होली की हुड़दंग

होली हमारा पवित्र त्यौहार है, ये अपनत्व को बनाए रहने वाला त्यौहार है जैसे सवा लाख निबंधिया कथनों को चीरते हुए हमारे शहर की होली पूर्व से ही एक परिभाषा गढ़ती चली आ रही है कि होली मने हुड़दंग!

होली का आगाज़ किसी भी कान्वेंट स्कूल के शातिर शक्ल के बच्चे की जेब में रखी गुलाल की पुड़िया से शुरू होकर चौराहे के डिवाइडर से चिपके चितकबरे कलर के मुंह में गुलाल भरे धुत्त शराबी पर खत्म होता है।

सुबह से ही रामू, दिनेश, श्याम और दुनिया भर के हिमेश रेशमिया से लड़कों की माँ उन्हें गीता ज्ञान देती हैं कि बेटा! जे वाले कपड़े नए हैं वो चैक रंग की शर्ट पहन लो जिसकी कॉलर घिस गई है, वो पुरानी है सीधे फेंक देना ..रामू रूठते हैं, माँ मनाती हैं और ऐसे माँ बेटे के कपड़ो पर हुए विश्वव्यापी समझौते से होली शुरू होती है।

होली के रंग में एंड्रयू सायमंड्स होने के बाद 10 -25 मोटरसाइकिल का काफिला जोड़कर सारे शहर में नागिन सी मोटरसाइकिल लहराना होली का अहम हिस्सा है, उस बीच कई पटेल एक हाथ से फेसबुक पर सारी चलती मोटरसाइकिलो को एक कैमरे में समेटते हुए फेसबुक पर लाइव आते हुए शक्ति प्रदर्शन करते हुए तरह-तरह की आधुनिक फागें गाते हैं जिनमें मुख्य रूप से गाई जाने वाली क्रांतिकारी फ़ागे हैं :
१. एसो नैया काऊ को,जैसो जलवा दाऊ को
२. क्यों पड़े हो चक्कर में, चिनटा लग गए शक्कर में..

इस मोटरसाइकिल शक्ति प्रदर्शन के बीच तिगैलिया की मोड़ पर मोटरसाइकिल लहराते हुए कइयों का संतुलन बिगड़ता हैं, कइयों के घुटने छिलते हैं लेकिन उनके मर्द होने पर कोई लांछन लगे इसलिए समूचा दर्द शरीर के सबसे कोमल भाग में दबाए हुए वीर पुरूष की भांति उठ खड़े होते हैं ‘अरे चलो-चलो कछु नई भओ, इतेक से का हो रओ भाई को”कहते हुए सवारी को आगे बढ़ने का आवाह्न करते हैं।

कर्क रेखा मकर रेखा दुनिया भर के सारे भूगोल को गलत ठहराते हुए सूर्य की चटकीली रोशनी बारहमास ही यहां की छुईमुई से टीना, रिंकी, पिंकी जैसी तमाम लड़कियों पर पड़ती है,और इसी वजह से इनके पिम्पल्स फ्री और डिम्पलयुक्त चेहरे पर दुप्पटा कसा रहता है, ईद के चाँद की तरह होली के दिन ही इनके चाँद से मुखड़े के दुर्लभ दर्शन सड़क पर उपलब्ध होते हैं, रंग में सनी हुई एक स्कूटी पर तीन के हिसाब से दर्जनों अप्सराएं एक्टिवा मेस्ट्रो जैसे पुष्पक विमान पर हील की सेंडिल से सड़क कुरेदते  हुए सुराही सी आवाज में फनफनाती फ्लैग मार्च करती निकल जाती है और ऐसे में उन्हें देख लेते हैं वही मोटरसाइकलो के प्रतिनिधित्व करने वाले स्वघोषित राजा भैया की पीछे की सीट पर बैठा हुआ मित्र …और उन्हें देखते ही वह व्याकुल हो उठता है, वेदना से भरे स्वर में राजा भैया से कहता है भाई ….भाई देखो भाभी जा रही, बस फिर क्या, भाभी की एक्टिवा आगे भाई की बुलेट पीछे … और इस आरोही अवरोही सफर में होली का रंग चढ़ता रहता है।

इस सबके विपरीत कुछ लड़कियां जो मोई जी के स्वच्छता अभियान की स्टार प्रचारक होती है वो अपने जैसमीन से चेहरे पर हल्का सा कुमकुम का टीका लगाकर रंगारंग मुँह बनाकर सेल्फियां खींचती है और अपने सबसे प्रिय बाबू से उनमें से एक दुर्लभ सेल्फी पसन्द करवाकर इंस्टाग्राम पर इस कुटेशन के साथ अपलोड कर देती हैं ..कि सेफ होली क्लीन होली…..

उधर किसी प्रिय वरिष्ठ नेता को तन मन समर्पित करने वाले युवा नेता अपने प्रिय नेता में अपने मानस पिता की छवि देखते हुए अपने वैध पिता को गुलाल लगाने से पहले उन्हें गुलाल लगाकर अपनी होली को शुभ कर लेते हैं, औऱ फेसबुक पर पोस्ट करते हैं मानस पिता के साथ होली मनाते हुए युवा नेता फलाने…

एक और ज़मीन के विवाद से लेकर फेसबुक पर लाइक कमेंट के चक्कर में हुए वर्षों से चल रहे राष्ट्रीय विवाद में लिप्त दो गुट एक दूसरे को रंग लगाकर एक हो जाते हैं और भविष्य में एक दूसरे की फोटो पर ‘नाइस पिक ब्रो’ लिखने का वचन देते हैं।

और इन सब के बीच शहर का कोई पत्रकार अपने अखबार के लिए प्रभावित खबर ढूँढने के लिए सवा करोड़ लड़कों को चीरते हुए सड़क पर इक्का दुक्का होली खेलती हुई लड़कियों को ढूंढता है, ताकि उन्हें कैमरा में कैद कर कल अखबार का फ्रंट पेज सजा सके इस कुटेशन के साथ… कि होली खेलती हुई मेधावी बालिकाएं…

और दसवीं बारहवीं के बच्चों के लिए उनकी परीक्षाओं के चलते उनके मां बाप इस साल की होली वर्जित कर देते हैं वो मन में कुढ़ते हुए जयभान सिंह पवैया को साक्षी मानकर नए शिक्षा मंत्री को कोसते हैं इसके अतिरिक्त जिनकी परीक्षा होली के पहले खत्म हो जाती है वो सिर्फ एक ही मंत्र गुनगुनाते हैं “अहं ब्रम्हास्मि”

अंत में शहर भर की होली का मोह आकर्षण त्यागे हुए हर घर के बुजुर्ग एक गुलाल के सादे टीके को माथे पर सुशोभित कर होली शुरू करते हैं और शाम को एक दूसरे हमउम्र को गुलाल लगाते हुए शुभकामनाएँ देते हुए इस पवित्र त्यौहार को इस उम्मीद के साथ विदा करते हैं कि अगले वर्ष भी इसी उम्मीद के साथ हमें मिले ये त्यौहार…

इतना उल्लास इतनी उमंग इतना उत्साह रहता हैं हमारे शहर की होली में और यही होली देश भर के हर शहर हर कस्बे हर मोहल्ले की दास्तान है।

बुरा न मानो होली है!!
होली की अनंत शुभकामनाएं सभी को!!

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