प्रधानमंत्री ने की भारत की सुरक्षा, समृद्धि और सम्मान की वृहद व्याख्या

बीती 28 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेरठ से चुनाव अभियान का शंखनाद के समय दिए गए भाषण को हर भारतीय को अवश्य सुनना चाहिए।

अपने सम्बोधन में प्रधानमंत्री ने भारत की सुरक्षा, समृद्धि और सम्मान की अद्भुत, निराली एवं वृहद व्याख्या की है।

उनके अनुसार हर भारतीय को सुरक्षा देश के दुश्मनों से, सुरक्षा आतंकवाद से, सुरक्षा गुंडागर्दी से, सुरक्षा भ्रष्टाचारियों से, सुरक्षा बीमारी से मिलनी चाहिए।

समृद्धि साधनों और संसाधनों की, समृद्धि ज्ञान और विज्ञान की, समृद्धि संस्कृति और विचार की, समृद्धि हमारे आचार और व्यवहार की होनी चाहिए।

सम्मान श्रम का, सम्मान काम का, सम्मान बेटियों का, सम्मान हर वर्ग का, सम्मान देश के मान का अभिमान का होना चाहिए।

फिर उन्होंने कहा कि जो लोग 70 सालों में देश की जनता का बैंक खाता नहीं खुलवा पाए वो आज देश की जनता के खाते में पैसा डालने की बात करते हैं।

लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह कही कि ये लोग (अभिजात्य वर्ग; कांग्रेसी; वंशवाद वाली पार्टियां) भारत को हमेशा कमज़ोर बनाकर रखना चाहते हैं। इन लोगों की राजनीति तभी चलती है जब देश कमज़ोर रहे।

मैंने अपने कई लेख इसी विषय पर लिखे थे कि भारत के अभिजात्य वर्ग ने हमारी प्रगति की राह में जानबूझकर बाधाएं खड़ी की। जिन्हें जनता से खतरा था उन्होंने देश में यात्रा और संचार के साधन विकसित ही नहीं होने दिए।

इन लोगों ने देश की जनता को जानबूझकर गरीब रखा, जिससे वे गरीबी हटाने के नारे के नाम पर वोट लेते रहें और गरीबी हटाने के नारे और लॉलीपॉप के नाम पर अपने परिवार और खानदान को राजनैतिक और आर्थिक सत्ता के शीर्ष पर बनाए रखें।

शिक्षा के क्षेत्र में मध्यम वर्ग को उलझा दिया। पहले तो आम आदमी बच्चों के एडमिशन को लेकर परेशान रहेगा, फिर उस शिक्षा को होने वाले व्यय को लेकर के चिंतित रहेगा। उसके बाद उनके बाल बेचैनी में सफेद होंगे कि उन बच्चों को किसी इंजीनियरिंग या मेडिकल कॉलेज या किसी विख्यात विश्वविद्यालय में एडमिशन मिल जाए।

उसके बाद वही वर्ग अपने बच्चों की नौकरी के लिए चिंतित रहेगा. और जब तक बच्चे कुछ कमाने लायक होंगे तब तक उस मध्यम वर्ग की प्रोडक्टिव जिंदगी का सर्वाधिक समय निकल जाएगा और इस साइकिल में पूरी ज़िंदगी निकल जाती है।

प्रधानमंत्री मोदी अभिजात्य वर्ग का क्रिएटिव डिस्ट्रक्शन या रचनात्मक विनाश कर रहे है। इस वर्ग के द्वारा बिछाई गयी भ्रष्ट संरचना के रचनात्मक विनाश के बगैर भारत की प्रगति संभव नहीं है। निर्धन लोगों का आर्थिक सशक्तिकरण, देश को ट्रांसपोर्ट और संचार के माध्यम से जोड़ने की प्रक्रिया इस ‘रचनात्मक विनाश’ का एक अभिन्न अंग है।

भारत की मिट्टी पर पले-बढ़े, शिक्षित, और उसी धरती पर संघर्ष करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न को समझिए और उसे समर्थन दीजिए।

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