दुर्जन पर सहृदयता मत दिखाइए साहेब, इससे देश कमज़ोर होता है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के, एबीपी न्यूज़ को दिए गए इंटरव्यू को अब तक करोड़ों लोग देख चुके हैं। और अपने पहले प्रसारण में एबीपी न्यूज़ द्वारा काट दी गई लगभग ढाई मिनट की क्लिप को भी लाखों लोगों ने देखा।

इस क्लिप में एबीपी न्यूज़ की रुबिका लियाकत और सुमित अवस्थी का प्रधानमंत्री के प्रति अशिष्टाचार साफ साफ परिलक्षित होता है।

बेशक प्रधानमंत्री इन दोनों छुपे एजेंडा वाले पत्रकारों को ओवर पावर करने में समर्थ रहे हों… परंतु हर इंटरव्यू के प्रोटोकॉल होते हैं…

प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के साक्षात्कार के बाकायदा नियम और कानून होते हैं… और हर चैनल और अखबार को इसका पालन करना होता है।

मगर पूरे इंटरव्यू में से बगैर PMO की अनुमति के ढाई मिनट का हिस्सा काट कर एबीपी न्यूज़ ने इस आचार संहिता को तोड़ा है जो दंडनीय अपराध भी है।

सर्वप्रथम, प्रधानमंत्री का नाम लेकर संबोधित नहीं किया जा सकता है… प्रधानमंत्री जी या आदरणीय प्रधानमंत्री लगाना आवश्यक होता है। रुबिका लियाकत और सुमित अवस्थी PM साहब को ‘मोदी जी’ कहकर संबोधित करते रहे! एक जगह ‘मोदी’ कहकर भी संबोधित किया।

दूसरे, प्रधानमंत्री के बोलते समय बीच में बोलना… यह शिष्टाचार तो बच्चे भी जानते हैं!

तीसरे रुबिका लियाकत का यह प्रश्न कि “मैं आपसे एक मुसलमान की तरह प्रश्न पूछती हूँ”… पत्रकारिता के उसूलों का उल्लंघन था… क्योकि रुबिका लियाकत को इंटरव्यू के लिए अपॉइंटमेंट एक टीवी पत्रकार के रूप में मिला था… न कि एक मुस्लिम एक्टिविस्ट के रूप में।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आप सुप्रीम कोर्ट और अन्य संस्थाओं और फ्रांस के राष्ट्रपति की बात पर विश्वास करेंगे या नहीं? तो सुमित अवस्थी और रुबिका लियाकत ने सामूहिक रूप से कहा कि “कई अखबारों में छपा है कि PMO इस मामले (राफेल) में खुद प्रत्यक्ष निर्देश दे रहा था”…

जब विधिक एजेंसियां सौदे को पाक-साफ ठहरा चुकी हों तो एक निकम्मे अखबार की बगैर साक्ष्य रिपोर्ट का क्या महत्व है? इन बदमाशों की हिम्मत और उद्दंडता तो देखिए…

यदि मोदी जी के अलावा लालू, चंद्रशेखर या शरद यादव जैसा कोई और नेता होता तो यह कथित सेकुलर पत्रकार बगैर पिटे… वापस नहीं लौटते!

अंतिम बात… इंटरव्यू के टेप, प्रसारण से पहले PMO को दिखाने का घोषित नियम है… इंटरव्यू का प्रसारण… बगैर PMO की अनुमति के हो भी गया… और वह हिस्सा एडिट कर उड़ा भी दिया गया… जिसमें दोनो पत्रकारों, एबीपी न्यूज़ और सोनिया परिवार के भ्रष्टाचार की पोल प्रधानमंत्री ने खोली थी!

विश्वास मानिए… ममता अगर PM होतीं तो एबीपी न्यूज़ पर कम से कम एक माह के लिए ताला ज़रूर पड़ जाता। वह किसी कोर्ट इत्यादि की कोई परवाह नहीं करतीं।

मोदी साहेब…. दुर्जन पर सहृदयता मत दिखाइए… अपने लिए नहीं…. इससे देश कमज़ोर होता है…!!

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यवहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति मेकिंग इंडिया (makingindiaonline.in) उत्तरदायी नहीं है। इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार मेकिंग इंडिया के नहीं हैं, तथा मेकिंग इंडिया उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY