अबकी बार 2014 से बड़ी होगी सुनामी

2000 के सिडनी ओलंपिक्स में खेल जगत का बच्चा बच्चा जानता था कि 1500 मीटर की दौड़ तो मोरक्को का हीशम एल गेरूज़ ही जीतेगा।

और ये कोई खामख़याली नहीं थी। ऐसा सोचने के ठोस आधार थे… 5 साल पहले, जब विश्व जूनियर खिताब जीत के हीशम एल गेरूज़ ने एथलेटिक्स में अपना परचम लहराया तो फिर वो झंडा कभी झुका नहीं।

1996 में अपना पहला एटलांटा ओलंपिक जब वो दौड़ रहा था तभी लोग मान रहे थे कि विश्व चैंपियन नूरुद्दीन मोरसेली के साथ कड़ा मुक़ाबला होगा।

तब उसकी उम्र सिर्फ 19 साल थी… अनुभव बिल्कुल नहीं था… दुर्भाग्य से उस दिन वो भीड़ में उलझ के लड़खड़ा के गिर गया। एक ओलंपिक पदक उसके हाथ से निकल गया… पर उसके ठीक एक ही महीने बाद उसने उस चूक की कसर निकाल दी और एक दौड़ में मोरसेली को हरा दिया।

उसके बाद अगले 4 साल हीशम एल गेरूज़ कोई रेस नहीं हारा और उसने 3:26 का ऐसा विश्व रिकॉर्ड बनाया जो आज 20 साल बाद भी कायम है।

फिर आया 2000 का सिडनी ओलंपिक। उस समय विश्व चैंपियन एल गेरूज़ 1500 मीटर का बेताज बादशाह था। वो जो कभी कोई रेस नहीं हारा था।

दौड़ हुई और अंतिम क्षणों में केन्या का Noah Ngeny गेरूज़ से आगे निकल आया और उसने स्वर्ण पदक जीत लिया।

सारी दुनिया अवाक रह गयी… सन्न…

आज 20 साल बाद भी इसे एथलेटिक्स जगत का सबसे बड़ा उलटफेर माना जाता है।

कयास लगाने वाले गलत कयास नहीं लगा रहे थे। उनके अनुमान और एल गेरूज़ में उनका भरोसा एकदम सही था, जायज़ था… पर बहुत नज़दीकी मुक़ाबलों में, जहां फोटो फिनिश होती है, जहां सिर्फ बाल बराबर ही अंतर होता है विजेता और उपविजेता में… वहां ऐसी चूक हो जाती है।

आज जब हम 2019 के चुनाव के कयास लगा रहे हैं, और उसमें भाजपा को स्पष्ट बहुमत दे रहे हैं।

मेरे अनुमान से 300 से 310 के बीच सीट आएगी, और उत्तरप्रदेश में 65 से 74 के बीच… गठबंधन Single Digit में रहेगा यानी 10 से कम…

लोग पूछते हैं, आपके ये अनुमान, ये विश्लेषण मध्यप्रदेश राजस्थान में क्यों फेल हो गए?

इन दोनों राज्यों में भाजपा पिछड़ी हुई थी। कहने वाले तो यहां तक कह रहे थे कि राजस्थान में 30 सीट आएगी। दोनों राज्यों में भयंकर Anti Incumbency थी।

Anti Incumbency का एक मात्र उपाय होता है, Sitting MLA की टिकट काट दो… पर दोनों ही राज्यों के मुख्यमंत्री विद्रोही तेवर दिखाने लगे और शीर्ष नेतृत्व चूंकि 2019 पर ज़्यादा फोकस कर रहा था इसलिए उन्होंने शिवराज और वसुंधरा के सामने surrender कर दिया…

दोनों राज्यों में भाजपा शुरुआत में बहुत पीछे थी, ये तो मोदी का करिश्मा था कि मतदान की तारीख आते आते भाजपा एकदम close finish तक आ पाई।

इन दोनों ही राज्यों में फोटो फिनिश हुई… राजस्थान में 20 से ज़्यादा सीट्स बेहद कम मार्जिन से हारी भाजपा… इतने नज़दीकी मुकाबले में, जहां बाल बराबर अंतर हो, कोई भी हार जीत सकता है।

चुनाव विश्लेषण कोई फीते से नाप के या सुनार के कांटे पे तौल के नहीं होते… जातीय समीकरण और अन्य factors को देख के किये जाते हैं।

2019 की बात 2018 के विधानसभा चुनावों से अलग है।

ध्यान रखिये कि एल गेरूज़ Noah Ngeny से हारा था वो भी फोटो फिनिश में, किसी ज़िला स्तरीय के खिलाड़ी से नहीं… आज मोदी/ भाजपा के सामने विपक्ष कहीं नहीं है। यूपी की बमुश्किल 15 सीटों पर सपा बसपा मिल के थोड़ी टक्कर दे पाएंगी वरना ये चुनाव लगभग एकतरफा हो चुका है।

अभी जो लहर है ये बहुत जल्दी सुनामी में तब्दील हो जाएगी और अबकी बार सुनामी 2014 से बड़ी होगी।

कयास विश्लेषण फोटो फिनिश में फेल होते हैं, सुनामी में नहीं।

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