दिग्विजय जी, क्यों संघ आपके विचारों को पसंद नहीं करता?

बयानवीर दिग्विजय सिंह का कहना है कि मैं पक्का हिन्दू हूं फिर भी आरएसएस मुझे नापंसद क्यों करता है? मेरे प्रति दुर्भावना क्यों रखता है? दिग्विजय जी आपने संघ को समझा ही नहीं, वरना आप ऐसी टिप्पणी नहीं करते।

संघ किसी व्यक्ति विशेष से कोई दुर्भावना नहीं रखता। हाँ, आपके विचारों को, आपकी विचारधारा के प्रति असहमति या दुर्भावना हो सकती है संघ की।

सर्वप्रथम मैं स्पष्ट कर दूं आपका हिन्दू होना ही पर्याप्त नहीं है कि संघ आपको स्वीकार करे। संघ कभी जात पात की बात नहीं करता। यहां सभी को उसके प्रथम नाम में जी लगा कर पुकारा जाता है। संघ हिन्दू नहीं हिंदुत्व के बात करता है।

हिंदुत्व ज़िंदगी जीने का एक तरीका और एक मनोदशा है। हिंदुत्व को किसी धर्म से नहीं जोड़ना चाहिए। ये मेरा ही विचार मात्रा नहीं है बल्कि सुप्रीम कोर्ट के 1995 के एक निर्णय में इसका उल्लेख किया गया है।

भारत के उच्चतम न्यायालय के अनुसार हिन्दुत्व कोई उपासना पद्धति नहीं, बल्कि एक जीवनशैली है।

वीर सावरकर ने हिन्दुत्व और हिन्दू शब्दों की जो परिभाषा दी थी वह यह है कि हिन्दू वो व्यक्ति है जो भारत को अपनी पितृभूमि और अपनी पुण्यभूमि दोनों मानता है। इसलिये आपको नापसंद किया जाता है। आपने ऐसा कुछ नहीं किया जिससे एक हिन्दू या हिंदुत्व आप पर गर्व कर सके। संघ द्वारा आपको पसंद किया जाना तो दूर की बात है।

चलिये शुरू करते हैं क्यों आपका चाल और चरित्र संघ के चाल और चरित्र से मेल नहीं खाता।

  1. संघ के पूर्णकालिक प्रचारक तो विवाह तक नहीं करते ताकि वे अपना पूरा समय देश व समाज निर्माण को दे सकें। आप पर में कोई व्यक्तिगत टिप्पणी करना नहीं चाहता।
  2. आप को पसंद नहीं किया जाता क्योंकि आप महिलाओं का कितना सम्मान करते हैं यह आपकी ही पार्टी की वरिष्ठ नेत्री मीनाक्षी नटराज जी पर आपकी टिप्पणी से विदित होता है। आप ने इन्हें “टंच माल” कह कर संबोधित किया था। याद ही होगा आपको।
  3. एक टिप्पणी में आपने कहा था कि अरविंद केजरीवाल व राखी सावंत में एक समानता है कि दोनों एक्सपोज़ करते हैं। पर उनके पास दिखाने को कुछ नहीं है। आप जैसे वरिष्ठ नेता को ऐसी टिप्पणी शोभा नहीं देती।
  4. आरएसएस में आपको नापसंद किया ही जाना चाहिए क्योंकि आप ने कहा था कि संघ बम बनाता है और इसे चलाने की ट्रेनिंग देता है। आधारहीन बयान। आप अपनी बात को सिद्ध करने के लिए वीडियो क्लिप दिखाने वाले थे। पर दिखा न सके।
  5. आपने तो देश भर के हिंदुओं की श्रद्धा के केंद्र भगवान राम को भी नहीं छोड़ा। याद कीजिये बीजेपी के नेता राघवजी वाले मामले पर बोलते हुए आपने कहा था,” बच्चा बच्चा राम का राघवजी जी के काम का।” बेहद घटिया बयान।
  6. आप तो सर्वोच्च न्यायालय का भी मजाक उड़ा चुके हैं।

और भी बहुत कुछ है आपके बारे में कहने को, लिखने को। शायद इतना पर्याप्त है यह सिद्ध करने के लिए कि आपके चाल, चरित्र व विचार संघ के मेल खा ही नहीं सकते।

जय हिंद जय भारत माता।

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स्त्रियों के कई रूप में से नौ तो शक्ति स्वरूपा ही हैं, अन्नपूर्णा भी है, लक्ष्मी और सरस्वती भी है…
ये सारे रूप इस भारतभूमि पर देख पाने का सौभाग्य जिसे प्राप्त होता है उसे फिर कहीं किसी स्वर्ग की तलाश नहीं होती, न ही 72 हूरों को पाने की चाह… आप किसी एक स्त्री को भी प्रेमपूर्ण और सम्मान से देखिये आपको सारे रूप उसमें नज़र आएँगे… बशर्ते उसकी लाज के गहने की रक्षा करने का भाव आप में जगे…

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