लुटियंस मायाजाल का यह सच भी जानिए

राजीव गांधी के साथ सुमन दुबे की गहरी दोस्ती तब हुई थी जब वे दून स्कूल में पढ़ते थे। बाद में सुमन दुबे राजीव गांधी दरबार के सर्वाधिक शक्तिशाली नवरत्नों में शामिल हो गए थे।

राजीव गांधी की मृत्यु के पश्चात सुमन दुबे सोनिया गांधी के भी सर्वाधिक विश्वस्त सहयोगी साथी बन गए। नेहरू मेमोरियल म्यूज़ियम और लाइब्रेरी तथा राजीव गांधी फाउंडेशन एवं नेशनल हेराल्ड समेत लगभग उन सभी संस्थाओं में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालने लगे जिनकी कर्ताधर्ता सोनिया गांधी है।

यही कारण है कि नेशनल हेराल्ड केस में वो नामज़द हैं तथा 19 दिसम्बर 2015 से वो ज़मानत पर बाहर हैं।

इसके अलावा सुमन दुबे की एक और बहुत महत्वपूर्ण पहचान भी है। अरुण शौरी के सगे साढ़ू हैं सुमन दुबे। अर्थात सुमन दुबे और अरुण शौरी की पत्नियां सगी बहने हैं।

अधिकांश लोगों को, विशेषकर नई पीढ़ी को यह ज्ञात नहीं होगा कि राजीव गांधी को मिस्टर क्लीन की उपाधि सत्यवादी हरिश्चन्द्र के मीडियाई अवतार माननीय अरुण शौरी ने ही दी थी।

इसका ईनाम यह मिला था कि स्व. अटल जी और जॉर्ज फर्नांडिस पर ताबूत घोटाले का शत प्रतिशत झूठा आरोप लगाकर प्रचण्ड ताण्डव करती रही सोनिया गांधी और काँग्रेस ने तब शातिर चुप्पी साध ली थी जब उसी दौरान अटल सरकार के विनिवेश मंत्री के रूप में अरुण शौरी ने उदयपुर स्थित उस भव्य सरकारी होटल लक्ष्मी विलास पैलेस को केवल 7.52 करोड़ में ‘दिल्ली’ के एक घराने को बेच डाला था जिस लक्ष्मी विलास पैलेस होटल की केवल ज़मीन मात्र की कीमत उस समय की सरकारी दरों के अनुसार 151 करोड़ रू थी। बाजार भाव इससे 5 गुना अधिक था।

सोनिया गांधी और काँग्रेस ने तब भी शातिर चुप्पी साध ली थी जब उसी दौरान अटल सरकार में मंत्री अरुण शौरी के विनिवेश विभाग ने मुंबई के सेंटूर एयरपोर्ट होटल को केवल 83 करोड़ रू में फिर से ‘दिल्ली’ के ही एक मशहूर घराने को बेच दिया था।

उस होटल को केवल 5 महीने बाद ही उस घराने ने 115 करोड़ में ‘सहारा’ परिवार को बेच कर 32 करोड़ मुनाफा कमा डाला था. तब यह चर्चा खूब गर्म रही थी कि 115 करोड़ की रकम तो कागज़ी सौदे की है। इस रकम के अलावा नंबर दो में 150 करोड़ और वसूले गए हैं।

यह केवल दो उदाहरण मात्र हैं। उस दौरान ऐसे उदाहरणों की लम्बी कतार लगा दी थी शौरी ने। लेकिन तब से लेकर अब तक, सोनिया, राहुल समेत किसी भी काँग्रेस नेता को अरुण शौरी के खिलाफ कभी एक शब्द भी बोलते हुए क्या सुना आपने?

अब मोदी सरकार में उन सौदों की CBI जांच अवश्य हो रही है।

उपरोक्त के अलावा एक और रिश्ता भी जानिए समझिये। अरुण शौरी और सुमन दुबे का सगा साला है अजय शुक्ला नाम का तथाकथित पत्रकार।

सेना से निकाले जाने के बाद काँग्रेसी यूपीए राज में अजय शुक्ला पहले NDTV में नौकरी करता था। फिर दूरदर्शन का कर्ताधर्ता बन गया था। आजकल रविशकुमार उस अजय शुक्ला को रक्षा विशेषज्ञ बताकर NDTV में बैठाता है। उसके भारत सरकार विरोधी, विशेषकर भारतीय सेना विरोधी ब्लॉग्स को पाकिस्तानी सेना और मीडिया की वेबसाइट्स प्रमुखता से छापती रहती हैं।

अंत में बस इतना कि शत्रु खेमे में अपना आदमी ही हमारा शत्रु बनकर महत्वपूर्ण पद पर बना रहे… इस काँग्रेसी भूमिका को शौरी ने बहुत बरसों तक बहुत शानदार ढंग से निभाया। इसके लिए शौरी को बधाई।

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