क्या आप जानते हैं वास्तविक आइसक्रीम सिर्फ अमूल बेचता है, बाकी बेचते हैं वनस्पति तेल!

गर्मियों का मौसम है… कुछ याद आया? जी हाँ, ठीक समझा आपने, मैं बात कर रही हूँ उस खाने की वस्तु की जो अधिकांशतः सभी आयु वर्ग में अति प्रिय है – ‘आइसक्रीम’. क्या बच्चे, बड़े या वयोवृद्ध – यह छोटी-सी, प्यारी-सी ठंडी वस्तु, थोड़ी देर के लिए ही सही, सभी को गर्म मौसम की मार से बचाकर आनंदपूर्ण क्षण दे जाती है.

इस थोड़ी सी देर के सुखद क्षणों के अनुभव में सामान्यतयः हममें से शायद ही कोई प्रोडक्ट में प्रयोग होने वाली सामग्री और उसके पौष्टिक तत्वों पर ध्यान देते हों.

हमारे देश में आजकल कई सारी कंपनियां है जो आइसक्रीम बनाती हैं जैसे – अमूल (Amul), क्वालिटी वाल्स (Kwality Walls), वाडीलाल (Vadilal), इत्यादि. यहाँ पर एक सबसे मुख्य बात पहले ही बता दूँ कि इन सभी में से Amul के “ice-cream” का Consumer Market Share सबसे अधिक है – करीबन 40% के आस पास और बाकि अन्य सारी कंपनियों में बंटें हुए हैं.

Amul के बाद दूसरी सबसे अधिक market share वाली कंपनी है – Kwality Walls जिसका शेयर करीबन 8% है (यह 8% बाकी सभी कंपनियों की तुलना में है). यह विषयवस्तु शुरू में बतानी की आवश्यकता इसलिए थी जिससे यह ज्ञात हो सके कि इस Market Share की वजह से ही कभी कभी उपभोक्ता के स्वास्थ्य को कहीं न कहीं नेपथ्य में रख दिया जाता है.

इस “शीत-वस्तु” के लिए इन्हीं दो कंपनियों में सालों लम्बा “शीत-युद्ध” भी चला है जो अब थोड़ा थम सा गया है जब December 2018 में बॉम्बे हाईकोर्ट का एक और फैसला आ चुका है.

Amul – Anand Milk Union Limited (1948) जो कि भारतीय दुग्धशाला कंपनी है तथा Gujarat Cooperative Milk Marketing Federation Ltd. (GCMMF) द्वारा संचालित है.

वहीं दूसरी ओर, Kwality Walls (1995) की शुरुआत दो कंपनियों के ब्रांड्स के समामेलन से हुआ – भारत का Kwality Icecreams (1956) और ब्रिटेन का Wall’s तथा अब यह Hindustan Unilever (HUL) के अंतर्गत आती है, और अब Kwality Walls पूर्णतया HUL के अंतर्गत ही आता है.

यह शीत युद्ध शुरू हुआ कुछ सात वर्ष पहले 2012-2013 में जब Amul वालों ने एक पैम्फलेट बाँटना शुरू किया जिसमें लिखा होता था – “उसे रियल मिल्क वाला Amul आइसक्रीम खिलाएं, वनस्पति तेल वाला नहीं” (क्यूंकि frozen dessert में वनस्पति तेल (vegetable oil) का प्रयोग होता है जबकि ice-cream में dairy fats. इसको आधार बना कर Amul ने स्वतंत्र संस्था Advertising Standards Council of India (ASCI) के पास शिकायत दर्ज की कि Kwality Walls अपने विज्ञापनों से “ice-cream” शब्द हटाए क्यूंकि वह वास्तव में “frozen dessert” है जो vegetable fat से बनती है (अतः भारतीय कानून के हिसाब से ‘frozen dessert’ – ‘ice-cream’ की श्रेणी में नहीं आता है) ना कि “ice-cream” जो milk fat से बनती है. Amul का मानना था कि यह उपभोक्ता के लिए भ्रामक स्थिति पैदा करने वाली है और उसके स्वास्थ्य से खिलवाड़ भी. क्यूंकि अनजाने में उपभोक्ता के शरीर में सूक्ष्म मात्रा में saturated fats और trans fats जा रहे थे/हैं जो बिना उनके जानकारी के सही नहीं है.

GCMMF द्वारा ASCI को शिकायत दर्ज किये जाने पर यद्यपि HUL ने तर्क-वितर्क किया किन्तु अंततः उसे Kwallity Walls के अपने सभी प्रकार के विज्ञापनों से “ice-cream” शब्द हटा कर “frozen dessert” से प्रतिस्थापित (replace) करनी पड़ी.

इस ठंडी सी वस्तु के लिए इन दोनों के बीच घर्षण होता रहा और टकराव भी जारी रहा. आख़िरकार करीब पांच साल बाद, इस बार HUL ने GCMMF-Amul के खिलाफ बॉम्बे हाईकोट में मुक़दमा दायर किया जिसके द्वारा कहा गया कि Amul अपने दो विज्ञापनों में खासकर Kwality Walls के प्रोडक्ट को अपमानित कर रहा है.

