राफेल : झूठ का कारखाना बन चुकी कांग्रेस के हंगामे से न हों भ्रमित

‘द हिन्दू’ अखबार ने राफेल सौदे के एक दस्तावेज का आधा हिस्सा काट कर (छुपाकर) आधा हिस्सा छापा था, क्योंकि यदि छुपाया गया आधा हिस्सा भी वो छाप देता तो उसके द्वारा छापे गए आधे हिस्से की धज्जियां उड़ जाती।

आधी छुपाकर आधी छापी गयी उस खबर को सरकार के खिलाफ महत्वपूर्ण सबूत बताते हुए प्रशांत भूषण, अरुण शौरी, यशवंत सिन्हा की तिकड़ी सुप्रीम कोर्ट गयी थी।

इस तिकड़ी ने उसी अधूरी खबर के आधार पर राफेल मामले की फिर से सुनवाई की पुनर्विचार याचिका दायर की थी। केन्द्र सरकार ने उस दस्तावेज़ को चोरी किया गया अवैध दस्तावेज बताकर उसके आधार पर की जा रही पुनर्विचार याचिका की मांग को खारिज करने की मांग की थी।

आज का सुप्रीम कोर्ट का निर्णय केवल इतना है कि इस आधार पर किसी दस्तावेज़ को खारिज़ नहीं किया जा सकता कि वो कैसे प्राप्त किया गया है। अतः भूषण शौरी सिन्हा की पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा।

उसकी सुनवाई के बाद यह तय होगा कि जिस अधूरी छापी गयी खबर को भूषण, शौरी, सिन्हा की तिकड़ी बहुत महत्वपूर्ण और प्रासंगिक बता रही है, क्या वह वास्तव में बहुत महत्वपूर्ण और प्रासंगिक है या नहीं है?

इस के पश्चात ही सुप्रीम कोर्ट यह फैसला करेगा कि राफेल मामले की सुनवाई फिर से की जाए या नहीं की जाए।

ज्ञात रहे कि इससे पहले भी जस्टिस लोया की मौत से सम्बन्धित सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ प्रशांत भूषण ने पुनर्विचार याचिका दायर की थी, जो स्वीकार भी ली गयी थी। लेकिन सुनवाई के दौरान उसकी याचिका की धज्जियां उड़ गई थी और 31 जुलाई 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को खारिज़ कर दिया था।

आज भी पुनर्विचार याचिका की मांग स्वीकार की गई है। 99% मामलों में पुनर्विचार याचिका स्वीकार की जाती है।

अतः आज भी इसका स्वीकारा जाना कोई आसमान टूट जाने सरीखा नहीं है। आज के फैसले से राफेल डील का भी कोई लेना-देना नहीं है।

अब पुनर्विचार याचिका पर दोनों पक्षों के तथ्य और तर्क सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट यह फैसला करेगा कि राफेल डील पर दोबारा सुनवाई की जाए या नहीं।

अतः आज के फैसले से न्यूज़ चैनल जिस तरह अचानक बुरी तरह बलबलाए हुए और कांग्रेसी जिस तरह अचानक बुरी तरह बौराए हुए नज़र आने लगे हैं… उसे देख सुनकर भ्रमित मत होइए।

राफेल डील पर CAG की बहुत विस्तृत रिपोर्ट आ चुकी है। जिस पर महीनों तक अपनी खोपड़ी खपाने-लड़ाने के बावजूद भूषण, शौरी, सिन्हा की तिकड़ी और कांग्रेसी फौज किसी प्रकार की कोई खामी नहीं ढूंढ पायी है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा राफेल डील को दी गयी क्लीनचिट आज भी ज्यों की त्यों अस्तित्व में है। अपने उस फैसले पर किसी प्रकार की कोई रोक सुप्रीम कोर्ट ने नहीं लगाई है।

अतः न्यूज़ चैनली नौटंकी तथा भारतीय राजनीति में झूठ का सबसे बड़ा कारखाना बनती जा रही कांग्रेस, भारतीय राजनीति का पहला और इकलौता सनीचर सिद्ध हो चुके केजरीवाल सरीखों के शोरगुल हंगामे से भ्रमित मत होइए।

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