मोदी सरकार की नीति से आर्थिक अराजकता के द्वार पर खड़ा पाकिस्तान

जब से 2014 में नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री बने है तब से कट्टर राष्ट्रवादी, मोदी की पाकिस्तान नीति को लेकर सबसे ज्यादा आक्रोशित रहे हैं।

हालांकि बालाकोट पर हुये हवाई आक्रमण के बाद यह निष्प्रभावी हुआ है लेकिन मैं शुरू से ही कहता आया हूँ कि मोदी आपकी तरह हिसाब करने में विश्वास नहीं रखते हैं।

नरेंद्र मोदी व्यापारी मानसिकता के कट्टर राष्ट्र प्रेमी है और वे बिना खुद का कोई नुकसान किये, दूसरे का नुकसान किये जाने पर विश्वास करते हैं।

अपने इस कार्यकाल में मोदी ने, पूर्व की परंपरागत नीतियों को बदलकर, विदेश नीति व रक्षा नीति को पाकिस्तान केंद्रित न रख, उसे चीन केंद्रित किया है।

इसका अर्थ यह नहीं है कि मोदी सरकार के पास को पाकिस्तान नीति ही नहीं थी। उन्होंने पाकिस्तान का स्थायी समाधन करने के लिए वैश्विक सामरिक समीकरणों में बदलाव, आक्रमक कूटनीति व स्वयं भारत को आंतरिक रूप से आर्थिक रूप से मज़बूत कर उसे विश्व की सभी शक्तियों द्वारा सर्वग्राह्य बनाने पर ज़ोर दिया है।

आज जब मोदी भारत की जनता के सामने 2019 में फिर से और भी ज़्यादा सीट जीतकर पुनः वापसी की राह पर है तब संतोष है कि मोदी ने जिस अपरंपरागत नीति के माध्यम से पाकिस्तान को बर्बाद करने के लिए व्यूहरचना की थी वह अपने परिणाम देने लगी है।

नरेंद्र मोदी पाकिस्तान को विश्व में अलग थलग करने व उसको पाकिस्तान के अंदर ही आर्थिक रूप से खोखला करने के लिए जो मेहनत की थी, वह अब रंग दिखाने लगी है।

पाकिस्तान जिस आर्थिक चक्र में फंस चुका है उस पर आगे विस्तार से लिखूँगा लेकिन एक छोटी झलकी के रूप में पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरेशी का पत्रकारों को दी गई स्वीकारोक्ति से परिचय करा रहा हूँ।

पाकिस्तानी विदेश मंत्री जब आज पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति की भयावहता के बारे में बता रहे थे तो उनके चेहरे से हवाइयां उड़ रही थी। इसमें कोई शक नहीं है कि राष्ट्र दिवालिया होने की तरफ बढ रहा है यह स्वीकार करना सबसे दुरूह कार्य होता है लेकिन यह सब उसके सबसे बड़े शत्रु के कारण हो रहा है यह स्वीकार करना तो मृत्यु के समान कष्ट देने वाला होता है।

समझा जा सकता है कि कुरेशी साहब के दिल पर क्या गुज़र रही होगी जब उन्होंने बताया कि पाकिस्तान जब से फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की ग्रे लिस्ट में आया है तब से पाकिस्तान को सिर्फ ग्रे लिस्ट में आने के कारण 10 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। अब हम ब्लैक लिस्ट में डाल दिये गए तो उससे होने वाले नुकसान का आंकलन करवा रहे हैं। अल्लाह न करे हम ब्लैक लिस्ट हों। हम ग्रे लिस्ट से निकलने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन भारत हमको ब्लैक लिस्ट की तरफ धकेल रहा है।

मोदी जी 2014 से पाकिस्तान को खींचते खींचते दिवालिया होने की कगार पर ले आये हैं और मुझे विश्वास है 2019 की पारी की जब शुरुआत करेंगे तो वे पाकिस्तान को उस कगार से धक्का दे कर, पाकिस्तान को आर्थिक अराजकता व आतंकवाद में डाल देंगे।

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