HUL के मुताबिक Amul के यह विज्ञापन सीधे सीधे तौर पर Kwality Walls उत्पाद का नकारात्मक प्रचार में सहायक थे – जिसका सीधा मतलब था ग्राहक ‘frozen dessert न लेकर Amul के ‘ice-cream’ ही लें.

Amul विज्ञापन को इस तरह से दिखाया गया था जिससे ऐसा प्रतीत होता था कि Amul कि ‘ice-cream’ 100% दूध / दूध वसा से बनी हो तथा दूसरी ओर प्रतिद्वंदी का ‘frozen dessert’ 100% “वनस्पति” से बना हो.

ध्यातव्य हो कि 2012 के ASCI के फैसले के बाद से HUL ने अपने सभी प्रकार के प्रचारों में ‘ice-cream’ शब्द को ‘frozen dessert’ से प्रतिस्थापित कर लिया था और इस प्रकार से का HUL के अकेले का ‘frozen dessert’ श्रेणी का market share 51.3% था और कहीं न कहीं इस प्रकार का विज्ञापन HUL – Kwality Walls के व्यापर पर भी असर डालता.

किन्तु Amul ने HUL की दलीलों को नकारते हुए कहा कि – “हम ग्राहकों को सिर्फ शिक्षित कर रहे है कि जब कोई frozen dessert ‘वनस्पति’ के प्रयोग से बनता है तो वह सेहत के लिए कितना हानिकारक होता है.”

इस पर HUL ने सफाई दी कि वे वनस्पति का प्रयोग नहीं वरन vegetable oil (वनस्पति तेल) का प्रयोग कर रहे हैं.

इस मुक़दमा पर फैसला देने के लिए एकल पीठ जस्टिस कथावाला की अध्यक्षता में गठित की गई और जून 2017 को सारे तथ्यों को जाँच करने के पश्चात् HUL के पक्ष में फैसला दिया यह कहते हुए यह फैसला सिर्फ इसलिए नहीं दिया जा रहा है क्यूंकि वनस्पति और वनस्पति तेल जैसे शब्दों का प्रयोग हुआ विज्ञापनों में बल्कि विज्ञापन के नकारात्मक टोन के वजह से भी HUL के हक़ में दी गई है, और तत्काल प्रभाव से GCMMF को आदेश दिया गया कि उन दो विज्ञापनों का ब्रॉडकास्ट बंद करें.

लेकिन फिर 2018 में GCMMF-Amul ने 2017 के फैसले को चुनैती देते हुए फिर से कोर्ट में गुहार लगाई. जिसके एवज़ में (पहले के सारे तथ्यों को आधार में रखते हुए) निर्णय (December 2018) यह मिला कि जहाँ तक ग्राहकों को वनस्पति (क्यूंकि Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) के निर्देशों के अनुसार वनस्पति का उपयोग सेहत के लिए अच्छा नहीं है) प्रयोग वाले frozen dessert से सचेत करने की बात है , वह सही है. दूसरी, एक ही श्रेणी के वस्तुओं की तुलना भी एक सिरे से गलत नहीं है. बस ध्यान यह देना है कि विज्ञापन प्रत्यक्ष रूप से अपने प्रतिद्वंदी के उत्पाद कि उपेक्षा कर नीचे न दिखाए (disparagement in legal terms). इस प्रकार बॉम्बे हाईकोर्ट ने GCMMF-Amul को उपरोक्त हिदायत देते हुए, अपने विज्ञापनों को सुधारने के आदेश के साथ ही पुनः आरम्भ करने की अनुमति दे दी.

यह तो बात थी Kwality Walls और Amul के बीच की लड़ाई की. पर यहां पर एक बात और गौर करने वाली है कि हम ग्राहक भी बहुत अधिक सचेत नहीं रहते हैं. अगर बात सिर्फ आइसक्रीम और फ्रोजन डेज़र्ट की ही ले ली जाए तो कितनों को इसके बीच की बारीकियां मालूम होंगी. सिर्फ यही नहीं, दूध वसा, वनस्पति और वनस्पति तेल “में भी” अंतर होता है. ये सारी बातें और भी स्पष्ट रूप से सामने आ जाए अगर हम FSSAI में इनसे सम्बंधित दिए गए निर्देशों को पढ़ें.

कोई भी कंपनी इन निर्देशों का कितना पालन करती है, इस चीज के प्रति अधिक सजगता की आवश्यकता है. आए दिन कुछ न कुछ हम सभी को पढ़ने, सुनने में आता रहता है. जो कंपनियां व्यापार कर रही होती हैं, उनका (ज्यादातर का) मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक मुनाफा कमाना होता है, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है. स्वास्थ्य हमारा है, सो सचेत और सजग रहने की प्राथमिकता हमारी होनी चाहिए.

जागो ग्राहक जागो!!!

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