ऐसे लोग पत्रकार कहलाते हैं, प्रतिष्ठा भी पाते हैं

कितने नीचे गिरेंगे यह मीडिया वाले, इसकी कोई लिमिट नहीं दिखाई देती। यह कोलकाता से प्रसिद्ध होनेवाले ‘द टेलीग्राफ’ का आज 28 मार्च 2019 का मुख पृष्ठ है।

‘मिशन शक्ति’ को नरेंद्र मोदी ने भारत की उपलब्धि बताया है, मोदी सरकार की नहीं।

और राष्ट्र को अपने संबोधन में मोदी जी ने यह भी नहीं कहा कि इसे कॉंग्रेस सरकार ने 2012 से सड़ाये रखा था और हम ये परीक्षण अब न करते तो आगे चलकर इस क्षमता को हासिल करने से ही बड़े देशों द्वारा रोक दिए जाते।

ठीक उसी तरह जैसे परमाणु विस्फोट की क्षमता तो डॉ होमी जहांगीर भाभा ने ही विकसित की थी लेकिन नेहरू ने परीक्षण की अनुमति नहीं दी थी।

विचारणीय है कि शास्त्रीजी की रहस्यमयी मृत्यु (11 जनवरी 1966) के तेरह ही दिन बाद, 24 जनवरी 1966 को डॉ होमी भाभा एक हवाई जहाज दुर्घटना के शिकार हुए।

आज किम जोंग उन का फोटो दिखाकर मोदी जी को उपहासात्मक लहजे में राकेट मैन कहा जा रहा है। क्या औचित्य है किम जोंग उन का फोटो दिखाने का, अगर आप को इस परीक्षण की आलोचना करनी ही है तो तथ्यों पर करनी चाहिए।

ऐसे कोई तथ्य हैं तो अवश्य सामने लाएं और आलोचना करें, यह आप का कर्तव्य भी है। लेकिन क्या किम जोंग उन की फोटो दिखाकर केवल मखौल उड़ाना, गंभीर तो छोड़िये, पत्रकारिता भी कहलायेगी?

वैसे इस परीक्षण का राष्ट्र के लिए क्या महत्व है यह तो समझ आया है, ख़ास कर जिनीवा में जो ट्रीटी बनने जा रही है उसके परिप्रेक्ष्य में, क्योंकि भारत ने उस ट्रीटी में सदस्य होने के लिए अपना सशक्त दावा पेश किया है।

इस बात का महत्व अगर ये लोग नहीं समझते तो उनको पत्रकारिता की क्या समझ है, इस पर स्वाभाविक ढंग से बड़ा प्रश्नचिह्न उभरता है। सवाल यह भी उठता है कि ये लोग पत्रकारिता भी कर रहे हैं या केवल मोदी विरोधी प्रचार, जिसमें ये देश विरोधी भी हो जाएं तो भी उन्हें कोई हर्ज नहीं?

साथ साथ जो दूसरी हेडलाइन है Crow but give credit to predecessors too – डींग मारिये लेकिन पूर्ववर्तियों को भी श्रेय दीजिये – किस बात का श्रेय दें? क्षमता विकसित करने के बावजूद ठन्डे बस्ते में रखने का? ये सत्य है, लेकिन मोदी जी ने ऐसा तो कहीं अपने राष्ट्र से संबोधन में कहा तो नहीं।

तो फिर? क्या कहना चाहते हैं ये लोग? क्या किसी काँग्रेसी ने लिखवाई है यह हेडलाइन?

यह पहली बार नहीं जो ‘द टेलीग्राफ’ ऐसी टुच्ची हरकत पर उतरा है। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने रोहित वेमुला मामले में संसद में जो ओजस्वी भाषण दिया था बहुतों को याद होगा। उस पर यही ‘द टेलीग्राफ’ ने क्या हेडलाइन लिखी थी, बता नहीं, दिखा रहा हूँ, स्वयं देख लीजिये इस लेख के साथ जोड़ा हुआ दूसरा चित्र।

क्या कहना है? और ऐसे लोग पत्रकार कहलाते हैं, प्रतिष्ठा भी पाते हैं।

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