बिना ब्याज़ दर कम हुए, नहीं बढ़ सकता प्राइवेट इन्वेस्टमेंट

मोदी सरकार पर संस्थाओं को नष्ट करने का इल्ज़ाम लगता रहता है। ऐसी ही एक संस्था है रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया।

आरोप है कि मोदी सरकार रिज़र्व बैंक पर दबाव डालती रहती है कि वो इंटरेस्ट रेट कम करे, अपने रिज़र्व में से भारत सरकार को डिविडेंड दे।

शायद उर्जित पटेल ऐसे ही दबाव को झेल न पाने की वजह से इस्तीफ़ा देकर गए हों।

कुछ महीने पहले मैंने रिज़र्व बैंक और मोदी सरकार से उसके संबंधों के बारे में लिखा था।

[बड़ा और पेचीदा सवाल है कि कौन सही है और कौन गलत! RBI या सरकार?]

उस लेख की खास बात रिज़र्व बैंक के गवर्नर्स पर इंटरेस्ट रेट को कम करने का दबाव था। मोदी सरकार इकॉनमी में उचित ग्रोथ न आ पाने का कारण निजी निवेश में वृद्धि न होना मानती है।

और बिना ब्याज़ दरें कम हुए, प्राइवेट इन्वेस्टमेंट नहीं बढ़ सकता।

रिज़र्व बैंक का बेहद सम्मान है और उसकी बड़ी वजह 2008 के ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस में भारत का न फंसना है।

इसी तरह अमेरिका का फेडरल रिज़र्व है, उसका भी बहुत सम्मान है क्योंकि फेडरल रिज़र्व ने अपनी नीतियों से 2008 के वित्तीय संकट से अमेरिका को उबारा, ग्रोथ वापस लाया और अमेरिका के शेयर मार्केट को दस साल से चला आ रहा बुल मार्केट दिया।

अब अमेरिका में उसी फेडरल रिज़र्व की सार्वजनिक आलोचना हो रही है, उसके खिलाफ आर्टिकल्स, एडिटोरियल्स आ रहे हैं।

और खुद प्रेज़िडेंट ट्रम्प ट्विटर पर फेडरल बैंक को चेतावनी दे रहे हैं कि वो इंटरेस्ट रेट बढ़ाने की गलती न करे।

इंटरेस्ट रेट!

अमेरिका के इतिहास में ऐसा कोई उदाहरण नहीं मिलता जब किसी प्रेज़िडेंट ने फेडरल रिज़र्व के चीफ को वॉर्न किया हो या उनके काम को प्रभावित करने की कोशिश की हो।

पर मजबूरी है।

[Avoiding a slowdown: on Fed interest rates]

इस दिसंबर में अमेरिकी शेयर मार्केट ने दिसंबर की सबसे बड़ी गिरावट देखी। इस फरवरी में युवाओं को नौकरी मिलने का आंकड़ा केवल 20000 था। सालों के निचले स्तर पर।

और अमेरिकन बाज़ारों पर मंदी के बादल गहरा रहे हैं।

और अमेरिकन प्रेज़िडेंट ट्रम्प इसका कारण फेडरल रिज़र्व द्वारा 2018 में ब्याज दरों में 4 लगातार वृद्धि को दे रहे हैं।

वही प्रेज़िडेंट ट्रम्प जो राष्ट्रपति चुनावों में कम ब्याज़ दरों का मखौल उड़ाते थे और कहते थे प्रेज़िडेंट बनने के बाद वो ब्याज़ दरों में वृद्धि कराएँगे।

[Trump and Goldman Are Warning About the Same Thing in the Market]

और ये गुहार केवल प्रेज़िडेंट ट्रम्प की ही नहीं है। दुनिया भर में सेंट्रल बैंकों पर ब्याज़ दरें कम करने का दबाव पड़ रहा है।

यूरोप में सेंट्रल बैंक अपनी दरें घटा चुका है। चीन में सेंट्रल बैंक ब्याज़ दरों में कमी के साथ स्टिमुलस भी दे रहा है।

ऑलमोस्ट पूरे विश्व में सेंट्रल बैंक कम ब्याज़ दरों के लिए रिस्पॉन्ड कर रहे हैं।

और हाँ, कहीं किसी देश में विपक्ष सरकार पर सेंट्रल बैंक को बर्बाद करने का आरोप नहीं लगा रहा।

[The Federal Reserve took Donald Trump’s advice on interest rates. Now he’s not happy]

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