निरोगी जीवन के उपाय : मिट्टी के बर्तन

अच्छा एक बात बताइए आपने कभी सुना है फलाने राजा मधुमेह से मरे, फलाने ऋषि को हाई बीपी था और वो हृदयघात से मरे? या फलानी रानी का थाइरोइड बढ़ा हुआ था इसलिए वह इतनी मोटी थी?

क्या तब मीठा नहीं खाया जाता था? क्या राजभोग और 56 पकवान नहीं बनते थे? बनते थे वो भी गाय के शुद्ध घी में… फिर ऐसी कौन सी उनके पास जादुई छड़ी थी कि यह जो आजकल तरह तरह की बीमारियों का हव्वा बना रखा है उस समय उनको नहीं हुई?

पहली बात वो गाय का शुद्ध घी खाते थे, मशीन की बनाई शक्कर नहीं खाते थे, आयोडीन वाला नमक नहीं खाते थे, सब्जियों में कीटनाशक नहीं डलता था, दूसरी बात, बाद में तेल का उपयोग हुआ भी तो तिलहन से बनने लगा, अभी की तरह सोयाबीन, सन फ्लावर और राईस ब्रान का नकली तेल नहीं, शुद्ध सरसों, तिल और मूंगफली का तेल.

हम शुरू से मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाते और खाते आये हैं, बाद में सोना, चांदी, कांसा, लोहे और कलई लगे पीतल के बर्तन भी उपयोग में आये. लेकिन उसके पीछे लम्बे प्रयोग हुआ करते थे, किस धातु से क्या पौषक तत्व मिलेंगे और क्या नुकसान होगा, इसका एक लंबा अनुभव और रिसर्च करने के बाद जीवन में उपयोग में लाया जाने लगा.

लेकिन ऐसी जीवन शैली के लिए समय लगाना होता है. इन बर्तनों को बाइयों के भरोसे झूठे नहीं छोड़ सकते, उन्हें तुरंत मांज धोकर रखना होता है.

और भी बहुत सारी सावधानियां रखना होती हैं जिसे मैं आगे बता रही हूँ, लेकिन यह उस तकलीफ से कई गुना कम है जो आप तरह तरह की बीमारियाँ पालने में उठाते हैं या डॉक्टर्स की फीस देने में खर्च करते हैं. दूसरा इससे जीवन में उत्पादक श्रम का दोबारा आगमन होगा, मोटापा कम करने के लिए आपको अलग से व्यायाम के लिए समय नहीं लगाना होगा.

सबसे पहले प्लास्टिक, एल्यूमिनियम और स्टील के बर्तनों का उपयोग बिलकुल बंद कर दीजिये. कुछ मिट्टी के और पीतल के बर्तन आप अमेज़न से अच्छी गुणवत्ता के साथ खरीद सकते हैं. एक साथ सारे बर्तन बदलने के बजाय धीरे धीरे आवश्यकता अनुसार बर्तन खरीद लें. हज़ारों रुपये दवाइयों पर खर्च करने के बाद भी डायबिटीज और थाइरोइड जैसी बीमारियों से जीवन भर जूझते रहने से बेहतर है हम अपने जीवन का तरीका बदल लें.

कुछ आवश्यक बातें नोट कर लीजिये

रविवार को ताम्बे और कांसे का स्पर्श वर्जित है, इसलिए इस दिन इन दो धातुओं से बने बर्तनों का उपयोग न करें. प्रमाण के लिए उस धातु से बनी वस्तुओं की ऊर्जा चेक कर लीजिये, ऊर्जा चेक करने की विधि नीचे दिए गए वीडियो में है.

मिट्टी की कड़ाही में सब्ज़ी बना रहे हैं तो दो दिन में एक बार उसमें चावल अवश्य उबाल लें ताकि मिट्टी का सोखा हुआ तेल निकल जाए, वरना वह ज़हर होने लगता है.

इसे साफ़ करने के लिए सिर्फ scrotch bite काफी है या तुरई के मूंज से मांज सकते हैं, कहीं से मिट्टी मिल जाए तो और भी अच्छा, बस कोई भी साबुन या डिटर्जेंट का उपयोग नहीं करना है.

सब्ज़ी दाल हिलाने के लिए लकड़ी की चम्मचों का उपयोग करें, स्टील के नहीं, पीतल के चम्मच से हिलाने से भी मिट्टी के बर्तन टूटने का डर रहता है.

मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाने और खाने से सिर्फ तीन महीने में आपकी डायबिटीज की समस्या समाप्त हो जाएगी. मिट्टी में इतने पोषक तत्व होते हैं.

पीतल के बर्तनों में बिना कलई के पानी भरा जा सकता है, परन्तु खाना बनाने के लिए पीतल के बर्तनों में कलई होना आवश्यक है.

पीतल के बर्तनों में खाना लम्बे समय के लिए मत छोड़िये, और खट्टी चीज़ें पीतल में न बनाएं.

कलई में बंग भस्म होती है जो कई रोगों से स्वाभाविक रूप से दूर रखती है.

लोहे की कड़ाही में जंग लगी है तो पहले उसे साफ कर लें. हरी भाजियां लोहे के बर्तन में ही बनाएं.

पानी को शुद्ध करने के लिए उसमें सहजन की फली का तीन इंच का टुकड़ा कुचलकर डाल दें. आपके फ़िल्टर और RO के पानी से कई गुना अधिक शुद्ध करता है, और पानी के मिनरल्स भी नष्ट नहीं होते जो इलेक्ट्रिक फ़िल्टर और RO के पानी से नष्ट हो जाते हैं.

कैल्शियम की कमी है तो दाल सब्ज़ी में चूने का पानी डालिए, आपको अलग से कैल्शियम की गोलियां नहीं लेना पड़ेगी.

चूने का पानी बनाने की विधि आप इस वीडियो में देख सकते हैं.

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