पाकिस्तान प्रेम में विह्वल भारतीय विपक्ष : मोदी के भारत से भयातुर पाकिस्तानी सत्ताधीश

भारत में चुनाव हैं और हम लोगों का ध्यान भी भारत में, उसकी समस्याओं और आकांक्षाओं को लेकर ही लगा हुआ है। लेकिन विपक्षी दलों ने पाकिस्तान को भारत के चुनाव का एक नरेटिव (कथानक) बना दिया है और यहां तक कि ऐसा प्रतीत होता है मानों मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणापत्र को पाकिस्तान की छत्रछाया में लिख मारा है।

यह इस चुनाव की विचित्रता ही है कि भारत का विपक्ष पाकिस्तान की याद में तड़प रहा है, वहीं पाकिस्तान की सरकार भारत की बीजेपी की सरकार व उसके प्रधानमंत्री मोदी जी को याद कर के कांप रही है।

बीते रविवार को पाकिस्तान के विदेशमंत्री शाह महमूद कुरेशी ने पाकिस्तानी व विदेशी संवादाताओं से एक कॉन्फ्रेंस की थी जिसके उन्होंने कहा कि, “मैं आप लोगों को बताना चाहता हूँ कि भारत के प्रधानमंत्री ने अभी हाल में अपनी कैबिनेट कमेटी ऑफ सिक्योरिटी की बैठक बुलाई थी जिसमे उनकी सेना के तीनो विंगों के सेनाध्यक्ष भी शामिल थे। जिसमें उन्होंने (तीनो सेनाध्यक्षों ने) कहा है कि वे पाकिस्तान के विरुद्ध कार्यवाही करने को तैयार है, वे शासकीय आदेश चाहते है। वे राजनैतिक स्वीकृति चाहते है। इस पर प्रधानमंत्री (मोदी जी) ने उनसे कहा कि उन्होंने तो सेना को पहले से खुली छूट दे रखी है, आपको तो इजाजत दे रखी है।”

आगे कुरेशी साहब कहते है कि इस बार भारतीय सेना ने अपने टारगेट भी तय कर रखे हैं। वे मिलिट्री ठिकाने हैं जो पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू कश्मीर क्षेत्र से आगे जाकर पाकिस्तान में भी हैं।

इसके बाद कुरेशी, पाकिस्तान की जनता व अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान इस बात पर दिलाते हैं कि भारत, कैबिनेट कमेटी ऑफ सिक्योरटी की मीटिंग को लेकर आ रहे समाचारों का खंडन भी नहीं कर रहा है।

फिर वे ज़ोर देकर कहते हैं कि, “मैं एक ज़िम्मेदार आदमी हूँ, जो ज़िम्मेदार पद पर बैठा है जिसे मालूम है कि उनके मुंह से निकले हर शब्द अंतराष्ट्रीय मीडिया में लिपिबद्ध होंगे, वे ज़िम्मेदारी से कह रहे हैं कि उनके पास विश्वसनीय गुप्त सूचना है कि भारत योजना बना रहा है और 16 अप्रैल से 20 अप्रैल तक भारत, पाकिस्तान पर आक्रमक कार्यवाही कर सकता है। जम्मू कश्मीर में कोई बड़ा हादसा (पुलवामा जैसा) हो सकता है। पाकिस्तान ने पहले से ही संयुक्त राष्ट्र सिक्युरिटी काउंसिल के 5 स्थायी सदस्यों को इसकी सूचना दे दी है, ताकि भारत पर दबाव बना कर, इस तरह की कार्यवाही करने से रोकें”।

मेरे लिए पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह मेहमूद कुरेशी का यह वक्तव्य बेहद संतोषप्रद है। आखिर भारत की जनता को और कितने अच्छे दिन चाहिए? क्या हम लोगों ने कभी यह आशा की थी जो पाकिस्तान, दशकों से भारत के साथ आतंकवाद का छुपाछुपी का खेल खेलकर लहूलुहान करता था, वह आज भारत की कार्यवाही से बचने के लिए, अंतराष्ट्रीय समुदाय से चीत्कार कर रहा है!

मुझे याद है कि 2014 से पहले हर आतंकवादी घटना के बाद हम दौड़े हुये संयुक्त राष्ट्र संघ, अमेरिका व अन्य विश्व शक्तियों के पास पाकिस्तान की शिकायत करने जाते थे और वे लोग भारत को सांत्वना दे कर टहला देते थे।

लेकिन आज 2019 में भारत की मोदी सरकार ने पाकिस्तान को उस लाचारी के अंतिम छोर पर पहुंचा दिया है जहां उसको सार्वजनिक रूप से, ‘हमें भारत से बचाओ’ की गुहार लगानी पड़ रही है।

मेरे लिए एक तरफ पाकिस्तान के विदेश मंत्री की यह प्रेस कॉन्फ्रेंस अकल्पनीय है, वहीं इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के अपने संकेत भी है, जिसकी विवेचना बड़ी आवश्यक है।

