पीएम मोदी का इंटरव्यू : भ्रष्ट मीडिया की निर्लज्ज अनैतिकता पर प्रहार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनैतिक विरोधियों और मीडिया (लुट्येन्स) व सोशल मीडिया में उपस्थित उनके कटु आलोचकों द्वारा यह आरोप 2014 से लगता रहा है कि मोदी एक तो अपने आलोचक मीडिया हाउसेज़ व पत्रकारों को साक्षात्कार नहीं देते और जब देते है तो उनका साक्षात्कार लेने वाले व्यक्ति उनसे कटु प्रश्न नहीं पूछते हैं।

यहां तक कि चाहे वह 1 जनवरी 2019 को एएनआई (ANI) की स्मिता प्रकाश को दिया साक्षात्कार हो या रिपब्लिक भारत पर अर्नब गोस्वामी को या कल एबीपी (ABP) पर सुमित अवस्थी और रुबिया लियाकत को दिया साक्षात्कार हो, ये तथाकथित लुट्येन्स ट्रेडमार्क वाले बुद्धिजीवी सबसे पहले यही आरोप लगाते व संदेह का बीज डालते हैं कि मोदी जी को प्रश्न पहले से ही दे दिए जाते हैं।

मैं समझता हूँ कि मोदी जी से मीडिया किस हद तक सहयोग करती है, उसकी वास्तविकता समझने के लिए मोदी जी द्वारा एबीपी को दिया गया साक्षात्कार बहुत महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ है।

मेरे लिए इस साक्षात्कार के प्रसारण ने दो महत्वपूर्ण बिंदुओं को प्रकाशमान किया है और मैं चाहता हूँ इन दोनों ही बिंदुओं को लोग भी समझें।

पहला बिंदु तो यह कि मोदी विरोधी कोई भी मीडिया हाउस पत्रकारिता की अस्मिता को लेकर पूर्णतः निर्लज्ज व धूर्त होता है। वो जहां भारत के प्रधानमंत्री पद की गरिमा को गिराने में कोई संकोच नहीं करता है, वहीं गांधी परिवार के सामने खुद के गिरने को लेकर भी कोई संकोच नहीं करता है।

दूसरा बिंदु यह है कि मेरा दृढ़ता से मानना है कि भारत के प्रधानमंत्री के पद पर ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण भारतीय राजनीति में नरेंद्र मोदी जैसा निर्भीक व स्पष्टवादी राजनीतिज्ञ अभी तक नहीं हुआ है।

मोदी जी को अपने सत्कर्मों व ईश्वरीय शक्ति पर इतना अटल विश्वास है कि वो अपने शत्रुओं और विरोधियों को उनके ही क्षेत्र में अपनी उपस्थिति लिपिबद्ध कराकर, उन पर प्रहार करने से न सिर्फ चूकते नहीं है बल्कि विचलित भी नहीं होते है।

अब आते है कल के साक्षात्कार पर, जिसका प्रसारण एबीपी टीवी चैनल पर कल प्रातः 8 बजे आया था। मेरे लिए शुरू में आश्चर्य इसी बात पर था कि उन्होंने मोदी विरोधी एबीपी चैनल को साक्षत्कार कैसे दिया? लेकिन जब यह पता चला कि सुमित अवस्थी और रुबिया लियाकत को यह साक्षत्कार दिया है तो, मोदी जी द्वारा साक्षत्कार देने का कारण भी मुझे समझ में आ गया।

वैसे तो एबीपी चैनल की कोई विश्वसनीयता नहीं है लेकिन हाल ही में एबीपी में आये यह दोनो, सुमंत और रुबिया की विश्वनीयता अभी तक बनी हुई है। दोनो ही राष्ट्रवादी विचारधारा से प्रभावित लगते हैं लेकिन फिर भी वे तटस्थता का निर्वाह करते हैं।

कल प्रातः प्रसारित साक्षात्कार का पुनः प्रसारण रात को 9 बजे भी हुआ और इस को भी मैंने, परिवार के अन्य सदस्यों जिन्होंने प्रातः का प्रसारण नहीं देखा था, के साथ फिर से देखा। इस प्रसारण को देख कर मैं अचंभित रह गया! इस प्रसारण में एक अंश ऐसा था जो प्रातः के प्रसारण में मुझे दिखा ही नहीं था।

पहले मुझे लगा कि शायद मेरी स्मृति मुझसे खेल कर रही है लेकिन यह इतना महत्वपूर्ण अंश था कि मेरा हृदय इस बात को स्वीकार ही नहीं कर पा रहा था कि यह अंश प्रातः प्रसारण में दिखाया गया था।

मैंने जब इस प्रसारण को लेकर ट्विटर पर ढूंढा तो बात साफ हो गयी कि एबीपी ने प्रधानमंत्री के साक्षात्कर के प्रातःकालीन प्रसारण में काट छांट की थी। ऐसा माना जा रहा है कि पूरा साक्षात्कार न दिखाने को लेकर स्वयं मोदी जी ने आक्रोश व्यक्त किया और तब मजबूरी में एबीपी को पूरा साक्षत्कार, अपने पुनः प्रसारण में दिखाना पड़ा था।

आखिर क्या था, जिसे एबीपी को संपादित करना पड़ा जो बाद में दिखाना पड़ा था?

