अभी भी चाहिए सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत!

कुछ लोग अभी भी सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत माँग रहे हैं, इसलिए इस मामले में आपसे एक-दो बातें कहना चाहता हूँ –

  • उनके जैसे दो-चार लोगों के अलावा पूरे देश को अपनी सेनाओं पर और अपने सैनिकों की देशभक्ति पर पूरा भरोसा है।

भारतीय सेना कह चुकी है कि हमने 300 आतंकी मारे हैं और उनका अड्डा उड़ा दिया है। पाकिस्तानी सेना इस बात का सबूत मांग रही है।

अब अपने बारे में आप तय कर लीजिए कि आपको भारतीय सेना के साथ खड़ा होना है या पाकिस्तानी सेना के साथ।

  • इस बात से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि सेना ने आतंकी मारे हैं या पेड़ गिराए हैं। ज़रूरी बात ये है कि सेना ने और वर्तमान सरकार ने भी पाकिस्तान को और पूरी दुनिया को ये बता दिया है कि भारत अब पहले वाला भारत नहीं रहा।

ज़रूरत पड़ी तो हम सिर्फ एलओसी ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय सीमा भी पार करेंगे और घर में घुसकर मारेंगे। दुनिया के दबाव की हम चिंता करने वाले नहीं है। मेरे लिए इतना सबूत भी काफी है।

  • ये याद रखिये कि 1971 युद्ध के बाद इंदिरा की सरकार ने पाकिस्तान के 90 हज़ार सैनिक बिना शर्त छोड़ दिये थे। लेकिन हमारे जो सैनिक उनके कब्जे में थे, उनकी कोई चिंता नहीं की गई। वो सालों तक वहां की जेलों में सड़ते रहे, उनका क्या हुआ ये आज तक किसी को पता नहीं।

दूसरी तरफ इस बार पाकिस्तान को हमारा पायलट दो दिन में छोड़ना पड़ा। ये समझ लीजिए कि मोदी सरकार ने कुछ न कुछ तो ऐसा किया होगा, जिसके कारण इतना फर्क आया है। इससे बड़ा सबूत आपको क्या चाहिए?

जिसको ये बात समझ आती है, उसको सबूत की ज़रूरत नहीं लगती। सबूत सिर्फ वही लोग मांग रहे हैं जिनको भारतीयों से ज्यादा आतंकवादियों की चिंता है, जो इतने सालों से सेना को अत्याचारी बताते रहे हैं और आतंकवादियों के मानवाधिकारों की बात करते रहे हैं। जिनकी रोजी-रोटी आतंकवादियों और भारत-विरोधियों की मेहरबानी से ही चल रही थी, उनको तकलीफ होना स्वाभाविक है। लेकिन उनके बहकावे में आप मत भटकिये। अपनी सेना, अपनी सरकार और अपने देश के साथ खड़े रहिये।

यह बात भी फिर से दोहरा देता हूँ कि मैं पाकिस्तान के खिलाफ नहीं हूँ, मैं आतंकवाद के खिलाफ हूँ। आतंकवाद जहाँ हो, वहाँ जाकर उसे कुचला जाना चाहिए। इसके लिए जो भी करना ज़रूरी हो, वो सब करना सही है और अपनी सेना और सरकार वही कर रही है। मुझे उसका असर दिख रहा है, इसलिए मुझे इसका कोई सबूत नहीं चाहिए। जिसको चाहिए वो मांगते रहें, लेकिन कभी नहीं दिया जाएगा और देना भी नहीं चाहिए।

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