नरेंद्र मोदी के दो मित्र तो जीत गए, अब मोदी की बारी

जिस नरेंद्र मोदी को 2014 से पहले कांग्रेस और बहुत से फर्जी बुद्धिजीवी कहते थे कि उन्हें गुजरात से बाहर विश्व में तो क्या, भारत में ही कोई नहीं जानता, उस मोदी ने प्रधान मंत्री बनते ही विश्व भर में मित्रों की फ़ौज खड़ी कर दी।

नरेंद्र मोदी के अनेक मित्रों में दो ख़ास हैं। जापान के शिंज़ो आबे और इज़राइल के बेंजामिन नेतन्याहू (बीबी)।

अक्टूबर 2017 के जापान के चुनावों में शिंज़ो आबे को विजय मिली और अब इज़राइल में ‘बीबी’ को।

मुझे याद है जापान के चुनाव से पहले ज़ी न्यूज़ पर सुधीर चौधरी ने एक DNA में बड़ी नकारात्मक रिपोर्ट देते हुए शंका जताई थी कि जैसे शिंजो आबे चुनाव हार ही जायेंगे और उनकी हार नरेंद्र मोदी के लिए बहुत बड़ा झटका होगा। लेकिन हुआ उसका उलट।

अब इज़राइल ने भी ‘बीबी’ को विजयी बनाया है। इज़राइल वो देश है जिसने भारत में लगातार कांग्रेस सरकार होते हुए भी भारत का ही साथ दिया जबकि कांग्रेस ने मुस्लिम वोटों के लिए फलस्तीन की वजह से इजराइल को ‘अछूत राष्ट्र’ का ही दर्जा दिया।

1992 में ही इज़राइल से सम्बन्ध बनाये गए लेकिन फिर उसे ‘अछूत’ ही समझा। नरेंद्र मोदी के आने के बाद अब इज़राइल पूरी तरह भारत के साथ चट्टान की तरह खड़ा है।

शिंज़ो आबे और ‘बीबी’ की जीत को समझने के लिए बस इतना समझना होगा कि उन देशों के लोग अपने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हैं और उन्हें पता है उनका नेता उनके लिए क्या है।

‘बीबी’ पर तो भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे थे मगर जनता ने उन्हें नकार दिया।

मोदी, नेतन्याहू और शिंज़ो आबे की तिकड़ी में अब जीत की बारी नरेंद्र मोदी की है। जनता को समझना होगा कि मोदी ने क्या किया… और ना समझ कर वोट ना दिया तो अबकी बार पाकिस्तान की सरकार की गुलामी भुगतनी पड़ेगी।

या तो वोट दो, वरना 100-500 रूपए और एक ठर्रे की बोतल में बिकने वाले हमारा भविष्य तय कर देंगे।

इतना जान लीजिये कि नेतन्याहू की जीत से स्वतंत्र फलस्तीन राष्ट्र का सपना धूमिल हो गया है और नरेंद्र मोदी की जीत से पाकिस्तान, उसके आतंकियों और कांग्रेस का सपना धूमिल हो जायेगा।

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