषणों से विभूषित किया जाए।

इसके ठीक विपरीत जो लोग उपरोक्त सवालों से न सिर्फ टकराते हों बल्कि नए सिरे से देसी (मौलिक) सवाल भी पूछते हों उन्हें शीर्षस्थ बुद्धियोद्धा या बुद्धिवीरांगना सम्मान से विभूषित किया जाए।

सातवाँ चरण है किसी भी कंपनी या संगठन का मालिक अपने कर्मचारियों की भर्ती में उपरोक्त सम्मानों से विभूषित लोगों को तदनुसार इंसेंटिव (बुद्धियोद्धा, बुद्धिविरांगना) और डिसइंसेंटिव (बुद्धिविलासी, बुद्धिविरोधी, बुद्धिपिशाच) दे। यह ध्यान रहे कि यह सारा कुछ बिना किसी सरकारी सहायता या हस्तक्षेप के हो। सरकारी नज़र पड़ी नहीं कि खेल चौपट हुआ।

आठवाँ चरण है चुनाव में खड़े उम्मीदवारों को उनको मिले उपरोक्त सम्मानों के आधार पर चंदा और वोट देना। जिसे उम्मीदवार को कभी कोई सम्मान न मिला हो, उसकी परीक्षा पूरे मोहल्ले के लोग चुनाव से कम-से-कम एक हफ़्ते पूर्व किसी छुट्टी के दिन लें। फिर उसे मिले सम्मान को सोशल मीडिया मंचों पर शेयर कर दिया जाए।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यवहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति मेकिंग इंडिया (makingindiaonline.in) उत्तरदायी नहीं है। इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार मेकिंग इंडिया के नहीं हैं, तथा मेकिंग इंडिया उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

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