हालांकि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद पाकिस्तान ने भारतीय डिप्टी हाई कमिश्नर को बुलाकर आधिकारिक रुप से अपना विरोध प्रगट कर दिया जिसके उत्तर में भारत ने इसे “गैरज़िम्मेदाराना और मूर्खतापूर्ण” बता कर पूरे मामले को हल्का करने की कोशिश है लेकिन भारत जानता है कि कुरैशी या पाकिस्तान मूर्ख नहीं हैं।

आज पाकिस्तान जिस दिवालियापन की स्थिति में खड़ा है वह अपनी वैश्विक विश्वसनीयता के सबसे नीचे के धरातल पर आ चुका है। आज उसके सारे तन्त्र जेहादी व कट्टर इस्लामिक मानसिकता में जकड़े हुए हैं।

आज तक पाकिस्तान ने भारत व विश्व को अपने न्यूक्लियर बमों को लेकर धमका रखा था लेकिन भारत ने उसकी हवा निकाल कर, पाकिस्तान को नग्न कर दिया है। इस नग्नता ने आज पाकिस्तान व उस पर दशकों से परोक्ष रूप से शासन करने वाली व्यवस्था (मिलिट्री, आईएसआई व उसके द्वारा जनित राजनीतिज्ञ व तन्त्र), जिसे इस्टेबलिशमेंट के नाम से जाना जाता है, के अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। आज पाकिस्तान को भारत से ही डर नहीं है बल्कि अपनी खुद की जनता के सामने, अपने प्रभुत्व के खोने का डर भी समा गया है।

ऐसे में कुरेशी के मुंह से पाकिस्तान, हर उस दरवाजे को खटखटा रहा है, जो उसे मोदी जी के भारत से बचा सकता है या उसे सांस लेने की मोहलत दिला सकता है।

कुरेशी ने अपने सार्वजनिक रुदन से तीन वर्गों को अपील की है। एक अंतरराष्ट्रीय समुदाय को, विशेष रूप से अमेरिका, सऊदी अरब और चीन से, जो पाकिस्तान को लगता है, भारत पर कूटनैतिक दबाव बना सकते है। दूसरा भारत के विपक्षी दल, जिसमे मुख्यतः कांग्रेस है जो पाकिस्तानी एजेंडे को बढ़ा रही है। वह उनसे मोदी जी को युद्धउन्मादी घोषित करके, उनके विरुद्ध और आक्रमक होने की अपेक्षा कर रहा है। तीसरा उसने जम्मू कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में लगे संगठनों को भारत में जल्दी ही बड़ी कार्यवाही करने का आह्वान किया है ताकि भारत की जनता के सामने मोदी की छवि को चोट पहुंचाने का एक और घातक प्रयास किया जा सके।

पाकिस्तान को अपने इस प्रयास का वास्तविक रूप से क्या परिणाम देखने को मिलेगा यह तो काल के गर्भ में है लेकिन मेरा आंकलन है कि हम अगले आने वाले समय में पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू कश्मीर (पीओके) में कुछ बड़ा देखने जा रहे है।

पाकिस्तानी विदेश मंत्री की खुश्क आवाज़ व सूनी आंखे साफ बता रही हैं कि जिस तरह वे बालाकोट पर हुये हवाई हमले की सत्यता, पाकिस्तान की जनता को बताने की हिम्मत नही कर पाए हैं वैसे ही पीओके में हुई घटना व होने वाली घटनाओं को स्वीकार करने की स्थिति में नहीं हैं।

यह सब इस बात को बल दे रहा है कि पिछले हफ्ते से अनाधिकारिक रूप से जो समाचार हवा में घूम रहे थे कि भारत ने पीओके में, अखनूर सेक्टर से 3 किमी अंदर जाकर कब्ज़ा कर लिया है, वह सत्यता के करीब हैं।

अंत में यही कहूंगा कि यह एक विचित्र विरोधाभास है कि सत्ताधारी दल बीजेपी और उसके प्रधानमंत्री मोदी, जो जनता से, पाकिस्तान नीति को लेकर पिछले साढ़े चार वर्षों से आलोचना झेल रहे थे, वह पाकिस्तान को जवाब देने पर पूरी जनता से तो पूरा समर्थन पा रहे हैं, लेकिन विपक्ष द्वारा आलोचित हो रहे हैं।

आज जब मोदी जी की पाकिस्तान नीति अपने पूरे पत्ते खोल रही है तब भारत का विपक्ष पाकिस्तान प्रेम में अपने कपड़े खोल कर सार्वजनिक रूप से नग्न नाच कर रहा है।

मेरा विश्वास है कि पाकिस्तान द्वारा 1948 में कब्ज़ा किये गए जम्मू कश्मीर के हिस्से का पुनः भारत के नियंत्रण में होने का स्वप्न, जो भारत में लोगों ने 7 दशकों से देखा था, उसके पूरे होने का समय आ गया है।

ऐसा लगता है कि 7 दशकों से भारत के साथ, पीओके की जनता, पुनः जाग्रत होने के लिए योग्य पात्र की प्रतीक्षा कर रही थी। भारत को नरेंद्र मोदी की ही प्रतीक्षा थी।

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