प्रातः प्रसारण में एबीपी ने मोदी जी के वक्तव्य का वह अंश काट दिया था, जिसमें उन्होंने मीडिया और पत्रकारों पर आरोप लगाया था कि वे झूठ को प्रसारित करते है और गांधी परिवार से प्रश्न करने का साहस नहीं रखते है।

वो बार बार समस्त पत्रकार जगत को उनकी इस कायरता को लेकर रगड़ रहे थे। जब मोदी जी सुमित से उन लोगों की मजबूरी को लेकर प्रश्न कर रहे थे वे बेहद आक्रोशित व आक्रामक थे।

इसके बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली की प्रेस कांफ्रेंस का मोदी विरोधी मीडिया द्वारा ब्लैकआउट किये जाने पर प्रश्न उठाया, और खुद एबीपी चैनल पर, कैमरे की तरफ देखते हुये, पक्षपाती होने का आरोप लगाया। उनको इस बात का अंदेशा था कि चैनल इसको नहीं दिखायेगा इसलिये उन्होंने कैमरे को सीधे सम्बोधित करते हुए एबीपी के मालिकों व संपादकों को आरोपित किया।

इस पूरे घटनाक्रम से मेरे द्वारा दोनो इंगित बिंदुओं को स्पष्टता मिल जाती है। एक यह कि भारत का मीडिया न सिर्फ अनाचारी है बल्कि भ्रष्ट तन्त्र के कीचड़ में लिपटा इतना निर्भीक हो गया है कि भारत के प्रधानमंत्री के साक्षात्कार को संपादित करने की धृष्टता करने में उसे कोई संकोच नहीं होता है।

यहीं पर, मोदी जी के दृढ़, निर्भीक व शत्रुहंता चरित्र को और प्रकाश मिला है। भारत में क्या कोई राजनीतिज्ञ हुआ है जो चुनावी वातावरण में मीडिया को लताड़े? उनकी काली करतूतों और उनके पक्षपाती चरित्र को लेकर, प्रश्न खड़ा करे?

मेरा मानना है कि मोदी जी ने एबीपी चैनल द्वारा उनके विरुद्ध विषवमन करने के बाद भी, साक्षत्कार लेने वाले पत्रकारों की निष्ठा पर विश्वास कर, यह साक्षात्कार दिया था। उन्होंने तब ही यह मन बना लिया था कि एबीपी में माध्यम से सभी लुट्येन्स के लोगों को भारत की जनता के सामने नंगा करेंगे।

यह है मोदी जी की शत्रुओं और विरोधियों के घर में घुस कर प्रतिघात करने की क्षमता व निडरता। उन्हें मालूम है कि अभी लगभग 2 महीने चुनाव होने में है और उनके द्वारा भ्रष्ट मीडिया पर किये गए इस प्रहार से तिलमिलाये मीडिया वाले व पत्रकार, उनके विरुद्ध खुल के विषवमन व कलंकित करेंगे। इस सब के बाद भी मोदी जी ने भ्रष्ट मीडिया को न सिर्फ लज्जित किया है बल्कि ललकारा भी है।

आखिर यह कौन कर सकता है? यह वही कर सकता है जिसे भारत की जनता पर विश्वास हो। यह वही कर सकता है जिसे अपने कर्मो और दायित्वों पर विश्वास हो। यह वही कर सकता है जिसे माँ भारती के कपाल पर श्रेष्ठ भारत अंकित करने के लिये नियति ने चुना हो।

भारत की मीडिया, तथाकथित बुद्धिजीवी व कांग्रेस-वामी इकोसिस्टम को यह भले ही नहीं मालूम हो लेकिन भारत की जनता को मालूम है कि वे काल के उस खण्ड के वासी हैं जहां भारत की अस्मिता, तेज़ व शक्ति के पुनर्स्थापना का संकल्प नरेंद्र मोदी द्वारा लिया जा चुका है और उसने बिना एक भी मत डाले, नरेंद्र मोदी को अपना प्रधान चुन लिया है।

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