Mission Shakti : भारत की स्पेस स्ट्राइक

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने एक बार फिर देश के नाम संदेश दिया। देश के नाम इस संदेश को लेकर कई अटकलें लगाई जा रही थीं, और सभी अटकलों को ख़त्म करते हुए प्रधानमंत्री ने देश को बहुत बड़ी खुशखबरी दी।

भारत ने अंतरिक्ष मे लो अर्थ ऑर्बिट यानी LEO में एक सैटेलाइट को मार गिराया। यह ऑपेरशन मिशन शक्ति के तहत हुआ। डीआरडीओ द्वारा बनाये गए इस एन्टी सैटेलाइट मिसाइल ने यानी A सैट मिसाइल ने इस सैटेलाइट को मार गिराया।

यह कहना मुश्किल है कि वह सैटेलाइट किस प्रकार से नज़र रख रहा था, मगर यदि उसे मार गिराया है तो यह ज़ाहिर है कि भारत के ऊपर नज़र बनाये था।

भारत अब विश्व मे चीन, रूस और अमेरिका के बाद चौथी ऐसी महाशक्ति बन गया है जिसने अंतरिक्ष मे ऐसा कारनामा कर दिखाया। मोदी जी ने इसे किसी भी संधि या समझौते का उल्लंघन न बताते हुए शांति की बात की है। एक टीवी न्यूज चैनल पर वरिष्ठ वैज्ञानिक पी के घोष ने पूछे जाने पर कहा कि यदि इसे स्पेस (अंतरिक्ष) स्ट्राइक भी कहेंगे तो कुछ ग़लत नहीं होगा।

राष्ट्र के नाम उनके संबोधन में 10 मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  1. देश के नाम इस संदेश में उन्होंने एक कठिन ऑपरेशन की जानकारी दी।
  2. उन्होंने देश को मिशन शक्ति के बारे में बताया।
  3. A सैट मिसाइल (एन्टी सैटेलाइट मिसाइल) ने लो अर्थ ऑर्बिट यानी (LEO) में लाइव सैटेलाइट को मार गिराया।
  4. अंतरिक्ष महाशक्ति बनने वाला चौथा देश बना भारत।
  5. पीएम ने कहा- मैं ऐसे भारत की कल्पना करता हूँ जो अपने समय से दो कदम आगे की सोच सके।
  6. भारत ने मिशन शक्ति के तहत लाइव सैटेलाइट पृथ्वी से 300 किमी के दायरे में मार गिराया।
    तीन मिनट के भीतर इस मिशन को पूरा किया गया।
  7. प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारा मकसद शांति का माहौल बनाना है, युद्ध का माहौल नहीं।
  8. अमेरिका, रूस और चीन के बाद चौथा देश बना भारत।
  9. मिशन में किसी संधि या समझौते का उल्लंघन नहीं।
  10. प्रधानमंत्री ने डीआरडीओ के सभी वैज्ञानिकों को बधाई दी।

क्या है स्पेस स्ट्राइक? समझें आसान भाषा में

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने इससे पहले भी कई बार देश को संबोधित किया है और देश के नाम संदेश दिए हैं। नोटबन्दी उनमें से एक विशेष अवसर रहा है। इस बार जब देश के नाम संदेश देने वाले थे प्रधानमंत्री तो काफी अटकलें लगाई जा रही थीं। मगर उन सभी अटकलों को खारिज करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने इस बार देश के नाम संबोधन में सबसे अलग बात बताई। उन्होंने बताया कि देश के लिए आज गौरव का दिन है क्योंकि आज देश अंतरिक्ष महाशक्ति बन गया है। मगर वह महाशक्ति कैसे बना? आइए समझते हैं आसान भाषा में:

प्रधानमंत्री के वक्तव्य को सुनेंगे तो पता लगेगा कि यह एक मिशन था, कोई अटैक नहीं। अपने वक्तव्य में उन्होंने यह भी कहा कि यह लक्ष्य पूर्वनिर्धारित था। चुनाव को मद्देनजर रख के ही इस मिशन को रूप दिया गया, ऐसा कहना ग़लत होगा।

भारत ने बीते बुधवार यानि 27 मार्च को अंतरिक्ष में एक उपग्रह मार गिराया। भारत ने अपनी एन्टी मिसाइल यानि A- SAT से एक उपग्रह लो अर्थ ऑर्बिट यानि LEO कक्ष में मार गिराया। जिसका अर्थ है पृथ्वी की केंद्र से 28,000 किलोमीटर के दायरे में एक उपग्रह को मारा। ग़ौर करने की बात यह है कि इसी क्षेत्र में हज़ारों सैटेलाइट पृथ्वी के चक्कर लगा रहे हैं। इनमें से किसी एक सैटेलाइट को चुनना और उस पर निशाना लगाना काफी मुश्किल काम है, क्योंकि ये उपग्रह भी करीब 7.8 किमी प्रति सेकंड की रफ़्तार से चक्कर लगाता है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने यह भी कहा कि हमारा मकसद किसी भी देश के संधि या समझौते को तोड़ना नहीं है। इसके अतिरिक्त हम अंतरिक्ष में ख़तरनाक हथियार भेजने के पक्ष में भी नहीं हैं। यानि मतलब साफ़ है कि हमने किसी देश के उपग्रह पर इरादतन हमला नहीं किया।

इसके बाद मोदी जी ने एक बात और कही जिसमें उन्होंने यह कहा कि हमारे इस ऑपेरशन शक्ति का मकसद केवल देश की सुरक्षा तय करना था, जिससे यह भी पता चलता है कि यह एक टेस्ट था।

अब टेस्ट तो हम केवल उड़ा कर भी कर सकते थे, मगर यह जानना भी आवश्यक था कि क्या हमारे मिसाइल उस रफ़्तार से सैटेलाइट को नष्ट कर सकेंगे जिस रफ़्तार से सैटेलाइट अंतरिक्ष में हमारे देश के ऊपर नज़र गड़ाए रहते हैं। इसके लिए यह जांच करना आवश्यक था।

अब इससे संदेश सारे विश्व में यह पहुँचा है कि भारत ऐसा देश है जिस पर यदि हमने नज़र गड़ाने की कोशिश की तो वह हमला कर सकता है। इस मिशन को पूरा करने में केवल 3 मिनट लगे, पृथ्वी से 300 किलोमीटर दूर अंतरिक्ष में जो देश केवल 3 मिनट में हमला कर सकता है, वह कल इसे दोहरा भी सकता है।

पीएम मोदी ने इसके माध्यम से देश की जनता को भी यह संदेश दे दिया कि वे अब और भी ज़्यादा सुरक्षित हैं। यदि अंतरिक्ष से कोई उनकी लोकेशन जानने का प्रयास भी करता है तो उसपर हमला करने में भारत देरी नहीं करेगा।

इस बीच एक और जानकारी आ रही है कि भारत सन् 2012 में भी यह हमला कर सकता था, मगर उसने उस समय यह हमला किया नहीं। उस समय के डीआरडीओ के चीफ रहे वी के सारस्वत ने यह जानकारी दी कि हम उस समय भी सक्षम थे मगर सरकार ने कभी इजाज़त नहीं दी। यदि हमने उस समय इसकी इजाज़त दे दी होती, देश दुनिया में यह संदेश चला गया होता कि भारत इस मारक क्षमता से लैस है, और पठानकोट एयरबेस का हमला बचाया जा सकता था।

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