‘उन’ का संदेश साफ़ था, ‘हमसे टकराने की सोचना भी मत’

असीमानन्द कोई सेलिब्रिटी तो थे नहीं। वे यूनिवर्सिटियों में कृमियों की तरह चिपके कोई लुच्चे प्रोफेसर भी नहीं थे, जो अस्मत के बदले डिग्री बाँटते हैं। उनके पास तो सत्ता की कोई चमक भी नहीं पहुंची थी। विरक्त सन्यासी थे। बहुत कम भोजन करते। उससे भी कम बोलते थे। कौन कह सकता था कि एमएससी … Continue reading ‘उन’ का संदेश साफ़ था, ‘हमसे टकराने की सोचना भी मत’