मोदी/ भाजपा का आसानी से चुनाव जीतना, समर्थकों का भ्रम

आज मैं नोबेल प्राइज़ विजेता और अपने फेवरिट अर्थशास्त्री डानिएल कानमान (Daniel Kahneman) की तरफ पुनः लौटना चाहता हूँ। क्या करें, प्रोफेसर कानमान ने मेरे मन पर अमिट छाप छोड़ी है।

प्रोफेसर कानमान ने अपनी रिसर्च में पाया कि हम लोग एक-तरफा तरीके से साक्ष्यों या आंकड़ो की व्याख्या अपनी मान्यताओं, विश्वास या सिद्धांतों की पुष्टि के लिए करते हैं, भले ही साक्ष्य किसी और तरफ इशारा कर रहे हों।

इसे प्रोफेसर कानमान पुष्टीकरण पूर्वाग्रह या confirmation bias कहते हैं, जिसके अनुसार हम अपने पूर्वाग्रहों की पुष्टि करने का प्रयास करते हैं।

उदाहरण के लिए, कुछ लोग यह मानते हैं कि 9/11 आतंकी हमलों को अमरीकियों ने ही करवाया था।

या फिर, यद्यपि ‘मोहम्मद की सेना’ ने पुलवामा आतंकी हमला करवाने का दावा किया, उसके बावजूद शांतिप्रिय लोग, आपिये और काँग्रेसी यह कहते फिर रहे हैं कि भाजपा ने चुनाव जीतने के लिए यह हमला करवाया। क्योकि उनकी मान्यता, विश्वास और सिद्धांत यही है कि सनातन धर्म के लोग ही आतंकवादी हैं।

यह पुष्टीकरण पूर्वाग्रह का उत्तम उदाहरण है।

लेकिन यह प्रवृत्ति माध्यम वर्ग में भी पायी जाती है।

अब देखिये, फेसबुक में मैं लगभग 9000 मित्रों से जुड़ा हूँ। एकाध को छोड़कर, सब के सब प्रधानमंत्री मोदी का समर्थन करते हैं। कई लोग 11 अप्रैल को वोट डालने भी गए और लिखा भी कि उन्होंने कमल का बटन दबाया।

लेकिन यह भी सत्य है कि बहुत बड़ी तादाद किसी अन्य दल का समर्थन करती है। यह मत भूलिए कि वर्ष 2014 के चुनावों में भाजपा को पूरे भारत में केवल 31 प्रतिशत और NDA को लगभग 39 प्रतिशत वोट मिले थे।

हालाँकि जिन राज्यों में भाजपा के विरूद्ध एक प्रमुख प्रतिद्वंदी था – जैसे कि मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, गुजरात, छत्तीसगढ़, हिमाचल इत्यादि – वहां भाजपा को 50 प्रतिशत से अधिक वोट मिले थे।

लेकिन अन्य पार्टियों के समर्थक हमारी मित्र सूची से नदारद हैं। हमारे मोहल्ले में भी अधिकतर मध्यम वर्ग के लोग रहते हैं, जो प्रधानमंत्री मोदी का सपोर्ट करते हैं। हमारे ऑफिस में, बिज़नेस में, गांव में भी हम भाजपा समर्थकों के साथ उठते-बैठते हैं।

अतः हमें लगता है कि अधिकतर लोग भाजपा को समर्थन करते हैं।

लेकिन यह सत्य नहीं है।

हम लोग भी पुष्टीकरण पूर्वाग्रह से ग्रस्त हैं। नहीं तो भारी संख्या में मोदी समर्थक 11 अप्रैल को वोट डालने निकलते।

अगर हमें लगता है कि इस बार भी पिछले चुनाव के प्रतिशत अनुसार ही मतदान हुआ है – और चुनाव आयोग ने यही कहा भी है – और इसलिए प्रधानमंत्री मोदी चुनाव आसानी से जीत जाएंगे, तो हो सकता है हम भ्रम की स्थिति में हों। क्योकि इस बार विपक्ष भी सतर्क है, कुछ जगह गठबंधन, तो कुछ जगह टैक्टिकल तरीके से कैंडिडेट खड़ा करके भाजपा के समर्थकों को गुमराह कर रहा है।

अतः यह आवश्यक है कि हम लोग इस बार पिछले चुनावों की तुलना में कही अधिक संख्या में वोट करें।

मैं स्वयं अमेरिका से मतदान करने आ रहा हूँ।

नहीं तो हो सकता है कि हमारे पुष्टीकरण पूर्वाग्रह के कारण हमें 23 मई को निराशा का सामना करना पड़े।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यवहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति मेकिंग इंडिया (makingindiaonline.in) उत्तरदायी नहीं है। इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार मेकिंग इंडिया के नहीं हैं, तथा मेकिंग इंडिया उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

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