बाज़ार सिद्धांत, विचार, सनक और ज़िद नहीं, बल्कि तथ्य और सत्य देखता है

टी वी का बाज़ार, सर्वे बाज़ार, ज्योतिष बाज़ार और सट्टा बाज़ार भी भाजपा की ही सरकार बना रहा है। सट्टा बाज़ार तो जैसे क्लीन स्वीप दे रहा है भाजपा को।

बाज़ार किसी भी का हो, वह सच देखता है, भाव देखता है, फ़ायदा देखता है, घाटा नहीं। सिद्धांत, विचार, सनक और ज़िद नहीं। बल्कि तथ्य और सत्य देखता है।

आप अपनी वैचारिक चिढ़ में जिस-तिस को भाजपाई कह कर गाली देते रहिए, सेना को बलात्कारी बताते हुए सर्जिकल स्ट्राइक से एयर स्ट्राइक तक पर संदेह करते हुए सबूत मांगते रहिए।

इमरान खान को शांति दूत बता कर पाकिस्तान की मिजाजपुर्सी करते हुए मुस्लिम वोट बैंक के लिए शीर्षासन करते रहिए। पर देश की एक बड़ी आबादी ने आप को ठेंगा दिखाते हुए भाजपा को स्वीकार कर लिया है। आप की इस अति ने भाजपा को बुलंदी पर पहुंचा दिया है।

सोचिए कि सट्टा बाज़ार में एक रुपए पर नरेंद्र मोदी का भाव आज की तारीख़ में 15 पैसा है और राहुल गांधी का 25 रुपया है जब कि गठबंधन का 5 रुपया।

गरज यह कि कांग्रेस इस चुनाव में भी रिवाईव होती नहीं दिख रही है, फ़िनिश होने की तरफ बढ़ रही है।

सपना चौधरी जैसी गायिका भी कांग्रेस में सांस लेने को तैयार नहीं है। कांग्रेस कहती है सपना कांग्रेस में। कुछ ही घंटे में सपना कहती है, कोई कांग्रेस नहीं। कांग्रेस को सफाई देते नहीं बनती।

बीते 2014 के चुनाव में मणि शंकर अय्यर ने अपनी ज़हरबुझी जुबान से कांग्रेस के ताबूत में कील ठोंकी थी, अब की पूरी कांग्रेस ही सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक के सबूत मांग-मांग कर मुस्लिम वोटर को प्रसन्न करने में पस्त हो चुकी है।

रही सही कसर, सिद्धू और सैम पित्रोदा के अहंकार में तर ज़हरबुझी जुबान ने पूरी कर दी है। प्रियंका की संजीवनी भी खोटी निकल गई। पहनी हुई माला उतार कर शास्त्री जी की प्रतिमा को पहनाने की नीचता ने प्रियंका की तस्वीर को मैली बना दिया है।

‘चौकीदार चोर है’ का नारा अब कांग्रेस के गले की हड्डी बन गया है। चौकीदार कौम तो इस बात से नाराज़ है ही, जनता भी आप को चोर बता रही है।

राहुल गांधी की लाखों की संपत्ति से करोड़ो रुपए की कमाई भी एक चमत्कार है। यह तो वैसे ही है जैसे एक समय आय से अधिक संपत्ति की सफाई में लालू यादव कहते थे, दूध बेच कर यह संपत्ति अर्जित की है। नतीज़तन इन दिनों जेल में दूध पी रहे हैं।

अब किसानों की इस मुश्किल की घड़ी में, जहां किसान बदहाल हैं, क़र्ज़ में डूबे हैं, आत्महत्या पर आमादा हैं, वहीँ राहुल किसानी से, किराए से करोड़ो कमाते बताए जा रहे हैं। गुड है!

गरीबों को उज्ज्वला, शौचालय, आवास, किसान सम्मान योजना आदि को आप नज़रंदाज़ करते रहिए, यह योजनाएं ज़मीनी स्तर पर न सिर्फ़ बोल रही हैं, भाजपा के वोट में कनवर्ट होती दिख रही हैं।

आप के आंख बंद कर लेने से तथ्य नहीं बदल जाएंगे। शुतुरमुर्ग की तरह रेत में सिर धंसाए रहिए। राहुल गांधी की जय-जयकार में अपने को खर्च करते रहिए।

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