माँ की रसोई से : पानी वाला कच्ची कैरी-गरमेल का पौष्टिक अचार

यह गरमेल है, माँ मेरी आम के पानी के अचार में यह जड़ें डालती थी, इसका स्वाद ज़ुबान से आज तक नहीं गया है, गुण तो यकीनन हैं ही.
मुझे इस साल पानी वाला आम का अचार बनाना है क्योंकि इन दिनों चल रही तेज़ हवा के कारण आँगन में लगे आम के पेड़ से कच्ची केरियाँ किलो भाव से आँगन में गिर रही हैं.
अमेज़न इसे Burdock Root के नाम से 1500 रुपये किलो बेच रहा है.

कुछ लोग इसे गोखरू कह रहे हैं, कुछ लोग क्रकच ताल, अब स्थानीय नाम जो भी हो इसे पानी वाले आम के अचार में डाला जाता है. ये जड़ें स्वाद और पोषण दोनों के लिए जानी जाती है क्योंकि कई लोग इसकी चाय भी बनाकर पीते हैं.

तो आइये पहले बनाते हैं पानी वाला आम गरमेल का अचार सबसे पहले एकदम कच्ची कैरियां धोकर सुखा लीजिये. अब एक कांच की सूखी बरणी में सबसे नीचे एक बड़ा चम्मच अरंडी का तेल डालिए. अब उसके ऊपर कैरी की एक पर्त जमा दीजिये और उसके ऊपर खड़े नमक को थोड़ा सा कूटकर एक पर्त नमक की बनाकार उस पर थोड़ी सी हल्दी छिड़क दें.

इस पर फिर एक चम्मच अरंडी का तेल कैरी और नमक हल्दी की पर्त बना दीजिये. ऐसे ही कांच की बरणी को एक चौथाई भर दीजिये फिर अच्छे से कसकर बंद कर एक कपड़ा कसकर ढक्कन पर लपेट कर इसे घर के ऐसे कोने में रख दीजिये जहाँ धूप न पड़ती हो.

ध्यान रहे यह अचार छाया में बनता है.
अब हर तीन चार दिन में बरणी उठाकर खोले बिना हिलाते रहिये.

जब नमक पानी छोड़ दे तब इसका ढक्कन खोलकर इसमें गरमेल धोकर डाल दीजिये.

अब इसे फिर एयर टाइट बंद कर दीजिये.

महीने भर के अन्दर कैरियां श्रिंक होने लगती है और पूरी तरह नमक के पानी में डूबी रहती हैं.

लीजिये आपका अचार तैयार है. अब आप इसे साल दो साल तक खा सकते हैं.

आप यदि घर में नहीं बना सकते तो यह अचार अमेज़न पर उपलब्ध है वह भी दक्षिण भारत में बना हुआ, लेकिन इसमें शायद आपको गरमेल के स्थान पर अन्य जड़ी बूटियाँ मिले.

कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें

किसी भी तरह का अचार बनाने से पहले गाय के कंडे को जलाकर उस पर थोड़ी सी हिंग डालकर उसका धुंआ बरणी में कर दें.
अचार की बरणी में झूठे हाथ न लगे, माहवारी के समय इसे न छुएँ.
और एक विशेष बात यदि आप किसी भी अचार के पास महीने में एक बार गाय के कंडे का धुंआ करते रहेंगे, तो वह सालों साल ख़राब नहीं होगा. और अधिक पौष्टिक होता जाएगा.

बाकी कुछ विशेष बातें जो मैं हमेशा याद दिलाती हूँ

मिट्टी की कड़ाही में सब्ज़ी बना रहे हैं तो दो दिन में एक बार उसमें चावल अवश्य उबाल लें ताकि मिट्टी का सोखा हुआ तेल निकल जाए, वरना वह ज़हर होने लगता है.

मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाने और खाने से सिर्फ एक महीने में आपकी डायबिटीज की समस्या समाप्त हो जाएगी. मिट्टी में इतने पोषक तत्व होते हैं.

पीतल के बर्तनों में बिना कलई के पानी भरा जा सकता है, परन्तु खाना बनाने के लिए पीतल के बर्तनों में कलई होना आवश्यक है.

पीतल के बर्तनों में खाना लम्बे समय के लिए मत छोड़िये, और खट्टी चीज़ें पीतल में न बनाएं.

कलई में बंग भस्म होती है जो कई रोगों से स्वाभाविक रूप से दूर रखती है.

लोहे की कड़ाही में जंग लगी है तो पहले उसे साफ कर लें. हरी भाजियां लोहे के बर्तन में ही बनाएं.

पानी को शुद्ध करने के लिए उसमें सहजन की फली का तीन इंच का टुकड़ा कुचलकर डाल दें. आपके फ़िल्टर और RO के पानी से कई गुना अधिक शुद्ध करता है, और पानी के मिनरल्स भी नष्ट नहीं होते जो इलेक्ट्रिक फ़िल्टर और RO के पानी से नष्ट हो जाते हैं.

कैल्शियम की कमी है तो दाल सब्ज़ी में चूने का पानी डालिए, आपको अलग से कैल्शियम की गोलियां नहीं लेना पड़ेगी.

चूने का पानी बनाने की विधि आप इस वीडियो में देख सकते हैं

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