माँ की रसोई से : मोगरी और सांगरी की सब्ज़ी

बचपन में घर के बाहर जब सब्ज़ी का ठेला आता था तो हम भी माँ का पल्लू पकड़कर साथ में खड़े हो जाते थे. माँ सब्ज़ी खरीदती और हम ठेले से बटला (मटर) चुराकर छिलके के साथ ही खा जाते. ना सब्ज़ी धोने की कभी हिदायत मिली, ना छिलका खाने के लिए डांट. क्योंकि उन दिनों सब्ज़ियों पर कीटनाशक दवाइयों का अत्याचार शुरू नहीं हुआ था और सब्ज़ियाँ सीधे खेत से आती थीं.

उन्हीं दिनों बचपन में मोगरी नाम से एक फली खाया करते थे, जो मूली के स्वाद वाली होती थी. यह मूली की फली ही होती है. कल बाज़ार सब्ज़ी लेने गयी तो ऐसी ही एक फली मिली, कुछ लोग कह रहे थे यह मूली की फली है कोई कह रहा था सांगरी है.

वैसे तो राजस्थान का मेवा कहे जाने वाली सांगरी पेट के रोगों के लिए बहुत लाभदायक होती हैं, लेकिन जोड़ों के दर्द में भी इसे रामबाण औषधी कहा गया है। प्रकृति के नियमानुसार जिस क्षेत्र में जो रोग ज्यादा होता है, उस रोग की प्राकृतिक औषधियों की पैदावार वहां अधिक होती हैं। मौसम में ये हरी मिल जाएगी, बाकी ये सूखी ही बेची जाती है, जिसे धो उबालकर पकाना होता है.

चूंकि मोगरी और सांगरी एक जैसी ही दिखती है इसलिए मैं इसे दोनों तरह से बनाई जाने वाली रेसिपी दे रही हूँ. मोगरी यानी मूली की फली को वैसे तो यूं ही कच्चा खाया जा सकता है परन्तु हनुमानचंद जैन जी कहते हैं – कि मोगरी ( मूली की फली) की सब्ज़ी हमारे यहाँ मुंग वडी के साथ बनाते हैं.

माधव शशि कहते हैं – बारीक काटकर पानी में आलुओं के साथ उबालकर निचोड़कर जीरा हींग में छौंककर बाकी नमक मसाले डालकर सूखी भूनकर पकाकर भी खाया जाता है.

चुरू में रहने वाली शिक्षिका शशि कला हरितवाल बताती हैं –
मूली की फली को एक उबाल देकर, पानी निकाल कर, नमक, हल्दी और मिर्च मिलाकर, जले कंडे पर घी डालकर धुंआ देकर बाजरे की रोटी के साथ खाया जाता है।
आलू के साथ इसकी तरकारी भी बनाई जाती है।
वैसे तो गेंहू की रोटी के साथ भी खाया जा सकता है लेकिन बाजरे के साथ इसका स्वाद ज्यादा अच्छा लगता है.

इंदु भारद्वाज भी यही कहती हैं कि मूली की फली है (मोगरी) आलू के साथ मिलाकर बहुत ही स्वादिष्ट सब्जी बनती है, इसे बाजरी की रोटी के साथ कच्ची खाने से बहुत ही अच्छी लगती है।

इंदु जी की आलू-मंगरी की सब्ज़ी की रेसिपी

  1. दो आलू मध्यम आकार के
  2. पाव भर मोगरी ऊपर व नीचे की डंडी अलग की हुई
  3. तेल एक कलछी, आधा चम्मच लाल मिर्च, आधा चम्मच नमक, सुखा पिसा धनिया,व हल्दी व थोङी सी अमचूर.
    मोगरी को पहले उबाल लें, आलू को काट लें, फिर कड़ाही में तेल डालकर जीरे के बघार के साथ आलू व मोगरी को छौंक दो बाकी मसाला मिलाकर थोड़ा पानी डालकर धीमी आंच पर सीजने दो. पंद्रह मिनट में सब्ज़ी बन जाएगी, थोड़ा सा झोल यानी रसा रहना चाहिए, जिससे बाजरी की रोटी के साथ बहुत मजे की लगती है.
    बस बहुत कम चीजों के साथ साधारण तरीके से बनाई सब्जी का स्वाद एकदम नेचुरल तथा सब्जी के खुद का स्वाद आता है.

