होता भीम तो भागता मीम

इस लेख के अंत में प्रदर्शित वीडियो में डॉ आंबेडकर के विचारों का सीधा उनके ग्रन्थों से अभिवाचन किया गया है।

उनका अधिकतर साहित्य इंग्लिश में है और जहां भी उनके अनुयायी अपने सम्मेलन करते हैं, बाबासाहेब के लिखी हुई पुस्तकें भी रखी जाती हैं। मूल इंग्लिश कम ही दिखती हैं, स्थानीय भाषा में अनुवाद ही सर्वाधिक दिखते हैं।

लेकिन अक्सर वहाँ बाबासाहेब की लिखी Thoughts On Pakistan नहीं दिखती। उसका हिन्दी अनुवाद उनके भाषण तथा लेखों के 15वें खण्ड (डॉ आंबेडकर प्रतिष्ठान द्वारा हिन्दी अनुवाद) में है लेकिन स्टाल पर जो हमारे दलित बंधु होते हैं उनको इस बात का ज्ञान नहीं होता।

कुल मिलाकर बात इतनी ही है कि बाबासाहेब के मज़हब और उसके अनुयायी विषयक विचारों का परिशीलन करें तो साफ समझ आता है कि वे होते तो मीम से कभी भी हाथ न मिलाते और न मिलाने देते।

आज बाबासाहेब के नाम का झण्डा उठाने वाले बिरियानी के मोह में स्टाल पर ये किताबें नहीं रखते। वैसे तो कहने को उनका पोता ही मीम के सामने लहालोट है, लेकिन कुलदूषण पैदा होने से कौन रोक सकता है? वैसे भी, पोता महाशय दो वर्ष के थे जब बाबासाहेब नहीं रहे, अत: इनके पास केवल दादाजी का ब्रांड नेम रह गया, क्वालिटी जो है सो दुनिया देख ही रही है।

मज़हब और मज़हबियों को लेकर बाबासाहेब के विचारों की स्पष्टता आज भारतीयों में विरले ही दिखती है। और जहां तक मेरा आंकलन है, हमारी लड़ाई बकासुर से है जिसपर पहले भी लिख चुका हूँ। और बकासुर से जीतने के लिए… समझ गए ही होंगे।

डॉ आंबेडकर को लेकर हमारे बीच कई पूर्वाग्रह हैं। कुछ ज्ञानियों के हैं जो पूर्णतया निराधार भी नहीं हैं। लेकिन कभी सिंहावलोकन करें, या बेहतर होगा कि विहंगवालोकन करें।

इस वाक्य पर गंभीरता से विचार करें, पूरी ज़िम्मेदारी से लिख रहा हूँ –

आज डॉ आंबेडकर नफरत के केन्द्रबिन्दु बनाए गए हैं Dr Ambedkar has been made a focus of hate – और इसके लिए अधिकतर कारण आप को उस समय के मिलेंगे जब वे नहीं रहे। उनके मृत्यु के बाद ये सभी वाद के मुद्दे उपस्थित किए गए हैं।

स्वाभाविक है कि जो लाभार्थी हैं वे डॉ आंबेडकर को पूजनीय बनाकर कोई भी चर्चा को उनका अपमान बताकर हिंसा पर उतारू होंगे। उनकी हिंसा अपना स्वार्थ बचाने के लिए है, डॉ आंबेडकर से कोई संबंध नहीं होता।

और ज्ञानियों को भी Thomas Becket, also known as Saint Thomas of Canterbury के बारे में पढ़ना चाहिए। यह कष्टप्रद हो तो Beckett नाम की फिल्म देखें, सुंदर फिल्म थी। रिचर्ड बर्टन और पीटर ओ टूल मुख्य किरदार थे।

चाणक्य को राक्षस और धनानन्द के षडयंत्रों से बचकर चन्द्रगुप्त से तालमेल बनाए रखना चाहिए।

अस्तु। माँ भारती सब का मंगल करें। उस के सभी पुत्र कन्या एकता से रहे, विश्व में भारत का नाम उज्ज्वल करें।

पाकिस्तान या भारत का विभाजन – https://bit.ly/2VEkgc0

डॉ आंबेडकर की दृष्टि में मुस्लिम कट्टरवाद (सम्पादन एसके अग्रवाल) – https://bit.ly/2KDfiLw

डॉ आंबेडकर के विचारों का वीडियो

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