माफियागिरी पर ताला लगाने व मज़दूरों-कामगारों की खुशहाली के लिए भी मोदी ज़रूरी

कोयला यानी काला हीरा… आपके जीवन में इसका क्या उपयोग या महत्व है… सोचिए, आपको इसका कोई उपयोग शायद न लगे… फिर भी ये हीरा है… क्योंकि ये सबकी ज़िंदगी में घुसा हुआ है।

कोयले से ही बिजली है, सड़क है, सीमेंट है, स्टील है… कोयले से ही नेप्था है, बेंज़ीन है, फिनॉल (फार्मा में बड़ा उपयोग) है… अमोनिया है, नाइट्रिक एसिड है, खाद भी है… टूथपेस्ट में है, स्किन क्रीम में है, आपके water purifier में है…

कोयला एक, इस्तेमाल अनगिनत… अपने कोयला छुआ नहीं होगा लेकिन कोयला आपके जीवन को प्रतिदिन छू के जाता है… जो न जानते हुए भी ज़िंदगी को हर रोज़ छू के जाता हो उसका अनमोल होना स्वाभाविक है।

इस काले कोयले के पीछे छिपा है बहुत बड़ा सच… आपने सुना होगा काँग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार का कोयला घोटाला।

इसका आसान सा तरीका है… भारत सरकार कोयले की खदानों का ऑक्शन करती है… एक बड़ी पूँजी लगा के उसका कोयला निकालना होता है जिसको तमाम जगह सप्लाई किया जाता है।

कोयला घोटाला क्यों और कैसे किया गया… इसकी बात आज क्यों ज़रूरी है, आसान भाषा में जानते हैं…

सरकार कोयला खदान से कोयला निकालने का ठेका देती है जिसकी बोली लगती है, जिसकी बोली सबसे ज़्यादा उसका ठेका… मान लीजिए 10 बोली लगाने वाले हैं और सब अपने ही हैं। क्षमता के अनुसार किसी को 1, किसी को 2 खदान (coal block) मिल जाता है।

अब अगर खदान की बोली लगी है 1000 करोड़ तो असल में वो 2000 करोड़ का है, बचे 1000 करोड़ में से 500 सरकार के नेताओं को, बाकी बचे ट्रेड यूनियन के नेताओं, माओवादियों को मिलता है।

चूँकि ट्रेड यूनियन या माओवादी पार्टी नहीं है तो ये कोयला चोरी कराया जाता है, तस्करी कराया जाता है और इससे वो कमाते हैं… अवैध खुदाई से, ट्रैन से लूट के, ढुलाई कम लेकिन कागज़ पर ज़्यादा…

अनेक तरीके हैं जिनमें चोरी होती है… इस चोरी में खदान का ठेका पाने वाले से लेकर, ट्रेड यूनियन, माओवादी, सरकारी बाबू, चोर मज़दूर आदि सब हिस्सेदार होते हैं।

चोरी करने को लोग लगाए जाते हैं और बौद्धिक आतंकी इन चोरों को नाम देते हैं मज़दूर का… असली मज़दूर रोटी को तरसता है, चोर मज़दूर शराब और शबाब से खेलता है।

एक बार में 10 लोगों के 10 या उससे ज़्यादा के ग्रुप में काम करते हैं… कभी छापे आदि के समय सब अलग भागते हैं वही 10-15 के ग्रुप में, जिससे 2-4 सुरक्षाकर्मी पकड़ने की हिम्मत नहीं जुटाते क्योंकि ये ग्रुप मार भी सकता है पकड़े जाने की स्थिति में…

लेकिन ठहरिए… ये हाल 2016 के पहले का था… ये डॉ मनमोहन सिंह के सफ़ेद कपड़ों का काला सच था…

2016 में शुरू हुए मोदी सरकार के ई ऑक्शन ने इस मिलीभगत वाली नीलामी को ख़त्म करके माफियागिरी पर चोट की… जो coal block चन्द हज़ार करोड़ में बिकते थे उनके लाखों करोड़ मिलने लगे।

इससे कोयला माफिया, कोयला चोरों और माओवादी तस्करों को गहरी चोट लगी… ऊपर से नोटबंदी ने माओवादियों, ट्रेड यूनियन और काला बाज़ारियों के नोट को कूड़े में बदल दिया… फिर उसके बाद GST ने कोयले की काला बाज़ारी पर बहुत जबरदस्त रोक लगाई… एक बड़ा, लाखों करोड़ के घपले का खेल देखते देखते कुछ माह में ध्वस्त हो गया।

पश्चिम बंगाल का आसनसोल एक बड़ा कोयला खदान का ब्लॉक है… यहाँ TMC (तृणमूल काँग्रेस) और कम्युनिस्टों का कोयला चोरी को लेकर अक्सर खूनी झगड़ा होता रहा है… ऊपर लिखे ट्रेड यूनियन और माओवादी तस्कर, कोयला चोर इनको ही पढ़िए…

आसनसोल से भाजपा के प्रत्याशी हैं बाबुल सुप्रियो… TMC उम्मीदवार हैं मुनमुन सेन… अपनी दोनों सुंदर बच्चियों के साथ घूम घूम के ये प्रचार कर रही हैं कि बाबुल हराओ – मोदी हटाओ…

अपनी सभाओं में ये गारंटी दे रही हैं कि मोदी को हटाने के बाद फिर से कोयला का माफियाराज शुरू करा देंगी… फिर से कोयला चोरी और तस्करी शुरू होगी…

कोयला चोरों को मज़दूर बोलकर पत्रकारों को उनकी दयनीय स्थिति दिखा रही हैं… दलाल पत्रकार मुनमुन सेन के फेंके टुकड़े पर धड़ल्ले से दलाली को बखूबी अंजाम दे रहे हैं…

आए दिन TMC और CPI के बीच होने वाले खूनी खेल से त्रस्त आसनसोल की जनता… कोयले की खदान में काम करने वाले असली मज़दूर सब समझ रहे हैं…

असली मज़दूरों का पेट भरना, पढ़ाई और इलाज सम्भव हुआ है ठीक से कोयला ब्लॉक की खुदाई के कारण… माफियागिरी से निजात और मज़दूरी सीधे बैंक में ट्रान्सफर होने के कारण अधिक पैसा भी मिल रहा है… असल मज़दूर खुश है, चोर नाराज़ हैं…

2016 के पहले की आसनसोल के कोयला माफिया की कहानी के आगे Gangs of Wasseypur की कहानी बच्चों की कहानी है… कोई ऐसा दिन गया नहीं जब कोई मारा नहीं गया आसनसोल में… 2016 से आसनसोल में बहुत शांति है कोयला का माफिया वॉर बंद होने से… जनता इस शांति को जाने नहीं देगी… बाबुल सुप्रियो की लाखों मतों से जीत तय है…

इस शान्ति, मज़दूरों/ कामगारों की खुशहाली तथा माफियागिरी पर ताला लगाने के लिए भी मोदी ज़रूरी है…

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यवहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति मेकिंग इंडिया (makingindiaonline.in) उत्तरदायी नहीं है। इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार मेकिंग इंडिया के नहीं हैं, तथा मेकिंग इंडिया उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

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