हैरानी की बात नहीं यदि महाराष्ट्र दोहरा दे 2014 का इतिहास

सबसे दयनीय स्थिति विपक्ष की हमारे महाराष्ट्र में होने वाली है।

2014 में भाजपा + शिवसेना + अन्य ने यहाँ की 47 में से 42 सीटें जीत ली थीं… ऐसी ऐसी सीटें जीत ली थीं जो राकांपा और काँग्रेस की बपौती मानी जाती थीं।

महाराष्ट्र की राजनीति की एक बात अच्छी है कि यहाँ एक पार्टी का वोटर दूसरी के नेता से कोई खुन्नस नहीं रखता… साथ ही नेताओं में भी समझदारी है… इसलिये महाराष्ट्र एक विकसित राज्य है।

खैर…

साल भर जब हमारी तरफ के लड़के शिवसेना को भला-बुरा कहते रहते थे तब हम केवल मुस्कुराते रहते थे…

कारण यह कि हम स्थानीय लोग यह तकरार हर चुनाव में देखते आये हैं… भाजपा शिवसेना पाँच साल भले कितना ही लड़ें लेकिन चुनाव से पहले या चुनाव के बाद साथ ज़रूर आते हैं… तो भाजपा और शिवसेना का तो गठबंधन हो गया है।

लेकिन काँग्रेस + राकांपा का क्या?

सीटों के बँटवारे को लेकर झड़प इस स्थिति में आ गयी है कि कल काँग्रेस के नेता प्रतिपक्ष का पुत्र भाजपा में शामिल हो गया।

कारण?

कारण यह कि अहमदनगर की सीट राकांपा काँग्रेस के लिये छोड़ने को तैयार नहीं है।

वहीं माढा के सांसद का पुत्र भी भाजपाई होने को तैयार बैठा है। ध्यान रहे यह सीटों को हथियाने की लड़ाई सिर्फ उन सीटों के लिये है जहाँ पर विपक्ष की स्थिति मज़बूत है… वरना अन्य जगहों पर तो कोई लड़ने तक को तैयार नहीं है।

गठबंधन की यही दिक्कत है। पार्टी के मुखिया तो गठबंधन कर लेते हैं… लेकिन सांसद और विधायक की भयाक्रांत रहते हैं… न जाने कितने लोग टिकट के लिये पाँच साल से मेहनत कर रहे होते हैं… और जब वह टिकट गठबंधन के खाते में चले जाये तो वह बागी हो जाता है… कौन अपनी पांच साल की मेहनत गंवायेगा?

हालत यह है कि महाराष्ट्र में विपक्ष के पास उम्मीदवार ही नहीं है…

कईयों ने तो सीट लेने से मना कर रखा है… विधानसभा चुनाव लड़ने की सोच रहे हैं…

10 महीने बाद विधानसभा के चुनाव भी हैं उसके लिये पैसा और इज्जत बचाने की सोच रहे हैं…

यही हाल गठबंधन का उत्तरप्रदेश में भी होगा…

अब चूंकि बहन जी ने गठबंधन से मना कर दिया है… तो महाराष्ट्र में हर सीट पर बसपा के उम्मीदवार उतरेंगे…

बसपा का वोटर कट्टर बसपा का ही होता है…

बसपा बंपर दलित वोट काटती है…

इसके अलावा MIM और प्रकाश आंबेडकर भी विपक्ष का वोट काटने के लिये तैयार बैठे हैं…

अन्य छोटी छोटी कट्टर भीम वाली पार्टियाँ भी उतरने वाली हैं… वह भी नाराज़ भीम-मीम वोट काटेगी …

मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस ने मराठवाड़े में लबालब पानी पहुंचा दिया है…

मराठों को आरक्षण दे दिया है…

तेज़ तर्रार नेता हैं…

विपक्ष के पास कोई बड़ा चेहरा नहीं…

अगर महाराष्ट्र में 2014 का इतिहास दोहराया जाये तो इसमें किसी को आश्चर्यचकित होने की जरूरत नहीं है…

महाराष्ट्र में विपक्ष का पत्ता साफ है।

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