सिलेक्टिव क्यों हैं, लुटियंस गिरोह के सारे नियम, तर्क, आदर्श, उपदेश

ऐसा क्यों है कि कोई भी घटिया बयान अगर कंगना राणावत, स्मृति ईरानी या जयाप्रदा जैसी भाजपा-समर्थक महिलाओं के बारे में दिया गया हो, तो लुटियंस गिरोह के सारे मीडियाकर्मी (मैं उन्हें पत्रकार नहीं मानता), महिलावादी, और निष्पक्षता के स्वघोषित ठेकेदार उसका मौन समर्थन करते हैं?

क्या कंगना या स्मृति ईरानी या जयाप्रदा महिलाएं नहीं हैं? या उनके साथ भेदभाव और अपमान करना इसलिए जायज़ है क्योंकि वो मोदी या भाजपा का समर्थन करती हैं?

लुटियंस गिरोह के कितने चैनलों ने आज स्क्रीन काली की? कितनों ने अखिलेश यादव से यह सवाल पूछा कि आज़म खान जैसे लोग उनकी पार्टी में क्यों हैं?

ट्विटर पर कोई भी अनजान, गुमनाम व्यक्ति लुटियंस गिरोह की किसी महिला मीडियाकर्मी के खिलाफ एक शब्द भी लिख दे, तो ये लोग उसे भाजपा का एजेंट बताकर मोदी से इस्तीफा मांगने लगते हैं।

भारत के किसी कोने में किसी छोटे-से गांव का कोई भाजपा कार्यकर्ता अगर गलती से भी कुछ बोल दे, तो उसका ज़िम्मेदार नरेन्द्र मोदी को ठहराया जाता है।

फिर सपा के सिरमौर आज़म खान के मामले में वही नियम मुलायम या अखिलेश पर क्यों नहीं लागू होता? उनसे सवाल क्यों नहीं पूछे जाते? उनसे जवाब क्यों नहीं मांगे जाते?

लुटियंस गिरोह के सारे नियम, सारे तर्क, सारे आदर्श, सारे उपदेश सिलेक्टिव क्यों हैं? गिरोह का अपना स्वार्थ और अपनी दुकानें हैं, इसलिए वे सिर्फ अपने फायदे-नुकसान की चिंता करते हैं, लेकिन जो लोग इन बातों को सोचे-समझे बिना भेड़-बकरियों की तरह उनकी हां में हां मिलाते रहते हैं, सोचना उन्हें चाहिए कि वे क्या गलती कर रहे हैं।

मेरी नाराज़गी इस बात से नहीं है कि मोदी-समर्थक या भाजपा-समर्थक महिलाओं के बारे में अशोभनीय और घटिया टिप्पणियां की जाती हैं, बल्कि मेरी नाराज़गी इस बात से है कि महिलाओं के बारे में अशोभनीय और घटिया टिप्पणियां की जाती हैं और उन्हें स्वीकार्य माना जाता है। उससे भी ज्यादा नाराज़गी इस बात से है कि समाज का एक बड़ा वर्ग ऐसे मामलों में सही और गलत का भेद कर पाने का विवेक खो चुका है।

किसी की भी आलोचना, निंदा, उपहास, विरोध उसके धर्म, जाति, लिंग, या शैक्षणिक या आर्थिक स्थिति के कारण नहीं होना चाहिए। विरोध उनकी बातों, विचारों और कामों का होना चाहिए। लेकिन लुटियंस गिरोह का आचरण ऐसे मामलों में हमेशा आपत्तिजनक और गलत रहता है।

मैं हमेशा बताता हूँ कि कुछ सालों पहले तक मुझे राजनीति और इससे जुड़े किसी मुद्दे से कोई मतलब नहीं रहता था। मैं पुस्तकों, फ़िल्मों, संगीत और मनोरंजन के अलावा कुछ नहीं सोचता था लेकिन लुटियंस गिरोह के ऐसे दोगलेपन के कारण ही राजनीति और उससे जुड़े विषयों पर मेरा ध्यान गया और मैंने इस पर लिखना-बोलना शुरू किया।

मैं इनके ऐसे दोहरे मापदण्ड बहुत सालों से देख रहा हूँ और जब तक ये स्थिति नहीं बदलेगी, मैं ऐसे विषयों पर लिखता रहूँगा।

सिर्फ महिला होने के कारण किसी भी महिला का अपमान नहीं किया जाना चाहिए और उसका समर्थन तो बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। लुटियंस गिरोह के जो लोग ऐसे मामलों में चुप बैठे हैं, वे सब वास्तव में ऐसे बयानों का मौन समर्थन कर रहे हैं।

वैसे मुझे इसमें कोई अचरज भी नहीं हो रहा है। जो लोग तरुण तेजपाल जैसों की हरकतों के समर्थन में तर्क दे सकते हैं, वे आज़म खान जैसे लोगों के बयानों का मौन समर्थन करें, तो यह स्वाभाविक ही है।

लेकिन महत्वपूर्ण ये है कि आप वैसी गलती न करें।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यवहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति मेकिंग इंडिया (makingindiaonline.in) उत्तरदायी नहीं है। इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार मेकिंग इंडिया के नहीं हैं, तथा मेकिंग इंडिया उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY