विश्व निद्रा दिवस की शुभकामनाएँ!

या देवि सर्वभूतेषु निद्रारुपेण संस्थिता।
नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमो नमः।।

कहते हैं इस मंत्र का 108 बार जाप करने से शर्तिया नींद आती है। इसमें मूलतः मनोवैज्ञानिक कारण है। 108 बार जाप करने से आपका ध्यान इधर उधर नहीं भटकेगा। आप तनाव रहित हो जाएंगे। वरना इस मंत्र में तो यही कहा गया है कि हे माँ दुर्गा आप निद्रा की संस्थिता हो। मैं आपको अनेकानेक बार प्रणाम करता हूँ।

माँ दुर्गा को प्रणाम करने के अतिरिक्त सोने से आधा घंटे पहले सोशल मीडिया से दूरी बनानी होगी। हाथ पांव धोना पड़ेगा। सोने से दो घंटे पहले खाना खा लेना पड़ेगा। लाइट व मोबाइल को स्वीच आॅफ करना होगा। हो सके तो सोने से पहले प्राणायाम और ध्यान की आदत डालें।

विश्व निद्रा दिवस 21 मार्च से पहले पड़ने वाले शुक्रवार को पड़ता है। आज शुक्रवार है। तारीख 15 मार्च है जो 21 से पहले पड़ता है। अतएव आप सभी को विश्व निद्रा दिवस की हार्दिक बधाई एंव शुभकामनाएँ। बेंगलुरू के लोग भरपूर नींद लेते हैं।

इस मामले में वे दिल्ली व मुम्बई को मात दे रहे हैं। बेंगलुरू में ध्वनि का स्तर बहुत हीं कम है। इसलिए यहां प्यारी नींद आती है। यहां के लोग को जगाने के लिए एलार्म लगाना पड़ता है। जिन्हें नींद नहीं आती उनका टेस्टोस्टेराॅन हार्मोन्स का स्तर बहुत नीचे होता है, जिससे उनका प्रजनन प्रभावित होता है। वैसे सबके लिए 8 घंटे की नींद पर्याप्त होती है, लेकिन वीडियो गेम और तनाव पालने वालों को नींद कहां आती है?

आजकल हाॅस्पिटल पहुँचने वाले मरीजों में हर पांचवा इनसोमिनिया का मरीज होता है। स्लीप एप्निया से 20% लोग पीड़ित हैं। फेसबुक व ह्वाट्सप चलाने वाले लोग अनिद्रा के रोगी हो जाते हैं। ओ एस ए ( आब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया ) में गले के आस पास चर्बी जमा होने लगती है। मरीज को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाता। थोड़ी थोड़ी देर में नींद खुलती रहती है।

नींद पूरी न होने की वजह से डायबिटीज और ब्लण्ड प्रेशर के मरीज बढ़ रहे हैं। अनिद्रा रोग की वजह से लोग मनोरोगी भी हो रहे हैं। ध्वनि प्रदूषण की वजह से भी नींद नहीं आती है। पूरी नींद लेने वाले लोग शत प्रतिशत काम करते हैं। कई बार पेट की गर्मी से भी नींद नहीं आती है।

ग्रीक के महान कवि होमर ने नींद को मृत्यु का जुड़वा भाई कहा है। नींद से सपने जुड़े होते है। सिगमण्ड फ्रायड स्वप्न फल पर विचार कर महान हो गये। स्वप्न फल पर विचार वे कहां करेंगे जिन्हें नींद ही नहीं आती।

नींद कहां जो सपने देखूं? सपना मांगे नींद। ये नींद जब मृत्यु का सहोदर भाई है तो आती क्यों नहीं? जब कि मृत्यु अटल है। मृत्यु प्रकृति का शाश्वत नियम है। वह एक दिन जरूर आएगी। फिर नींद क्यों नहीं आती? गालिब मरने से बहुत पहले लिख गये थे।

मौत का एक दिन मुअय्यन है,
नींद क्यूँ रात भर नहीं आती?

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY