मोदी को रूस का सर्वोच्च सम्मान, एशिया में नए समीकरणों के उदय होने का संकेत

भारत के लोकसभा चुनाव के बीच, यूएई के बाद, रूस ने भी भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रूस का सर्वोच्च सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू’ देने की घोषणा की है।

रूस द्वारा ठीक चुनाव के बीच मोदी को सम्मान देना कई संकेत देता है।

पहला यह कि रूस और उसकी गुप्तचर संस्था यह मान चुके हैं कि भारत के 2019 चुनाव में नरेंद्र मोदी और भी शक्तिशाली हो कर वापसी कर रहे है।

इसलिए 2019 के चुनाव के बाद, बदली हुई परिस्थितियों और नित बनते वैश्विक समीकरणों के बीच रूस को मोदी के भारत के साथ संबंधों को और प्रगाढ़ करने है।

पुतिन के रूस को, एशिया में पैर फैलाते महत्वाकांक्षी चीन की धार को कुंद व अफगानिस्तान से जल्दी निकलने की फिराक में तालिबान/ पाकिस्तान से समझौता करने के दबाव में अमेरिका द्वारा, दक्षिण एशिया में होने वाले असंतुलन को संतुलित करने के लिए मोदी के भारत की आवश्यकता होगी।

दूसरा, यह सम्मान पुतिन की तरफ से सोनिया गांधी को संदेश है कि रूस ने भविष्य को चुन लिया है और वह अब उनका भूतपूर्व नियोजक है।

इसी के साथ, पुतिन ने मोदी जी को अपनी स्लेट साफ करके दिखा दी है कि रूस, भारतीय चुनाव में किसी भी तरह की दखलंदाजी नही कर रहा है।

साथ मे यह भी स्पष्ट कर दिया है कि रूस, गांधी परिवार व कांग्रेस की भारत में सत्ता पर पुनः वापसी का, चीन की तरह, प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से न समर्थन कर रहा है और न सहायता कर रहा है।

वैश्वीकरण के वातावरण में जहां प्रत्येक राष्ट्र अपने हित के अनुसार मित्र, सहयोगी व शत्रु बदलता रहता है वहां उसकी कूटनीति में, दिए गए वक्तव्य व संकेत की टाइमिंग बहुत महत्वपूर्ण होती है।

रूस ने मोदी जी को सम्मानित कर जो भारत का सम्मान, चुनाव के परिणामों के आने से पहले किया है वो एशिया में नए समीकरणों के उदय होने का संकेत दे रहा है।

रूस की इस कूटनीतिक पहल से सिर्फ चीन, पाकिस्तान और अमेरिका ही अचंभित नहीं होंगे बल्कि भारत में सोनिया गांधी परिवार व रूस पोषित राजनीतिज्ञों व वामपंथियों के लिए भी यह वज्रपात से कम नहीं है।

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