भगाओ इन्हें…

कांग्रेस के लूट के तरीक़े देखिये, यह महज़ एक बानगी है… सिस्टेमैटिक तरीक़े से कैसे लूट की जाती है।

हम लोग मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा भले ढोर चराने और बैंड बजाने की ट्रेनिंग को लेकर हँस रहे हों लेकिन दरअसल यह सरकारी पैसे की योजना बद्ध तरीक़े से लूट के प्रकार होते हैं।

नरेंद्र मोदी या अमित शाह ने जब पकोड़े के ठेले लगाने की बात कही थी तो उनकी मंशा केवल यह थी कि लोग रोज़गार पाएं, कुछ भी करें अपना पेट पालें… वे कोई सरकारी पकोड़ा तलो योजना नहीं लाए थे जिसके तहत पकोड़े का ठेला लगाने वालों को सरकार पैसे बांटे? लोन एक अलग बात है।

कमलनाथ ने ढोर चराने और बैंड बजाने की ट्रेनिंग और भत्तों के नाम पर अपने कार्यकर्ताओं के लिए मासिक उगाही की व्यवस्था कर दी है। वो इतने मूर्ख नहीं कि ऐसी योजनाएं रोज़गार देने के लिये लायें, ऐसी योजनाएं केवल लूट के तरीक़े होते हैं।

मध्यप्रदेश ही क्यों? छत्तीसगढ़ भी थोड़े पीछे है… यहाँ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उस नेशनल हेराल्ड को पिछले 2 महीनों में 37 लाख के विज्ञापन दे डाले जो कांग्रेस पार्टी का मुखपत्र है, जिसकी बिल्डिंग और ज़मीन हड़पने के मामले में माँ-बेटे ज़मानत पर हैं…

उस मुखपत्र को कौन पढ़ता होगा कांग्रेस कार्यालय में बैठकर मक्खी मारने वालों के अलावा?

फिर भी 37 लाख का विज्ञापन, वो भी 2 महीनों में? ऐसा क्या काम कर दिया भूपेश ने आते ही… सिवाय अपने आदमी को बिना परीक्षा दिलाये डिप्टी कलेक्टर बनाने के?

ये पूरा सिस्टम है, जैसे दैनिक भास्कर की एजेंसी अधिकांशतः कांग्रेस के नेताओं के पास होती हैं आप पड़ताल कर लीजिए… इनकी जहाँ सरकार होती है, ऐसे अख़बारों को जमकर विज्ञापन मिलते हैं लाखों करोड़ों के… ऐसे में मोदी कितना भी अच्छा काम करें, जहाँ से खाने मिल रहा उसी के ना गुण गाएँगे?

यह लूट की सिस्टेमैटिक व्यवस्था है जो कांग्रेसियों के ही घर भरती है…

फिलहाल इनकी नज़र 28 लाख करोड़ पर है… जिसके लिए लार टपका रहे ये….

भगाओ इन्हें…

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