बोलो जुबां केसरी : नीयत और नीति में कोई कमी नहीं है बन्दे में

मुझे ऐसा लगता है…

2014 से पहले पूरे विश्व भर में हिंदू टेरर (हिन्दू आतंकवाद) के चर्चे थे…!

रोज़े की दावतें सरकारी कार्यालयों तक पहुंच गई थीं और पुलिस थाने लव जिहाद के मौलवी बने हुए थे।

चीख चीख कर इस्लाम को अमनपसंद और हिंदुत्व को एकमात्र अपराध कहा जाता था…

मोदी को वीज़ा तक नहीं लेने दिया इन लोगों ने परंतु आज……

नेहरू जी का नाती जनेऊ निकाल कर के दिखाता है…!

आपको आश्चर्य नहीं होता सीताराम येचुरी (कम्युनिस्ट ईश्वर के अस्तित्व को नहीं मानते उसके बावजूद) कलश यात्रा लेकर चल रहा है!!!

नॉर्थईस्ट जहां चर्च का शासन चलता था। हथियार, आतंक….

पूरी दुनिया के लोग मानते थे कि नॉर्थईस्ट आपके साथ केवल भौगोलिक रूप से हैं। आज उस नॉर्थईस्ट का क्या हाल है?

वहां इस सरकार ने 22000 किलोमीटर राज्य मार्ग बना दिए….

माओवाद नक्सलवाद से नित्य अखबार भरे रहते थे परंतु अब यह समाप्त प्राय, मृत प्राय है।

विदेशी NGO ने हमारे सारे ताने-बाने को अस्त-व्यस्त कर रखा था, ये इतने अंदर तक घुसे थे कि बड़े से बड़े रणनीतिकार भी इनकी रणनीति का कोई तोड़ नहीं ढूंढ पाए थे। (बिना हो हल्ले के उस पर नकेल कसी गई), 40% ऐसे ऐसे NGO बंद हो गए, फड़फड़ाहट ऐसी है कि न कह सकते हैं न रो सकते हैं।

कश्मीर को लेकर के आप नहीं जानते दुनिया का क्या मत था?? अनेक देश कश्मीर को भारत के नक्शे में नहीं दिखाते थे!!

एयर स्ट्राइक जैसे बड़े कदम पर अब तक दुनिया के कई देश हमारी आलोचना कर चुके होते, हम पर आर्थिक प्रतिबंध लगा चुके होते…

चीन अमेरिका जैसे देशों के बयान सुने आप लोगों ने??

लेकिन पहली बार एयर स्ट्राइक करने के बाद भी पाकिस्तान को डांट पड़ रही है। आज पाकिस्तान अलग-थलग हो गया।

पहले केवल 2 देशों के बारे में कहा जाता था इज़रायल और अमेरिका, कि ये अपने सैनिक, अपने नागरिक और स्वाभिमान की रक्षा के लिए सीमा लांघ सकते हैं, लेकिन अब वह तीसरा देश भारत भी बन गया है।

असम और पूर्वोत्तर के राज्यों में एनआरसी क्या छोटा कदम है? इस दीर्घकालिक योजना में वे सभी सूत्र छिपे हैं जो समय आने पर बहुत बड़े, व्यापक और जबरदस्त परिणाम देने वाले हैं।

गौ रक्षा को लेकर कामधेनु आयोग का गठन,,, एक वृहद व्यापक रणनीति है जिसे भविष्य में कोई बन्द नहीं कर पाएगा, यदि इसकी निरन्तरता मात्र 5 वर्ष भी बनी रही तो,,,

750 करोड रुपए दिए हैं और इंफ्रास्ट्रक्चर वगैरह स्थापित होने के बाद आगे असीम संभावनाएं….!!

फैज़ाबाद अयोध्या हो गया !! क्या हमारी भावनाओं के लिए यह संकेत नहीं,,,,?
इलाहाबाद के विधवा-विलाप के बीच प्रयागराज का पवित्रीकरण हो गया…. क्या गौरव नहीं कर सकते हम?

मैं 4 दिन पहले काशी जाकर आया हूं। काशी कोरिडोर देख कर आपका दिल हरा हो जाएगा, जानिए कि कैसे सुधारवादी कदमों में जनता को साथ लेकर चला जाता है।

केदारनाथ पहले कैसा था और अब कैसा हो गया जरा जाकर देखिए… सेक्युलर देश में तीर्थों को दम तोड़ते हम सब देख रहे थे, किसने सोचा था कि इनके भी संवरने के दिन आएंगे?

चार धाम की यात्रा में हज़ारों एक्सीडेंट होते थे जाम लगते थे,अभागे हिंदुओं को अपने ही तीर्थ जाते हुए डर लगता था, आज 21000 करोड़ के बजट से चार धाम कोरिडोर का निर्माण! पहाड़ों पर चौड़े चौड़े हाईवे।

मेरी बात सुनो,

हज यात्रा की सब्सिडी खत्म करना छोटी बात है क्या? किसने सोचा था यह सब इतनी आसानी से हो जाएगा?

