भाजपा को अधिक से अधिक हिंदू होने के लिये मजबूर करना ही हमारा दायित्व

मुझे कोई संतुष्टि नहीं है भाजपा से। Hegemony (आधिपत्य/ नायकत्व) से निकलना इतना आसान नहीं होता।

समूचा हिंदू समाज ही Muslim and Christian hegemony को सामान्य मानता है। इन दो समुदायों ने जितने violent structures खड़े किये हैं उनकी समझ के लिये structural violence को समझना ज़रूरी है।

भाजपा में कांग्रेस की आत्मा बिल्कुल नहीं है। मार्क्स ने कहा है the ideas of ruling class in every epoch are the ruling ideas.

क्या भाजपा के आने से कांग्रेस युग समाप्त हो गया? नहीं। उसकी सभी संरचनायें अभी जीवित हैं और सबसे बड़ी है देश चलाने वाला विमर्श – संविधान, जिसके आधार पर पिछले 70 साल से विमर्श और संस्थायें खड़ी की गयी हैं।

हिंदू की सबसे बड़ी कमज़ोरी यह है कि उसे सत्ता की संरचनाओं की समझ नहीं है। सत्ता में भाजपा है ही नहीं। Congress ideas are the ruling ideas.

भाजपा ने Congress structures को dismantle करने के केवल प्रतीकात्मक प्रयत्न किये हैं जिनमें शहरों के नाम बदलना भी आता है।

तो यह स्पष्ट है कि structures dismantle करने की ओर उसका ध्यान है। भाजपा का सत्ताविमर्श बनते बनते ही बनेगा और जब यह विमर्श सत्ता में आयेगा तब भाजपा सत्ता में आयेगी। अभी यह संक्रमण का दौर है।

और जो भी सत्ता में आयेगा उसे भी कांग्रेसी संरचनाओं को ध्वस्त करना होगा। इसमें समय लगता है जिसके लिये भाजपा का सत्ता में बने रहना आवश्यक है।

आपने हटा दिया तो कांग्रेसी संरचनाओं के पास कोई चारा नहीं होगा कि they reassert themselves with renewed enthusiasm and vigour and they will devastate whatever little hindu power structures have come into existence. That way we are finished for ever. Remember that hindus are facing genocide for last 1000 years and congress has been contributing to that genocide for the last 70 years.

इसलिए भाजपा को बनाये रखना ज़रूरी है। अभी भी आप नहीं समझे तो लात मारिये भाजपा को, मगर फिर लट्ठ खाने के लिये तैयार रहिये।

आचार्य सीताराम गोयल और बलराज मधोक महत्वपूर्ण विचारक थे, आचार्य जैसा तो न कोई था न होगा परंतु उनका ज़माना गया। भाजपा जैसी किसी पार्टी के केंद्र में आने की कल्पना भी उनके पास नहीं थी।

भाजपा या उसके स्थान पर कोई भी गैर कांग्रेसी दल सत्ता में आता, प्रशासनिक निरंतरता के लिये उसे पिछली कांग्रेसी संरचनाओं को ही आगे बढ़ाना था। वही भाजपा ने किया। दूसरी बार आने पर ही पता चलेगा कि भाजपा इन संरचनाओं को कितना ध्वस्त कर पाती है।

अगर मैं किताबी सिद्धांत बता रहा हूं तो आप व्यावहारिकता दिखाइये। निकाल फेंकिये भाजपा को। पर उसके बाद जो होगा वह भी सब को दिखाई देगा।

प्रतिक्रियात्मक राजनीति केवल तोड़ सकती है, मोड़ नहीं सकती। क्रांति मोड़ती है, आधार से विच्छिन्न नहीं करती। भारत के स्थानों के इस्लामी नामों को बदलना इसी मंशा की अभिव्यक्ति थी।

मोदीजी ने कश्मीरी पंडित समुदाय के लिये कुछ नहीं किया, पर फिर भी हिंदू समुदाय की निरंतरता के लिये भाजपा को लाना ही होगा। और यह हमारा दायित्व है कि भाजपा को अधिक से अधिक हिंदू होने के लिये मजबूर करें। पर उसके लिये भाजपा की सरकार लानी ही होगी। भाजपा से रुष्ट होने के बावजूद भाजपा को ही वोट देना होगा।

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