रेणु तिवारी आलू मूंगरे की सब्जी हिंग-सौंफ, हल्दी, नमक, मिर्ची, जीरा, धनिया और गर्ममसाला डाल कर बनाती हैं। वे कहती हैं, पानी के हलके छींटे मारते रहना चाहिए इसे गलाने के लिए.
थोड़ी हरी मिर्च डाल लेना काट कर, चाहो तो।‌ अदरक, टमाटर और हरी मिर्च की प्यूरी भी डाल सकते हैं.

सांगरी की सब्ज़ी की रेसिपी

आवश्यक सामग्री

सांगरी – 2 मुट्ठी
नमक – स्वादानुसार
अमचूर पाउडर – 1 छोटी चम्मच
हल्दी पाउडर – 1 चम्मच
सरसों का तेल – 2 बड़े चम्मच
जीरा – 3/4छोटी चम्मच
हींग – 2 पिंच
साबुत लाल मिर्च – 3-4
लाल मिर्च पाउडर – 1 छोटी चम्मच
गरम मसाला – आधी छोटी चम्मच
हरा धनिया – एक छोटी कटोरी
किशमिश – 1 टेबल स्पून

विधि

हरी सांगरी को नमक डालकर पांच मिनिट के लिए उबाल लीजिये.
अब लोहे, कलई लगी पीतल या मिट्टी के कड़ाही में सरसों का तेल गर्म करके उसमें जीरा तड़काइये.
जीरा भुनने के बाद, हींग, हल्दी पाउडर, साबुत लाल मिर्च, धनिया पाउडर मसाले को थोड़ा सा भून लीजिये.
सांगरी डाल कर अब लाल मिर्च पाउडर, अमचूर पाउडर, गरम मसाला, नमक और किशमिश डालकर सब्जी को चलाते हुये 3-4 मिनिट तक पकाइये.

सांगरी की सब्ज़ी तैयार हो गई है, अब हरा धनिया डालकर मिला दीजिये.

विशेष नोट : चतुर्थी के दिन मूली और मूली की फली खाना वर्जित्त होता है.

कुछ आवश्यक बातें नोट कर लीजिये

मिट्टी की कड़ाही में सब्ज़ी बना रहे हैं तो दो दिन में एक बार उसमें चावल अवश्य उबाल लें ताकि मिट्टी का सोखा हुआ तेल निकल जाए, वरना वह ज़हर होने लगता है.

मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाने और खाने से सिर्फ एक महीने में आपकी डायबिटीज की समस्या समाप्त हो जाएगी. मिट्टी में इतने पोषक तत्व होते हैं.

पीतल के बर्तनों में बिना कलई के पानी भरा जा सकता है, परन्तु खाना बनाने के लिए पीतल के बर्तनों में कलई होना आवश्यक है.

पीतल के बर्तनों में खाना लम्बे समय के लिए मत छोड़िये, और खट्टी चीज़ें पीतल में न बनाएं.

कलई में बंग भस्म होती है जो कई रोगों से स्वाभाविक रूप से दूर रखती है.

लोहे की कड़ाही में जंग लगी है तो पहले उसे साफ कर लें. हरी भाजियां लोहे के बर्तन में ही बनाएं.

पानी को शुद्ध करने के लिए उसमें सहजन की फली का तीन इंच का टुकड़ा कुचलकर डाल दें. आपके फ़िल्टर और RO के पानी से कई गुना अधिक शुद्ध करता है, और पानी के मिनरल्स भी नष्ट नहीं होते जो इलेक्ट्रिक फ़िल्टर और RO के पानी से नष्ट हो जाते हैं.

कैल्शियम की कमी है तो दाल सब्ज़ी में चूने का पानी डालिए, आपको अलग से कैल्शियम की गोलियां नहीं लेना पड़ेगी.

चूने का पानी बनाने की विधि आप इस वीडियो में देख सकते हैं

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