अनेक विभागों में भारतीय भाषाओं के उपयोग को लेकर जोर दिया जा रहा है और बहुतों ने शुरू किया है! हालांकि शिक्षा और मानव संसाधन में सर्जिकल स्ट्राइक होनी बाकी है। यह इस कार्यकाल का हिस्सा नहीं थी।

अभी आपने कुंभ देखा होगा!

मैं स्वयं कुंभ जाकर आया हूं। कुंभ की सफाई व्यवस्था और व्यवस्थाएं देखकर आश्चर्यचकित रह गए हम!

आज तक किसी ने कुंभ में 1000 करोड़ से अधिक रुपए नहीं दिए परंतु इस बार साढ़े चार हजार करोड़ का बजट केंद्र और राज्य सरकार ने दिया! यूनेस्को ने कुंभ को विश्व धरोहर घोषित किया! अन्यथा मिलेनियम जैसी गन्दगी की फिल्में, विश्व में भारत का चेहरा बनती थी।

इस बात का हल्ला तो नहीं मचाया गया लेकिन देश के 32% ब्यूरोक्रेट्स, 35% जज कुंभ के दर्शन करके आए!! देश के सभी राजदूतों को कुंभ के दर्शन करवाए गए एवं एक रात्रि रुकने की उनकी व्यवस्था की!! दुनिया का कुंभ को देखने का नजरिया बदल गया !! भ में 4 विश्व रिकॉर्ड बने!!

अब तक केवल गांधी परिवार के ही स्टेचू लगते थे,उन्हीं के नाम की योजनाएं बनती थी, दूसरे किसी के बारे में सोचा ही नहीं जाता था, परंतु अब देखिए जनजातियों के 250 महापुरुषों के लिए अलग-अलग स्थानों पर कुछ स्थानों पर प्रदर्शनी और अन्य बड़े बजट से संग्रहालय योजनायें इत्यादि बनाए गए हैं!

वॉर म्यूजियम, चीजों का नामकरण, वन रैंक वन पेंशन, सैनिकों का खोया आत्मसम्मान, किसानों में स्वावलंबन, उद्यमियों में सिस्टम के प्रति विश्वास, ब्यूरोक्रेसी में समर्पण जगाने के प्रयत्न, सब कुछ तो हिन्दू पद्धति से होना शुरू हुआ है।
7 करोड़ फ्री गैस कनेक्शन!!
ढाई करोड़ लोगों को घर!!
8 करोड़ शौचालय!!
ढाई करोड़ घरों तक बिजली!!
क्या आश्चर्यजनक नहीं है??

अभी जो आयुष्मान भारत योजना लागू की गई है केवल 4 महीने में 17 लाख लोगों के मुफ्त में ऑपरेशन हुए हैं! ये ऐसे लोग थे जो धन और पहुंच के अभाव में तड़पकर मर जाने वाले थे। बंधु अस्पतालों की लाइन में लग कर देखिए कभी!

गरीब सवर्णों को 10% आरक्षण क्या अपने आप में क्रांतिकारी पहल नहीं है? जिस देश में 5%रिजर्वेशन के लिए रक्त बहाना पड़ता है और करोड़ों की तोड़फोड़ होती है, वहाँ मात्र 48 घण्टे में अविश्वसनीय को सम्भव कर दिखाया, क्या यह कुशलता और प्रतिबद्धता का उदाहरण नहीं?

इकोनॉमी में पिछड़ा भारत आज छठे नंबर पर है और शायद अगले आंकड़े आने तक इंग्लैंड को भी पछाड़ कर भारत पांचवें नंबर पर आ जाए! आश्चर्यजनक रूप से लोगों की क्रयशक्ति बढ़ी है। स्वच्छता के प्रति जागरूकता, रसोई घर की समृद्धि, स्वास्थ्य के प्रति संवेदना, जाकर दूर दराज की ढाणी की महिलाओं को पूछिये आप??
मानता हूँ, कुछ किया है, बहुत कुछ बाकी है।
मगर करेगा यही।
होगा इसी विधि से।
नीयत और नीति में कोई कमी नहीं है बन्दे में।

अब ऐसे समय में हम खुलकर यौद्धा की भूमिका में आयें अथवा शल्यवृत्ति से फूफे बने रहें?

मुझे लगता है छोटी छोटी चीजों में उलझे बिना एक प्रचंड विजय की ओर बढ़ना चाहिए ताकि सारी फफूंद जिन्होंने 50 साल इस देश में गंदगी फैलाई है उनका सारा धरातल खिसक जाए!
इसके बाद सोचेंगे क्या करना है गलतियां करने पर हम इनको भी सबक सिखा सकते हैं लेकिन क्या यह समय उचित है?

मुझे जो समझ में आया मैंने लिखा है अब निर्णय हमको करना है मुझे लगता है अभी एक मुखी होकर एक ही दिशा में सोचना और चलना चाहिए, और वह है प्रचंड विजय

जी हाँ प्रचंड विजय की प्रबल धारा अपने साथ सारे पाप बहाकर ले जाएगी।

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