मनोहर पर्रिकर : अलविदा, मैन ऑफ सर्जिकल स्ट्राइक

आज एक ऐसे राजनेता का अवसान हुआ है, जिसकी बीमारी को चुनावों के कारण छुपा लिया गया था!

श्रीमान पर्रिकर ने इस राष्ट्र को सिखाया है कि सर्जिकल स्ट्राइक्स कैसे की जाती है। स्यात् वे ऐसे पहले रक्षामंत्री हैं जिनके कार्यकाल में हुई स्ट्राइक जनता के समक्ष प्रकट की गई।

रक्षामंत्री के तौर पर करीब एक बरस की सफल पारी के पश्चात् भी उन्हें गोवा का मुख्यमंत्री बनाया गया।

सहसा ऐसा निर्णय क्यों?

चूँकि दो हज़ार सत्रह की दस्तक से पूर्व ही पर्रिकर साहब को “पीलिया” की समस्या हुई थी।

बहरहाल, ये “पीलिया” सामान्य नहीं था। वस्तुतः उन्हें मूलरूप से “पीलिया” नहीं था। बल्कि उनके पाचन तंत्र में ऐसा स्थितियां हो गईं थीं, जिन्होंने देह में “पीलिया” के प्रभाव उत्पन्न किए।

ऐसी स्थिति में उनके यकृत, यानी कि लिवर, से आने वाली “सी०बी०डी०” (कॉमन बाइल डक्ट) में ब्लॉकेज़ आगए। और लिवर से आने वाले पाचक रसों का आना बंद हो गया।

ऐसा स्थिति होने पर भी, लिवर के पाचक रसों का निर्माण बंद नहीं हुआ। वे “पीले” रंग के रस अपना मार्ग रक्त नलिकाओं में खोजने लगे।

और इस तरह पूरी देह ने “पीले” रंग की होकर “पीलिया” होने का प्रभाव उत्पन्न कर दिया।

उनकी जाँच हुई। लिवर फंक्शन टेस्ट रिपोर्ट्स करीब अठारह के आसपास थीं। इट्स टू डेंजरस!

उनकी “एंडोस्कोपी” हुई, “बायोप्सी” रिपोर्ट आई और उन्हें “प्री-एम्प्यूलरी ग्रोथ” का “कैंसर” घोषित हुआ।

इसका तात्पर्य है, लिवर से पाचक रस लेकर आने वाली पाइप के आतंरिक भागों की विषाक्त कोशिकाओं में अनियमितरूप से बढ़ोत्तरी होना।

चुनाव निकट थे, तो कीमो का उपाय नहीं अपनाया गया। उन्होंने शल्य-चिकित्सा को चुना।

इस शल्य-चिकित्सा को “व्हिपल” ऑपरेशन कहा जाता है। इसमें पाचन तंत्र को समस्त आतंरिक दीवारों की बाधा को हटा कर लिवर पाइप, आमाशय, अग्नाशय और छोटी आँत को नए सिरे से जोड़ दिया जाता है।

ये प्रक्रिया शल्य-चिकित्सा के बड़े ऑपरेशन्स में गिनी जाती है। सामान्यतः इसमें सात घंटे लगते हैं!

ऐसे ऑपरेशन से रिकवर होकर, बिना किसी घोषणा के, वो कर्मयोगी गोवा का मुख्यमंत्री बना!

ऐसे ट्रीटमेंट से गुजरने के पश्चात्, एक नियमित अंतराल पर “सी०ए०-नाइन नाइनटीन” नामक टेस्ट होता है।

जिसकी सामान्य रिपोर्ट, हर स्वस्थ मनुष्य की रिपोर्ट जीरो से सैंतीस होती है। यदि सैंतीस से चालीस के मध्य हो तो जानें कि निकटतम भविष्य में आपको “अग्नाशय” कैंसर हो सकता है।

और यदि ये रिपोर्ट चालीस से ऊपर हो, तो जानें कि आरंभ हो चुका है!

श्रीमान पर्रिकर की रिपोर्ट्स जब एक सौ साठ से ऊपर जाने लगी, तब जनता के समक्ष ये सत्य प्रकट हुआ कि वे कैंसर से पीड़ित हैं।

और शेष तो सर्वविदित है!

दो हज़ार सोलह के एकदम आखिर और सत्रह के आरंभ में घटित इस पूरे घटनाक्रम को जनता से छुपा लिया गया।

जानते हैं क्यों?

चूँकि गोवा में विधानसभा चुनाव निकट थे और पार्टी को अपने बड़े नेता की बीमारी पर सहानुभूति नहीं चाहिए थी।

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दिवंगत पर्रिकर साहब को देखकर मुझे प्राच्यकाल के राजर्षियों की याद आती थी। यदि कोई अंतर रहता तो वो था वेशभूषा का!

आज शाम से ही, उनका राजनैतिक व्यक्तित्व और सत्ता-कृतित्व, सोशल प्लेटफॉर्म्स पर छाया रहेगा।

कल के अखबार उनकी स्मृतियों के स्मारक बन जाएंगे! हर ओर एक आई०आई०टी० स्नातक के राजनेता बनने की कहानी छाई रहेगी!

“नोज़ फीडिंग पाइप” के साथ, भिन्न भिन्न कार्य और कार्यक्रमों में शामिल होने वाला आधुनिक राजर्षि आज नहीं रहा!

ईश्वर इस कर्मयोगी को अपने श्री चरणों में शांति दे!

अलविदा, मैन ऑफ सर्जिकल स्ट्राइक!

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