संवार दीजिये अपनी आगामी पीढ़ी का भविष्य

कल शाम, 2019 में भारत के भविष्य को नई दिशा देने के मुहर्त का श्रीगणेश हो गया है।

भारत में होने वाले, 2019 के लोकसभा चुनाव के परिणामो की तिथि 23 मई 2019 निर्धारित हो चुकी है।

चूंकि मैं प्रारब्ध को मानता हूँ, इस लिए यही कहूंगा कि 2019, 2014 से ज्यादा ऐतिहासिक व परिवर्तनशील होगा।

भारत में 2014 का लोकसभा चुनाव, आधुनिक भारत का सबसे महत्वपूर्ण चुनाव था। उस चुनाव में जिस प्रकार से प्रधानमंत्री पद के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र दामोदर मोदी भाजपा के उम्मीदवार बने थे, उसी ने यह तय कर दिया था कि यह चुनाव भारत व उसके हिंदुओं की नियति तय करेगा।

2014 का चुनाव, हिंदुत्व के लिए आखरी समर था। यह हिन्दुओ का कुरुक्षेत्र था, जिसमें नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, हिंदुत्व की अगली पीढ़ी के लिए संहार होना था, या फिर संहार करना था।

यह बिल्कुल भी आसान नहीं था क्योंकि हमें संहार करना था अपनी नीच सोच का, संहार करना था पिछले कई दशकों से भारत में विकसित हुई नवदासता का, और संहार करना था उस स्वयंभूत्व का जो परिवार, जाति और धर्म के आगे देश की गरिमा को बार बार गिरवी रख देता था।

मुझे इस बात का पूरा एहसास था कि यदि हमने इनका संहार नहीं किया तो हमारा संहार तय है। लेकिन नियति ने शताब्दियों के बाद, हिंदुत्व की आभामंडल में भारत को वैश्विक क्षितिज पर एक बार फिर से उदय होने का अवसर देना, तय कर रखा था।

इतिहास भारत को यह अवसर पहले भी देता रहा है लेकिन हम अपने ही कारणों से उन अवसरों का तिरस्कार करते रहे हैं और इसकी बहुत बड़ी कीमत भारत और उसके हिंदुओं ने चुकाई है।

1947 में मिली स्वतंत्रता के बाद, हमारी पिछली पीढ़ियों के पास भी अवसर था, लेकिन उन्होंने अपनी वैचारिक बौद्धिक श्रेष्ठता के दम्भ व व्यक्तिगत स्वार्थ व सत्ता लालसा में उसको विलोपित होने दिया।

हमारी ही गलतियों से क्षत विक्षत हुये भारत व हिन्दुओं के मानस को जब 2014 में जब एक बार पुनः पुनर्स्थापित करने का अवसर मिला, तब हिन्दुओं ने उसे हाथ से जाने नहीं दिया। भारत के हिन्दुओं के एक वर्ग को यह बोध हो गया था कि यदि आज वे चूक गये तो मां भारती से क्षमा नही मिलेगी और कोई भी “श्राद्ध”, हिन्दुओं की मुक्ति नहीं होने देगी।

आज, 2014 बहुत पीछे छूट गया है और अब हमारे सामने 2019 में लोकसभा का चुनाव आ गया है। यदि मैं भावनाविहीन होकर, सतही तौर पर, आप लोगों से 2019 के चुनाव में नरेंद्र मोदी को एक बार फिर प्रधानमंत्री चुनने का आह्वान करूँ तो मेरे लिए यही कारण बहुत है कि 2014 में काल ने भारत की जो दिशा तय की थी, उसी को स्थायित्व प्रदान करने का आगामी चरण है 2019 का लोकसभा चुनाव।

लेकिन 2019 का चुनाव सिर्फ इतना ही नहीं है। यह चुनाव, हमारी आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की नींव रखेगा।

हम लोग 2014 में चुनाव जीते ज़रूर थे लेकिन हम लोगों को तब न अपने सारे शत्रुओं का ज्ञान था और उनकी असीमित शक्तियों का भान था। हमें जहां इन बीते 5 वर्षो में, अपने सारे शत्रुओं का पता चल चुका है, वहीं लोकतांत्रिक व्यवस्था में उनसे पूरी तरह निपटने में अपनी विवशता का भी पूरा संज्ञान हो चुका है।

मेरा मानना है कि विवशता की इन बेड़ियों को काटने का सामर्थ्य हम में है। यह हम 2019 में, नरेंद्र मोदी को और भी बड़े जनमत से भारत का प्रधानमंत्री फिर से चुन कर, कर सकते है।

2014 के चुनाव में 272 प्लस का लक्ष्य था लेकिन 2019 में 350 प्लस होना चाहिए। हमे नरेंद्र मोदी को भारत की लोकसभा की दो तिहाई सीटों का विश्वास प्राप्त प्रधानमंत्री बनाना है।

हमें इस बार संविधान को बदलने वाला संख्याबल देना है क्योंकि न्यायपालिका से लेकर कार्यपालिका तक में बैठे आंतरिक शत्रुओं के निर्मूलीकरण के लिए यह अनिवार्यता है। यह भारत की अखंडता, सार्वभौमिकता व आर्थिक विकास के उत्थान की महती आवश्यकता भी है।

इसी के साथ जय श्रीराम, हर हर महादेव, एक बार फिर मोदी सरकार का नारा लगाते हुये 2019 के रण में कूद पड़िये और जीत के अपनी आगामी पीढ़ी के भविष्य को संवार दीजिये।

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