दत्तात्रेय गोत्र वाले पंडित जी समझ लें, ‘मोदी है तो मुमकिन है’

कांग्रेस अपने आप में संपूर्ण सत्ता प्रतिष्ठान है। सत्ता और उससे मलाई खाने वालों का गठबंधन किसी भी सीमेंट से ज्यादा मजबूत है। मानना पड़ेगा कि इनके पत्तलकारों और ट्विस्टोरियन की काबिलियत।

बालाकोट हवाई हमले से देश में फूटी गर्व की भावना को इन्होंने तत्काल चीन की ओर मोड़ दिया कि भाई देखो न, 56 इंच का सीना है तो चीन को डराओ।

ये जुमलेबाज़ी उनकी तरफ से हो रही जिन्होंने तिब्बत और अक्साई चिन उपहार में दिया और फिर भी लात खाई। मैं 1962 की बात कर रहा।

तो चीन मसूद अज़हर पर दस साल से वीटो कर रहा है। अब चीन ने भी ज़रूरत से ज़्यादा चालें चल ली हैं।

संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद के 15 में से कम से कम 11 सदस्यों ने चीन को स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई तुम्हारे वीटो की मोहताज नहीं रहेगी। तुम साथ नहीं रहोगे तो अलग-थलग पड़ जाओगे।

अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस पिछले तीन दिन से लगातार चीन से बातचीत जारी रखे हैं।

चीन को उनके संदेश स्पष्ट हैं :

  • बातचीत आपसे कर रहे हैं लेकिन टालमटोल ज़्यादा दिन नहीं चलेगी। यहां तक कि इसे महीनों तो क्या, हफ्तों तक खींचने की भी उम्मीद न रखो। हम बस कुछ दिन इंतज़ार करेंगे।
  • चीन अगर नहीं माना तो वे अन्य विकल्पों पर भी गंभीरता से विचार कर रहे हैं। वे संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव पेश करेंगे और इस पर खुली बहस कराएंगे, फिर इस पर मतदान होगा।
  • पूरी संभावना है कि चीन को मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकी घोषित करने पर सहमति जताना ही पड़ेगा लेकिन उसकी भाषा थोड़ा गोल-मोल होगी।

और सहमति नहीं जताई तो जवाबी कार्रवाई भारत और अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों की तरफ से होगी। हम चीन से तरजीही राष्ट्र यानी मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा छीन सकते हैं और व्यापार में जिस 35 बिलियन डॉलर के मुनाफे में वो हैं, खतरे में पड़ सकता है।

फ्रांस ने अपने स्तर पर मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकी घोषित कर उसकी संपत्ति ज़ब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

रफाल अभी आया नहीं लेकिन ये बहुत बड़ी स्ट्राइक है। चुनाव बाद आप के काले कारनामों पर होगी। दत्तात्रेय गोत्र वाले पंडित जी समझ लें, “मोदी है तो मुमकिन है”। हम तो यह समझते ही हैं।

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