न्यू ज़ीलैंड का गनमैन सिर्फ एक गनमैन है, एक टेररिस्ट नहीं

जब कोई मुसलमान कहीं हमला करता है तो वह टेररिस्ट कहलाता है… जब न्यू ज़ीलैंड में एक बन्दे ने मुसलमानों पर हमला किया है तो वह सिर्फ गनमैन कहलाता है… क्यों भला?

एक मुस्लिम मित्र ने उपरोक्त आपत्ति जताई।

आपत्ति लॉजिकल है। पर उत्तर भी सरल है।

टेररिज़्म सिर्फ एक हिंसक घटना नहीं होती। एक राजनीतिक कदम होता है। यह एक विशेष राजनीतिक उद्देश्य के लिए की गई हिंसक घटना होती है। और यह उद्देश्य वह व्यक्ति अकेले पूरा नहीं करता। उसके पीछे पूरा एक तंत्र होता है। एक टेररिस्ट अकेला नहीं होता, वह एक फौज का सिपाही होता है।

जब एक मुस्लिम आतंकी खड़ा होता है तो वह अकेला खड़ा नहीं होता। उसके पीछे ट्रेनिंग होती है, ब्रेनवॉशिंग होती है। आतंकी तो मर मरा जाता है पर उसके पीछे पूरा समाज उसको हीरो बनाता है, उसके परिवार को पालता पोसता है।

फिर मीडिया के गिद्ध आते हैं। वे पहले आतंकी घटना की निंदा करते हैं। फिर उसके पीछे वे उसके कारणों की विवेचना करते हैं। और इस बहाने से वे उस आतंकी की हरकत को जस्टिफाई करते हैं। उसे एक विक्टिम दिखा के उसके लिए या उसके उद्देश्य के लिए सहानुभूति जुटाते हैं।

फिर इसका प्रयोग वे देश के राजनीतिक तंत्र और पॉलिसी में अपने मनोवांछित परिवर्तन के लिए करते हैं। इस तरह उस आतंकी का उद्देश्य पूरा होता है।

और एक आतंकी को पता होता है कि वह अगर पेट पर बम बाँध कर खुद को उड़ा भी देगा तो उसकी यह कुर्बानी बेकार नहीं जाएगी। यह भविष्य के बनने वाले आतंकियों के लिए भी प्रेरणा का काम करता है।

बिना इस पूरे तंत्र के पार्टिसिपेशन के एक हिंसक घटना एक आतंकी हमला नहीं बनता। उसका राजनीतिक पहलू अछूता रह जाता है। वह अधिक से अधिक एक क्रुद्ध व्यक्ति की फ्रस्ट्रेटेड हरकत बन कर रह जाता है।

न्यू ज़ीलैंड की घटना एक हिंसक घटना है, पर एक सफल आतंकी हमला नहीं है। उसके पीछे आतंक का वह तंत्र सक्रिय नहीं है जो उसका उद्देश्य पूरा कर सके।

जब इंग्लैंड में 7 जुलाई 2005 को चार ट्यूब ब्लास्ट हुए तो पहले तो ऐसा लगा कि इंग्लैंड इसके विरुद्ध उठ खड़ा होगा। एक क्रोध और क्षोभ का माहौल बना और मीडिया ने इसके विरुद्ध खूब हवा बनाई, पर अगले सप्ताह भर में फिर धीरे से हवा की दिशा बदल दी।

पहले तो इस्लाम की शिक्षा को इसके दोष से मुक्त किया गया। फिर लोगों को उस आतंकी के गुस्से के कारण समझाए जाने लगे। फिर उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के उपाय समझाए जाने लगे।

आज इंग्लैंड के स्कूलों में… जी हाँ… सेक्युलर सरकारी स्कूलों में इस्लाम के बारे में मीठी मीठी बातें बताई जाती हैं। तो उन चार सुसाइड बॉम्बर ने सिर्फ अस्सी लोगों को नहीं मारा, बल्कि पूरी जनरेशन को कन्विंस कर दिया कि ‘इस्लाम इज़ ए रिलिजन ऑफ पीस।’

पर न्यू ज़ीलैंड का गनमैन सिर्फ एक गनमैन है… एक टेररिस्ट नहीं है, क्योंकि उसके साथ पूरा वह तंत्र नहीं है जो उसके उद्देश्य को पूरा करे। बल्कि वह तंत्र उसके खिलाफ ही एक्टिव हो गया है।

आज न्यू ज़ीलैंड में लिबरल ब्रिगेड हिजाब पहन रही है। रेडियो और टेलिविज़न पर अज़ान हो रही है। इमीग्रेशन लॉ ढीले किये जायेंगे। हज़ारों पोटेंशियल आतंकियों को देश में लिया जाएगा। स्कूलों में इस्लाम पढ़ाया जाएगा। यानि न्यू ज़ीलैंड में वही होगा जो इंग्लैंड में 7/7 की घटना के बाद हुआ था। इस बन्दे ने 49 लोगों को मार के बिल्कुल वही हासिल किया जो इंग्लैंड के चार सुसाइड बॉम्बर्स ने हासिल किया था।

सिर्फ एक हिंसक घटना आतंकवाद नहीं होती। आतंकवाद एक तंत्र है, और जिसके पास वह तंत्र है वह हर हिंसक घटना का प्रयोग अपने वांछित उद्देश्य के लिए कर लेता है। तो क्राइस्टचर्च का यह गनमैन था तो सिर्फ एक गनमैन, लेकिन वाम-इस्लाम के आतंकी तंत्र ने उसे भी अपने मतलब का एक आतंकी बना लिया।

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